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राजपाल यादव के संकट में साथ आए तेज प्रताप यादव: 11 लाख की मदद का ऐलान, जानें 5 करोड़ के कर्ज से तिहाड़ जेल तक की पूरी कहानी

नई दिल्ली/पटना: बॉलीवुड के दिग्गज कॉमेडियन राजपाल यादव इन दिनों अपने जीवन के सबसे कठिन दौर से गुजर रहे हैं। चेक बाउंस और करोड़ों रुपये के बकाया मामले में सरेंडर करने के बाद वह फिलहाल तिहाड़ जेल में अपनी सजा काट रहे हैं। इस संकट की घड़ी में जहां फिल्म जगत से सोनू सूद जैसे नाम मदद के लिए आगे आए हैं, वहीं अब राजनीति के गलियारों से भी उन्हें बड़ा समर्थन मिला है। बिहार सरकार के पूर्व मंत्री और जनशक्ति जनता दल (JJD) के राष्ट्रीय अध्यक्ष तेज प्रताप यादव ने राजपाल यादव के परिवार के लिए बड़ी आर्थिक सहायता की घोषणा की है।

तेज प्रताप यादव का भावुक कदम: 11 लाख रुपये की मदद

तेज प्रताप यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट के जरिए राजपाल यादव के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने लिखा कि उन्हें राव इंदरजीत यादव की पोस्ट के माध्यम से अभिनेता के परिवार की पीड़ा का पता चला।

तेज प्रताप ने अपनी पोस्ट में कहा:

“मानवीय करुणा एवं सहयोग की भावना से, मैं JJD परिवार की ओर से ₹11,00,000 (ग्यारह लाख रुपये) की आर्थिक सहायता राजपाल यादव जी के परिवार को प्रदान कर रहा हूं। इस अत्यंत कठिन समय में मेरा पूरा परिवार उनके साथ मजबूती से खड़ा है।”


विवाद की जड़: 2010 का वो 5 करोड़ का लोन

राजपाल यादव की कानूनी मुसीबतें आज की नहीं, बल्कि डेढ़ दशक पुरानी हैं। साल 2010 में उन्होंने अपने निर्देशन की पहली फिल्म ‘अता पता लापता’ बनाने का निर्णय लिया था। इस प्रोजेक्ट के लिए उन्होंने दिल्ली स्थित ‘मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड’ से 5 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था।

साल 2012 में फिल्म रिलीज हुई, लेकिन बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह पिट गई। फिल्म के असफल होने के कारण राजपाल यादव कर्ज चुकाने में असमर्थ रहे। इसके बाद मामला अदालती चौखट तक पहुंच गया और यहीं से उनकी मुश्किलें बढ़ती चली गईं।

कानूनी कार्यवाही और सजा का सफर

चेक बाउंस होने के बाद साल 2018 में दिल्ली की मजिस्ट्रेट कोर्ट ने राजपाल यादव और उनकी पत्नी राधा यादव को ‘नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट’ की धारा 138 के तहत दोषी करार दिया।

  • 2018: कोर्ट ने 6 महीने की जेल की सजा सुनाई।

  • 2019: सेशन कोर्ट ने इस सजा को बरकरार रखा।

  • 2024: दिल्ली हाई कोर्ट ने सजा को अस्थायी रूप से सस्पेंड किया, लेकिन शर्त रखी कि उन्हें बकाया राशि (जो ब्याज समेत 9 करोड़ हो चुकी थी) चुकानी होगी।


क्यों सख्त हुआ कोर्ट का रुख?

अदालत ने राजपाल यादव को कई मौके दिए, लेकिन बार-बार डेडलाइन मिस होने के कारण कोर्ट का धैर्य जवाब दे गया। अक्टूबर 2025 तक उन्होंने 75 लाख रुपये जमा किए थे, लेकिन जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने स्पष्ट किया कि ‘सेलेब्रिटी स्टेटस’ होने का मतलब यह नहीं कि कानून के साथ नरमी बरती जाए।

अदालत ने टिप्पणी की कि राजपाल यादव लगभग 20 बार अपने भुगतान के वादों से मुकर चुके हैं। 4 फरवरी 2026 को जब उनके वकील ने फिर से मोहलत मांगी, तो कोर्ट ने उसे सिरे से खारिज कर दिया। अंततः 5 फरवरी 2026 को शाम 4 बजे राजपाल यादव ने तिहाड़ जेल में सरेंडर कर दिया।


इंडस्ट्री और फैंस में चिंता की लहर

राजपाल यादव ने भारतीय सिनेमा को ‘भूल भुलैया’, ‘हंगामा’ और ‘चुप चुप के’ जैसी अनगिनत यादगार फिल्में दी हैं। उनके जेल जाने की खबर ने उनके प्रशंसकों को झकझोर कर रख दिया है। सोशल मीडिया पर लोग इसे एक कलाकार की मजबूरी और गलत वित्तीय फैसलों का नतीजा बता रहे हैं।

सोनू सूद के बाद तेज प्रताप यादव की इस पहल ने यह संदेश दिया है कि संकट के समय मानवीय संवेदनाएं सीमाओं से परे होती हैं। अब देखना यह होगा कि क्या यह आर्थिक मदद राजपाल यादव को इस कानूनी भंवर से बाहर निकालने में कारगर साबित होती है या नहीं।


राजपाल यादव का मामला मनोरंजन जगत के लिए एक सबक की तरह है कि वित्तीय प्रबंधन में चूक कितनी भारी पड़ सकती है। फिलहाल, 11 लाख रुपये की यह मदद उनके परिवार के लिए संजीवनी साबित हो सकती है, लेकिन 9 करोड़ के पहाड़ जैसे कर्ज को उतारना अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

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