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भारत-अमेरिका ट्रेड डील: ‘खेती और डेयरी पर नहीं आएगा कोई आंच’, कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विपक्ष के आरोपों को नकारा

The Hill India News
Last updated: February 6, 2026 1:56 pm
The Hill India News
Published: February 6, 2026
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नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में हुए ऐतिहासिक व्यापार समझौते (Trade Deal) को लेकर देश के राजनीतिक गलियारों में गरमागरम बहस छिड़ गई है। संसद में विपक्ष द्वारा लगाए गए आरोपों और किसानों की चिंता के बीच केंद्र सरकार ने मोर्चा संभाल लिया है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि इस समझौते में भारतीय कृषि और डेयरी सेक्टर के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है और उनके साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं किया गया है।

Contents
डेयरी और संवेदनशील फसलों पर ‘कवच’ बरकरारवाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने संसद में रखा पक्षनिर्यात की नई संभावनाओं से किसानों को होगा सीधा लाभविपक्ष के ‘भ्रम’ पर सरकार का प्रहारसंतुलन की ओर एक कदम

दिल्ली में मीडिया से रूबरू होते हुए कृषि मंत्री ने आश्वस्त किया कि भारत के मुख्य अनाज, फल, मिलेट्स और डेयरी उत्पाद पूरी तरह सुरक्षित हैं। उन्होंने विपक्ष पर भ्रम फैलाने का आरोप लगाते हुए कहा कि यह डील भारतीय किसानों के लिए ‘खतरे’ की नहीं बल्कि ‘अवसरों’ की नई राह खोलने वाली है।

डेयरी और संवेदनशील फसलों पर ‘कवच’ बरकरार

विपक्ष का मुख्य आरोप रहा है कि अमेरिकी डेयरी उत्पादों के लिए भारतीय बाजार खोलने से स्थानीय दुग्ध उत्पादकों को नुकसान होगा। इन आशंकाओं को खारिज करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा, “हमारी मुख्य फसलें और डेयरी उत्पाद पूरी तरह संरक्षित हैं। भारतीय डेयरी सेक्टर पर किसी भी तरह का खतरा नहीं है। हमने बाजार को इस तरह से नहीं खोला है कि हमारे छोटे और सीमांत किसानों पर किसी भी प्रकार का आर्थिक दबाव बने।”

अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी के उस ट्वीट पर भी उन्होंने स्थिति स्पष्ट की जिसमें अमेरिकी कृषि उत्पादों की भारत में अधिक पहुंच की बात कही गई थी। कृषि मंत्री ने कहा कि अमेरिकी उत्पादों के लिए कुछ रियायतें संतुलित तरीके से दी गई हैं, लेकिन भारतीय किसानों के हितों की कीमत पर नहीं।

वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने संसद में रखा पक्ष

इससे पहले वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने संसद में इस समझौते की बारीकियों को साझा किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि अमेरिका ने भारत के लिए जो टैरिफ कम किए हैं, वे कई प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में काफी कम हैं। गोयल ने सदन को बताया, “यह समझौता अमेरिकी बाजार में भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता (Export Competitiveness) को बढ़ाने वाला है। विशेष रूप से श्रम-प्रधान क्षेत्रों और विनिर्माण (Manufacturing) में हमारे निर्यातकों को तुलनात्मक लाभ मिलेगा।”

वाणिज्य मंत्री ने दोहराया कि खाद्य और कृषि क्षेत्र की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए ही वार्ता की गई थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत के निर्यात आधारित विनिर्माण क्षेत्र के लिए यह डील मील का पत्थर साबित होगी।

निर्यात की नई संभावनाओं से किसानों को होगा सीधा लाभ

कृषि मंत्रालय के आंकड़ों का हवाला देते हुए शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि भारत पहले से ही चावल और मसालों का एक बड़ा निर्यातक है। हालिया आंकड़ों के मुताबिक, भारत ने लगभग 63,000 करोड़ रुपये के चावल का निर्यात किया है।

इस ट्रेड डील के फायदों को गिनाते हुए उन्होंने कहा:

  • चावल और मसाले: टैरिफ कम होने से अमेरिका के विशाल बाजार में भारतीय चावल और मसालों की मांग बढ़ेगी।

  • टेक्सटाइल और कपास: जब भारतीय टेक्सटाइल का निर्यात बढ़ेगा, तो इसकी सीधी मांग कपास की खेती करने वाले किसानों तक पहुंचेगी, जिससे उन्हें फसलों का बेहतर दाम मिल सकेगा।

  • रोजगार: निर्यात बढ़ने से ग्रामीण क्षेत्रों में प्रसंस्करण (Processing) और पैकेजिंग के क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।

विपक्ष के ‘भ्रम’ पर सरकार का प्रहार

संसद में विपक्ष के हंगामे को ‘राजनीति से प्रेरित’ बताते हुए कृषि मंत्री ने कहा कि कुछ दल जानबूझकर किसानों के बीच डर का माहौल पैदा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार की नीति हमेशा से ‘किसान प्रथम’ की रही है। यह समझौता न केवल व्यापारिक है, बल्कि यह रणनीतिक रूप से भारत को वैश्विक सप्लाई चेन में एक मजबूत खिलाड़ी के रूप में स्थापित करेगा।

शिवराज सिंह चौहान ने अंत में कहा, “भारत का किसान आज ग्लोबल मार्केट में प्रतिस्पर्धा करने के लिए तैयार है। यह डील उसे वह प्लेटफॉर्म प्रदान करेगी जहाँ वह अपनी उपज को दुनिया के सबसे अमीर बाजारों तक ले जा सके।”

संतुलन की ओर एक कदम

भारत-अमेरिका के बीच यह ट्रेड डील वैश्विक व्यापार के बदलते समीकरणों के बीच एक संतुलित कदम दिखाई देती है। जहाँ एक ओर सरकार निर्यात को बढ़ावा देकर विदेशी मुद्रा और आर्थिक विकास की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर घरेलू कृषि बाजार को विदेशी आक्रमण से बचाने का दावा भी कर रही है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि धरातल पर इस समझौते का असर किसानों की आय और बाजार की कीमतों पर किस रूप में पड़ता है।

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