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Reading: Uttarakhand: जब सिस्टम सो गया तो विधायक ने संभाली कमान; तारागड़ा के ग्रामीणों को मिली नदी पार करने के लिए ‘नाव’
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उत्तराखंडफीचर्ड

Uttarakhand: जब सिस्टम सो गया तो विधायक ने संभाली कमान; तारागड़ा के ग्रामीणों को मिली नदी पार करने के लिए ‘नाव’

The Hill India News
Last updated: February 7, 2026 3:28 am
The Hill India News
Published: February 7, 2026
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Photo: Facebook
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पिथौरागढ़/पंचेश्वर: उत्तराखंड के सीमांत जनपदों में आपदा के जख्म आज भी गहरे हैं, लेकिन जब सरकारी तंत्र की सुस्ती ग्रामीणों की जान पर भारी पड़ने लगे, तो जन प्रतिनिधियों को ही आगे आना पड़ता है। कुछ ऐसी ही मिसाल पेश की है पिथौरागढ़ के विधायक मयूख महर ने। उन्होंने दुर्गम क्षेत्र तारागड़ा के ग्रामीणों की सालों पुरानी और जानलेवा समस्या का समाधान करते हुए उन्हें पंचेश्वर नदी पार करने के लिए अपने निजी खर्च पर एक नाव और सुरक्षा के लिए लाइफ जैकेट भेंट की है।

Contents
आपदा ने छीनी थी राह, चट्टानों के बीच सफर था मजबूरीविधायक मयूख महर की मानवीय पहल“जनता की सेवा ही मेरा परम दायित्व”ग्रामीणों ने जताया आभार: अब आसान होगी डगरसिस्टम के लिए एक सबक

आपदा ने छीनी थी राह, चट्टानों के बीच सफर था मजबूरी

पिथौरागढ़ का तारागड़ा गांव भौगोलिक रूप से चंपावत के लोहाघाट और नेपाल की सीमा पर स्थित है। विगत वर्ष आई भीषण आपदा के दौरान इस गांव को लोहाघाट से जोड़ने वाला मुख्य पैदल मार्ग पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था। आलम यह था कि ग्रामीण जान जोखिम में डालकर चट्टानों के बीच से आवाजाही करने को मजबूर थे।

तारागड़ा के ग्रामीणों के लिए जिला मुख्यालय पिथौरागढ़ पहुंचना न केवल समय लेने वाला है, बल्कि आर्थिक रूप से भी महंगा पड़ता है। एक तरफ का किराया 500 रुपये से अधिक होने के कारण ग्रामीण अपनी दैनिक जरूरतों, राशन और इलाज के लिए पास के लोहाघाट बाजार पर निर्भर हैं। पैदल रास्ता टूटने के कारण सामान ढोने के लिए ग्रामीणों को भारी अतिरिक्त किराया चुकाना पड़ रहा था।


विधायक मयूख महर की मानवीय पहल

ग्रामीणों की इस व्यथा को जब विधायक मयूख महर के सामने रखा गया, तो उन्होंने सरकारी फाइलों के मूव होने का इंतजार करने के बजाय त्वरित समाधान का निर्णय लिया। उन्होंने दूरस्थ क्षेत्र पंचेश्वर के तारागड़ा पहुंचकर खुद अपने खर्च पर तैयार करवाई गई नाव ग्रामीणों को सौंपी।

सुविधा और सुरक्षा का संगम:

  • नाव की सौगात: अब ग्रामीण सुरक्षित तरीके से पंचेश्वर नदी पार कर कम समय में लोहाघाट पहुंच सकेंगे।

  • लाइफ जैकेट: यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए विधायक ने नाव के साथ लाइफ जैकेट भी प्रदान की हैं, ताकि बरसात या नदी का जलस्तर बढ़ने पर कोई अप्रिय घटना न हो।

  • आर्थिक राहत: नाव मिलने से अब ग्रामीणों को सामान लाने-ले जाने के लिए लगने वाले अतिरिक्त 100-200 रुपये के बोझ से मुक्ति मिलेगी।


“जनता की सेवा ही मेरा परम दायित्व”

नाव सौंपने के दौरान विधायक मयूख महर ने प्रशासन और सिस्टम की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा:

“तारागड़ा को जोड़ने वाला पैदल मार्ग लंबे समय से क्षतिग्रस्त है, जिसे ठीक करना सिस्टम की जिम्मेदारी थी, लेकिन दुर्भाग्यवश इसे नजरअंदाज किया गया। ग्रामीणों को जोखिम में देख मैं चुप नहीं बैठ सकता था। जनता की परेशानी का समाधान करना मेरा प्राथमिक दायित्व है और यह नाव उसी दिशा में एक छोटा सा प्रयास है।”


ग्रामीणों ने जताया आभार: अब आसान होगी डगर

तारागड़ा के ग्रामवासियों ने विधायक की इस पहल का पुरजोर स्वागत किया है। ग्रामीणों का कहना है कि रास्ता टूटने के बाद से बीमारों को अस्पताल ले जाना और रोजमर्रा का राशन लाना एक दुःस्वप्न जैसा हो गया था। अब नाव के जरिए वे कुछ ही मिनटों में नदी पार कर लोहाघाट पहुंच सकेंगे, जिससे उनके समय और धन दोनों की बचत होगी।


सिस्टम के लिए एक सबक

विधायक मयूख महर की यह पहल यह दर्शाती है कि यदि इच्छाशक्ति हो, तो दुर्गम क्षेत्रों की समस्याओं का समाधान संभव है। हालांकि, यह घटना उत्तराखंड के आपदा प्रबंधन और लोक निर्माण विभाग (PWD) के लिए एक बड़ा सवाल भी छोड़ती है कि आखिर एक साल बीत जाने के बाद भी सीमांत गांव की लाइफलाइन कही जाने वाली सड़क की मरम्मत क्यों नहीं की गई?

फिलहाल, तारागड़ा के ग्रामीणों के लिए यह नाव किसी वरदान से कम नहीं है, जो उन्हें उनकी बुनियादी जरूरतों से जोड़े रखेगी।

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