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डालनवाला गोलीकांड से दहला देहरादून: आईजी राजीव स्वरूप ने संभाली कमान, लापरवाह अफसरों को अल्टीमेटम— ‘अब सीधे सीओ की होगी जवाबदेही’

देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में अपराधियों के बुलंद हौसलों और सरेराह गोलीबारी की घटनाओं ने पुलिस प्रशासन की नींद उड़ा दी है। बुधवार को थाना डालनवाला क्षेत्र में हुए सनसनीखेज गोलीकांड के बाद पुलिस महकमे में भारी हलचल है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस महानिरीक्षक (IG), गढ़वाल परिक्षेत्र, श्री राजीव स्वरूप ने खुद मोर्चा संभाल लिया है। उन्होंने न केवल घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया, बल्कि जनपद के सभी क्षेत्राधिकारियों (CO) को दो टूक चेतावनी दी है कि अब किसी भी अपराध के लिए केवल थानेदार नहीं, बल्कि सीधे संबंधित क्षेत्राधिकारी की जवाबदेही तय की जाएगी।

घटनास्थल पर आईजी का औचक निरीक्षण

बुधवार को डालनवाला में हुई फायरिंग की घटना के तुरंत बाद आईजी गढ़वाल राजीव स्वरूप मौके पर पहुंचे। उन्होंने घटनास्थल की भौगोलिक स्थिति और वहां उपलब्ध साक्ष्यों का गहन अवलोकन किया। आईजी ने मौके पर मौजूद अधिकारियों से तकनीकी और भौतिक साक्ष्यों (Physical and Technical Evidence) के संकलन की जानकारी ली।

निरीक्षण के दौरान उन्होंने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) देहरादून को सख्त निर्देश दिए कि इस वारदात में शामिल अपराधियों की पहचान के लिए विशेष पुलिस टीमों का गठन किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि सर्विलांस, सीसीटीवी फुटेज और मुखबिर तंत्र का इस्तेमाल कर अपराधियों को पाताल से भी ढूंढ निकाला जाए।

सीओ लेवल पर होगी जवाबदेही: पुलिसिंग का नया फॉर्मूला

घटना के बाद आईजी ने परिक्षेत्रीय कार्यालय में जनपद के समस्त क्षेत्राधिकारियों (CO) के साथ एक आपातकालीन समीक्षा बैठक की। इस बैठक में आईजी का तेवर बेहद सख्त नजर आया। उन्होंने हाल के दिनों में हुई आपराधिक घटनाओं पर नाराजगी जताते हुए स्पष्ट किया कि अब ‘खानापूर्ति’ वाली पुलिसिंग नहीं चलेगी।

बैठक के प्रमुख कड़े फैसले:

  • मैदान में उतरें अधिकारी: अब सभी क्षेत्राधिकारियों को अपने क्षेत्रों में केवल ऑफिस तक सीमित रहने के बजाय नियमित रूप से भ्रमणशील रहना होगा। उन्हें फोर्स की उपस्थिति सड़कों पर सुनिश्चित करनी होगी।

  • रैंडम चेकिंग का जाल: रूटीन चेकिंग के साथ-साथ अब संदिग्ध व्यक्तियों की धरपकड़ के लिए अलग-अलग स्थानों पर अचानक (Random) चेकिंग की जाएगी, ताकि अपराधियों में भय पैदा हो।

  • सीओ की जवाबदेही: सबसे महत्वपूर्ण निर्देश यह रहा कि यदि किसी क्षेत्र में अपराध की पुनरावृत्ति होती है, तो संबंधित थानाध्यक्ष और चौकी प्रभारी के साथ-साथ अब क्षेत्राधिकारी (CO) के खिलाफ भी दंडात्मक कार्यवाही की जाएगी।

विवादित मामलों पर पैनी नजर

आईजी राजीव स्वरूप ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि आपसी रंजिश, पुरानी अदावत और विशेषकर ‘भूमि विवाद’ से जुड़े मामलों को हल्के में न लिया जाए। अक्सर ऐसे विवाद ही बड़े अपराधों की जड़ बनते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों का निस्तारण क्षेत्राधिकारी अपने निकट पर्यवेक्षण (Supervision) में कराएंगे, ताकि किसी भी अनहोनी की आशंका को समय रहते खत्म किया जा सके।

सोशल मीडिया और अफवाहों पर ‘डिजिटल स्ट्राइक’

बदलते दौर में सोशल मीडिया अपराध और अफवाहों का बड़ा केंद्र बन गया है। आईजी ने निर्देश दिए कि सोशल मीडिया मॉनिटरिंग सेल को और अधिक सुदृढ़ बनाया जाए। किसी भी भ्रामक सूचना या आपत्तिजनक पोस्ट पर पुलिस बिना समय गंवाए तत्काल संज्ञान लेकर वैधानिक कार्यवाही सुनिश्चित करे, ताकि शहर का सौहार्द न बिगड़े।

संस्थानों की सुरक्षा और जन-जागरूकता

अपराध नियंत्रण के साथ-साथ आईजी ने प्रिवेंटिव पुलिसिंग पर भी जोर दिया। क्षेत्राधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे समय-समय पर बैंकों की सुरक्षा व्यवस्था का ऑडिट करें। इसके अलावा, विद्यालयों और शिक्षण संस्थानों में जाकर छात्रों को साइबर अपराध और सुरक्षा के प्रति जागरूक करें, ताकि समाज का हर वर्ग सुरक्षित महसूस कर सके।

अपराधियों के लिए चेतावनी, जनता के लिए भरोसा

डालनवाला गोलीकांड के बाद आईजी गढ़वाल का यह कड़ा रुख साफ संदेश देता है कि देहरादून पुलिस अब ‘एक्शन मोड’ में है। अधिकारियों की जवाबदेही तय करने से लेकर सड़कों पर पुलिस की सक्रियता बढ़ाने तक, इन कदमों का उद्देश्य राजधानी में फिर से शांति स्थापित करना और आमजन के मन में सुरक्षा की भावना को प्रबल करना है। अपराधियों के लिए यह एक साफ चेतावनी है— ‘सुधर जाओ या जेल जाओ।’

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