देहरादून/रुड़की: हिमालय की तलहटी में स्थित देश के प्रतिष्ठित संस्थान भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT), रुड़की ने एक बार फिर नवाचार और उद्यमशीलता की नई इबारत लिखनी शुरू कर दी है। शुक्रवार, 6 फरवरी को आईआईटी रुड़की के परिसर में उत्तर भारत के सबसे बड़े उद्यमिता महोत्सव ‘ई-समिट 2026’ के 18वें संस्करण की भव्य शुरुआत हुई। तीन दिवसीय इस महोत्सव के पहले ही दिन उद्योग जगत, शिक्षा क्षेत्र और सरकारी संस्थानों के दिग्गजों ने शिरकत कर स्टार्टअप की दुनिया में भविष्य की संभावनाओं पर प्रकाश डाला।
दीप प्रज्ज्वलन के साथ नई सोच का उदय
ई-समिट 2026 का औपचारिक उद्घाटन मुख्य अतिथि विनोद बाहेती (सीईओ, अडानी सीमेंट) और विशिष्ट अतिथि मोहित सक्सेना (सह-संस्थापक एवं सीटीओ, इनमोबी) द्वारा किया गया। पारंपरिक दीप प्रज्ज्वलन समारोह के साथ इस उत्सव की शुरुआत हुई, जो अज्ञानता के अंधेरे को दूर कर ज्ञान, नवाचार और नेतृत्व की भावना का संचार करने का प्रतीक है। इस अवसर पर संस्थान के वरिष्ठ संकाय सदस्य, नीति निर्माता और देश के कोने-कोने से आए युवा उद्यमी मौजूद रहे।
शिक्षा और नवाचार: राष्ट्र निर्माण की धुरी
उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रोफेसर कमल किशोर पंत ने एक बेहद प्रेरक संदेश दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका अब केवल डिग्री देने तक सीमित नहीं रह गई है।
“आईआईटी रुड़की जैसे संस्थानों की जिम्मेदारी केवल तकनीकी ज्ञान प्रदान करना ही नहीं, बल्कि ऐसी उद्यमशील सोच (Entrepreneurial Mindset) विकसित करना है जो राष्ट्रीय और वैश्विक चुनौतियों का समाधान कर सके। ई-समिट जैसे मंच भविष्य के उन नेताओं को तैयार करते हैं जो कल के जॉब सीकर्स (रोजगार चाहने वाले) नहीं बल्कि जॉब क्रिएटर्स (रोजगार प्रदाता) बनेंगे।” — प्रो. कमल किशोर पंत, निदेशक, आईआईटी रुड़की
इनमोबी के मोहित सक्सेना ने दिया ‘बड़ी सोच’ का मंत्र
आईआईटी रुड़की के पूर्व छात्र और ग्लोबल यूनिकॉर्न कंपनी इनमोबी (InMobi) के सह-संस्थापक मोहित सक्सेना ने जब मंच संभाला, तो छात्रों का उत्साह देखने लायक था। उन्होंने अपने निजी अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि कैसे एक साधारण विचार को वैश्विक स्तर पर पहुँचाया जा सकता है।
सक्सेना ने कहा, “उद्यमिता केवल व्यवसाय शुरू करना नहीं है, बल्कि यह वास्तविक समस्याओं को अटूट विश्वास और लचीलेपन (Resilience) के साथ हल करने की कला है। इस संस्थान ने हमेशा साहसिक सोच वाले लीडर्स दिए हैं और ई-समिट 2026 इसी परंपरा को आगे बढ़ाने वाला एक सशक्त उत्प्रेरक (Catalyst) है।”

उद्योग-अकादमिक साझेदारी: अडानी सीमेंट और आईआईटी रुड़की के बीच एमओयू
इस उद्घाटन समारोह की एक बड़ी उपलब्धि आईआईटी रुड़की और अडानी सीमेंट के बीच ‘फ्यूचरएक्स’ (FutureX) कार्यक्रम के तहत हुए समझौते (MoU) का आदान-प्रदान रही। यह साझेदारी दर्शाती है कि कैसे कॉर्पोरेट जगत और शैक्षणिक संस्थान मिलकर नवाचार को बढ़ावा दे सकते हैं।
अडानी सीमेंट के सीईओ विनोद बाहेती ने कहा कि सतत विकास (Sustainable Development) के लिए ऐसी साझेदारियाँ अनिवार्य हैं। उन्होंने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि आज के दौर में ऐसे समाधानों की आवश्यकता है जो प्रभावशाली होने के साथ-साथ ‘स्केलेबल’ और जिम्मेदार भी हों।
[Image showing the collaboration between industry and academia for startup growth]
मंथन का दौर: फायरसाइड चैट और सरकारी पैनल चर्चा
ई-समिट के पहले दिन केवल भाषणों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें गहन चर्चाओं का दौर भी चला। ‘फायरसाइड चैट’ के माध्यम से सफल उद्यमियों ने स्टार्टअप जगत की बारीकियों को समझाया। वहीं, एक महत्वपूर्ण सरकारी पैनल चर्चा भी आयोजित की गई जिसमें निम्नलिखित संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया:
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सिडबी (SIDBI)
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नाबार्ड (NABARD)
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एचपीसीएल (HPCL)
इन प्रतिनिधियों ने सरकार द्वारा स्टार्टअप्स को दी जाने वाली वित्तीय सहायता, ऋण योजनाओं और नीतिगत ढांचे पर विस्तार से जानकारी दी, जिससे नवागंतुक उद्यमियों को अपना मार्ग प्रशस्त करने में मदद मिल सके।
महिला उद्यमिता और अनकही कहानियों पर फोकस
महोत्सव में समावेशिता (Inclusivity) को बढ़ावा देने के लिए विशेष सत्र आयोजित किए गए। ‘वीमेन हू बिल्ड’ (Women Who Build) सत्र में महिला उद्यमियों के संघर्ष और सफलता की कहानियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके साथ ही ‘स्टोरीज बिहाइंड द स्पॉटलाइट’ सत्र में उन पर्दे के पीछे के नायकों की चर्चा हुई, जो स्टार्टअप को सफल बनाने में रीढ़ की हड्डी की तरह काम करते हैं।
क्यों खास है ई-समिट 2026?
यह महोत्सव केवल एक इवेंट नहीं, बल्कि नवाचार और उद्यमिता का एक ऐसा इकोसिस्टम है जहाँ:
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नेटवर्किंग: छात्रों को सीधे उद्योग जगत के दिग्गजों से मिलने का मौका मिलता है।
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मेंटरशिप: अनुभवी विशेषज्ञ स्टार्टअप आइडियाज को तराशने में मदद करते हैं।
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फंडिंग के अवसर: कई सत्रों में निवेशक (Investors) भी शामिल होते हैं, जो होनहार प्रोजेक्ट्स को वित्तीय सहायता प्रदान करते हैं।
आईआईटी रुड़की का ई-समिट 2026 भारतीय युवाओं की बदलती आकांक्षाओं का प्रतिबिंब है। 6 फरवरी से शुरू हुआ यह सफर आने वाले दिनों में और भी रोमांचक प्रतियोगिताओं और चर्चाओं का गवाह बनेगा। यह स्पष्ट है कि यदि भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनना है, तो ऐसे सम्मेलनों के माध्यम से निकलने वाले नवाचार ही उसकी बुनियाद रखेंगे।



