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हल्द्वानी में बरसे हरीश रावत: ‘मुस्लिम यूनिवर्सिटी’ को बताया भाजपा का चुनावी ताबीज, कानून व्यवस्था पर सरकार को घेरा

हल्द्वानी (उत्तराखंड)। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता हरीश रावत ने एक बार फिर अपने तीखे तेवरों से प्रदेश की सियासत में हलचल पैदा कर दी है। हल्द्वानी दौरे पर पहुंचे रावत ने सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर सीधा प्रहार करते हुए ‘मुस्लिम यूनिवर्सिटी’ के मुद्दे को चुनावी हथकंडा करार दिया। उन्होंने कहा कि जब भी चुनाव नजदीक आते हैं, भाजपा ध्रुवीकरण की राजनीति के तहत इस पुराने राग को अलापने लगती है।

स्वागत और राजनीतिक संदेश

बुधवार को हल्द्वानी पहुंचने पर विधायक सुमित हृदयेश के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पूर्व मुख्यमंत्री का जोरदार स्वागत किया। कार्यकर्ताओं में जोश भरते हुए रावत ने साफ किया कि आगामी चुनावों के लिए कांग्रेस पूरी तरह तैयार है और भाजपा के ‘भ्रामक विमर्श’ का जवाब जनता के बीच जाकर दिया जाएगा।

‘मुस्लिम यूनिवर्सिटी भाजपा का चुनावी ताबीज’

प्रेस वार्ता के दौरान हरीश रावत ने भाजपा पर तंज कसते हुए कहा, भाजपा नेताओं को चाहिए कि वे मुस्लिम यूनिवर्सिटी के नाम का एक ताबीज बनवाएं और उसे अपने गले में डाल लें। साल 2022 के विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने इसी ताबीज के सहारे सत्ता की सीढ़ियां चढ़ी थीं और अब 2027 की तैयारी के लिए फिर से वही ‘तबीजाए नमों’ का जाप शुरू कर दिया गया है।”

रावत ने देहरादून में जमीन आवंटन को लेकर उठ रहे सवालों को पूरी तरह निराधार और तथ्यों से परे बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिस भूखंड की बात भाजपा कर रही है, वहां जमीन खरीदने वाले अधिकांश लोग हिंदू समुदाय से हैं। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि यदि किसी भी सरकार ने जमीन आवंटित की है, तो वह नियमानुसार ही हुई होगी। भाजपा केवल जनता का ध्यान बुनियादी मुद्दों से भटकाने के लिए इस तरह के सांप्रदायिक विवाद पैदा कर रही है।

धराशायी होती कानून व्यवस्था पर चिंता

राजनीतिक हमलों के अलावा, हरीश रावत ने प्रदेश की वर्तमान सुरक्षा स्थिति पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तराखंड, जो अपनी शांति के लिए जाना जाता था, अब अपराधियों की शरणस्थली बनता जा रहा है।

रावत ने निम्नलिखित बिंदुओं पर सरकार को घेरा:

  • राजधानी में बढ़ता अपराध: देहरादून जैसी वीवीआईपी जगह पर आए दिन हो रही हत्याओं ने पुलिस प्रशासन की मुस्तैदी पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • महिला सुरक्षा: प्रदेश में महिलाओं के विरुद्ध बढ़ते अपराधों पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि आज बहन-बेटियां घर से निकलने में असुरक्षित महसूस कर रही हैं।

  • पुलिस की कार्यप्रणाली: पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि पुलिस का ध्यान कानून व्यवस्था बनाए रखने के बजाय ‘अन्य कार्यों’ और सत्ता के दबाव को झेलने में लगा है, जिसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।

2027 का चुनावी रण और कांग्रेस की रणनीति

हल्द्वानी में हरीश रावत का यह कड़ा रुख दर्शाता है कि कांग्रेस अब भाजपा के हिंदुत्व कार्ड और ध्रुवीकरण की राजनीति का जवाब आक्रामक तरीके से देने के मूड में है। रावत ने संकेत दिया कि जमीन आवंटन और यूनिवर्सिटी जैसे मुद्दों पर भाजपा का घेराव केवल प्रेस कॉन्फ्रेंस तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे जन-आंदोलन का रूप दिया जाएगा।

विधायक सुमित हृदयेश ने भी रावत के सुर में सुर मिलाते हुए कहा कि हल्द्वानी सहित पूरे कुमाऊं में विकास कार्य ठप पड़े हैं और सरकार केवल बयानबाजी में उलझी हुई है। उन्होंने कहा कि जनता अब भाजपा की ‘विभाजनकारी राजनीति’ को समझ चुकी है और बदलाव का मन बना चुकी है।

दांव-पेच की राजनीति

उत्तराखंड की राजनीति में ‘मुस्लिम यूनिवर्सिटी’ का जिन्न एक बार फिर बाहर आ गया है। जहां भाजपा इसे कांग्रेस की तुष्टिकरण नीति का हिस्सा बताती रही है, वहीं हरीश रावत ने इसे भाजपा की ‘सत्ता प्राप्ति की जड़ी-बूटी’ बताकर पलटवार किया है। आने वाले दिनों में यह विवाद शांत होने के बजाय और गहराने के आसार हैं, क्योंकि दोनों ही दल 2027 की बिसात बिछाने में जुट गए हैं।

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