
रुद्रप्रयाग/कमेड़ा: उत्तराखंड की कमान संभालते ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ‘सरलीकरण, समाधान और निस्तारण’ का जो मंत्र दिया था, वह अब धरातल पर उतरता दिख रहा है। “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” अभियान के तहत गुरुवार को रुद्रप्रयाग जनपद की न्याय पंचायत सतेराखाल के अंतर्गत ग्राम कमेड़ा में एक विशाल बहुउद्देशीय शिविर का आयोजन किया गया।
इस शिविर की सबसे खास बात यह रही कि प्रभारी सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार खुद मुख्यमंत्री के प्रतिनिधि के रूप में ग्रामीणों के बीच पहुंचे। उन्होंने न केवल प्रशासनिक व्यवस्थाओं का जायजा लिया, बल्कि ग्रामीणों के साथ सीधा संवाद कर उनकी समस्याओं को सुना और अधिकारियों को तत्काल समाधान के कड़े निर्देश दिए।
अब दफ्तरों के चक्कर नहीं, गांव में ही मिल रहा समाधान
शिविर की अध्यक्षता करते हुए प्रभारी सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने स्पष्ट किया कि अब उत्तराखंड का आम जनमानस अपनी शिकायतों के लिए जिला मुख्यालयों या विभागीय कार्यालयों के चक्कर नहीं काटेगा। उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री जी का स्पष्ट निर्देश है कि सरकार जनता के पास जाएगी, न कि जनता सरकार के पास।”
कमेड़ा शिविर की रिपोर्ट:
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कुल प्राप्त समस्याएं: 35
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मौके पर निस्तारण: 20 (लगभग 60% सफलता दर)
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लंबित मामले: 15 (समयबद्ध कार्यवाही के निर्देश जारी)
एक ही छत के नीचे दर्जनों विभागों की सेवाएं
जिलाधिकारी प्रतीक जैन के नेतृत्व में आयोजित इस शिविर में प्रशासनिक सक्रियता का अद्भुत नजारा देखने को मिला। उद्यान, कृषि, पशुपालन, डेयरी, मत्स्य, समाज कल्याण, स्वास्थ्य और राजस्व जैसे महत्वपूर्ण विभागों ने अपने स्टॉल लगाए थे।
शिविर में मिलने वाली प्रमुख सेवाएं:
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पेंशन योजनाएं: वृद्धावस्था, विधवा एवं दिव्यांग पेंशन के आवेदन और सत्यापन।
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डिजिटल सेवाएं: आधार कार्ड सुधार, राशन कार्ड ई-केवाईसी और एलपीजी केवाईसी।
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स्वास्थ्य लाभ: आयुष्मान भारत योजना के तहत नए कार्ड और स्वास्थ्य परीक्षण।
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राजस्व: आय, जाति एवं निवास प्रमाण पत्रों का मौके पर निर्गमन।
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समान नागरिक संहिता (UCC): यूसीसी पंजीकरण के संबंध में जागरूकता और सहायता।
जनसुनवाई में गूंजे पेयजल, सड़क और मुआवजे के मुद्दे
जनसुनवाई के दौरान ग्रामीणों ने अपनी बुनियादी समस्याओं को प्रखरता से रखा। तल्ला नागपुर पेयजल पंपिंग योजना से पर्याप्त पानी न मिलने की शिकायत पर प्रभारी सचिव ने जल संस्थान के अधिकारियों को फटकार लगाते हुए तत्काल सुधार के निर्देश दिए।
वहीं, ग्राम प्रधान ऊषा देवी ने खराल, चांदियूं एवं गढ़धार क्षेत्र के अस्तित्व को लेकर महत्वपूर्ण मांग उठाई कि इन्हें नगर पालिका में सम्मिलित न किया जाए। इसके अतिरिक्त, ग्रामीण उमाशंकर सेमवाल ने लोक निर्माण विभाग द्वारा अधिग्रहित भूमि का मुआवजा न मिलने की पीड़ा बताई, जिस पर प्रभारी सचिव ने फाइल को तत्काल ट्रैक करने के आदेश दिए।
अधिकारियों को सख्त हिदायत: “फाइल नहीं, समाधान बढ़ना चाहिए”
प्रभारी सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने विभिन्न विभागों के स्टॉलों का निरीक्षण करते हुए अधिकारियों से कहा कि शिविर का उद्देश्य केवल भीड़ जुटाना नहीं, बल्कि अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति को लाभ पहुँचाना है। उन्होंने कहा कि जिन समस्याओं का समाधान मौके पर नहीं हो सका है, उनके लिए एक निश्चित समयसीमा (Deadline) तय की गई है। यदि उस अवधि में समाधान नहीं हुआ, तो संबंधित अधिकारी की जवाबदेही तय की जाएगी।
“प्रशासन की जिम्मेदारी है कि जनसमस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर हो। सरकार और जनता के बीच सीधा संवाद ही सुशासन की सबसे बड़ी पहचान है।” – डॉ. आर. राजेश कुमार, प्रभारी सचिव
जनभागीदारी से सुदृढ़ होगा लोकतंत्र
शिविर में उपस्थित जिला पंचायत सदस्य गंभीर सिंह बिष्ट और मुख्य विकास अधिकारी राजेंद्र सिंह रावत ने भी ग्रामीणों को केंद्र एवं राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी। प्रशासन ने ग्रामीणों से अपील की कि वे अपनी शिकायतों का नियमित फॉलोअप लें और किसी भी स्तर पर लापरवाही होने पर उच्चाधिकारियों को सूचित करें।
इस अवसर पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा आयोजित आयुष्मान आरोग्य शिविर में सैकड़ों ग्रामीणों की निःशुल्क जांच की गई और दवाइयां वितरित की गईं।
सुशासन के सारथी: प्रमुख उपस्थित अधिकारी
शिविर की सफलता में उपजिलाधिकारी सोहन सिंह सैनी, पुलिस उपाधीक्षक प्रबोध घिल्डियाल, सीएमओ डॉ. रामप्रकाश, और खंड विकास अधिकारी सुरेश शाह सहित समस्त जनपदीय अधिकारियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
“प्रशासन गांव की ओर” पहल ने यह साबित कर दिया है कि यदि इच्छाशक्ति हो, तो हिमालयी क्षेत्रों की भौगोलिक चुनौतियों के बावजूद विकास की किरण हर घर तक पहुँच सकती है। रुद्रप्रयाग के कमेड़ा में लगा यह शिविर मुख्यमंत्री धामी के विजन ‘विकसित उत्तराखंड’ की दिशा में एक सशक्त कदम है।



