
हल्द्वानी/नैनीताल: उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र की दशकों पुरानी प्यास बुझाने और तराई की धरती को सोना उगलने के काबिल बनाने वाली जमरानी बहुउद्देशीय बांध परियोजना अब अपने निर्णायक चरण में है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को नैनीताल जनपद के भ्रमण के दौरान गोला नदी पर बन रहे इस विशालकाय बांध के निर्माण कार्यों का स्थलीय निरीक्षण किया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह परियोजना केवल कंक्रीट का ढांचा नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा क्षेत्रवासियों को दी गई एक ऐतिहासिक सौगात है, जो उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के साझा विकास की नई पटकथा लिखेगी।
धरातल पर उतरी ‘मोदी की गारंटी’: सीएम ने जांची गुणवत्ता
निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री धामी ने परियोजना स्थल पर मौजूद इंजीनियरों और तकनीकी विशेषज्ञों से एक-एक कार्य की प्रगति रिपोर्ट ली। उन्होंने बांध के निर्माण में लगी मशीनों और चल रहे टनल कार्यों का बारीकी से अवलोकन किया। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को सख्त हिदायत दी कि इस परियोजना में ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई जाए।
“जमरानी बांध परियोजना राज्य की समृद्धि का नया द्वार खोलेगी। प्रधानमंत्री जी के सहयोग से वर्षों की कानूनी और तकनीकी बाधाएं दूर हुई हैं। अब हमारी प्राथमिकता इसे तय समय सीमा के भीतर उच्च गुणवत्ता के साथ पूर्ण करना है। काम की गति में कोई कमी नहीं आनी चाहिए।” — पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री
परियोजना का प्रोग्रेस कार्ड: 88% टनल कार्य पूरा
निरीक्षण के दौरान जमरानी बांध परियोजना के महाप्रबंधक महेश खरे ने मुख्यमंत्री को तकनीकी ब्रीफिंग दी। उन्होंने बताया कि परियोजना के सबसे महत्वपूर्ण हिस्से, यानी दो प्रमुख टनलों का निर्माण कार्य 88 प्रतिशत तक पूर्ण हो चुका है।

परियोजना की समयरेखा (Timeline):
-
जून 2026: टनल निर्माण और कॉफर डैम (नदी के जल प्रवाह को मोड़ने हेतु अस्थाई बांध) का कार्य पूर्ण हो जाएगा।
-
जुलाई 2026 (मानसून): गोला नदी के पानी को नवनिर्मित टनलों के माध्यम से डायवर्ट कर दिया जाएगा, जिससे मुख्य बांध का निर्माण कार्य बिना बाधा के शुरू हो सके।
-
जून 2029: पूरे बांध प्रोजेक्ट को पूर्ण कर राष्ट्र को समर्पित करने का लक्ष्य रखा गया है।
उत्तराखंड और यूपी के लिए ‘वरदान’
जमरानी बांध परियोजना न केवल नैनीताल बल्कि पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश के लिए भी जीवनदायिनी साबित होगी। इस बहुउद्देशीय परियोजना से होने वाले लाभों को निम्नलिखित बिंदुओं में समझा जा सकता है:
-
पेयजल और सिंचाई: हल्द्वानी और आसपास के क्षेत्रों में पेयजल संकट स्थाई रूप से समाप्त होगा। साथ ही, कुमाऊं के तराई क्षेत्र और उत्तर प्रदेश के हजारों हेक्टेयर खेतों को साल भर सिंचाई का पानी मिलेगा।
-
बिजली उत्पादन: स्थानीय लोगों की मांग को देखते हुए मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि बांध से जल-विद्युत उत्पादन की संभावनाओं पर केंद्र सरकार से वार्ता की जाएगी।
-
रोजगार और पर्यटन: बांध के विशाल जलाशय (Reservoir) के बनने से यह क्षेत्र एक प्रमुख वाटर स्पोर्ट्स और पर्यटन हब के रूप में विकसित होगा, जिससे स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा।
“कागजों पर नहीं, धरातल पर है सरकार”
एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए सीएम धामी ने विपक्ष पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों में योजनाएं केवल फाइलों तक सीमित रहती थीं, लेकिन उनकी सरकार योजनाओं को धरातल पर उतारने में विश्वास करती है। उन्होंने कहा कि जमरानी बांध के लिए धनराशि की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने उन स्थानीय निवासियों का भी आभार व्यक्त किया जिन्होंने क्षेत्र के व्यापक हित में अपनी भूमि और सहयोग प्रदान किया।
समग्र क्षेत्रीय विकास का विजन
समीक्षा बैठक में मण्डलायुक्त दीपक रावत और जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल को निर्देशित किया गया कि बांध निर्माण के साथ-साथ विस्थापितों के पुनर्वास और आसपास की सड़कों के चौड़ीकरण का कार्य भी प्राथमिकता पर रखा जाए।
इस ऐतिहासिक निरीक्षण के दौरान कालाढुंगी विधायक बंशीधर भगत, जिला पंचायत अध्यक्ष दीपा दर्मवाल सहित कई वरिष्ठ नेता और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।
निष्कर्ष: 2029 में बदलेगी कुमाऊं की तस्वीर
जमरानी बांध परियोजना का सफल क्रियान्वयन उत्तराखंड को देश के अग्रणी राज्यों की श्रेणी में खड़ा करने की दिशा में मील का पत्थर है। जून 2029 का लक्ष्य भले ही दूर लगे, लेकिन जिस रफ्तार से टनल और डायवर्जन का काम चल रहा है, उससे साफ है कि मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में ‘विकास का पहिया’ तेजी से घूम रहा है। यह बांध न केवल जल संचय करेगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए खुशहाली का स्रोत भी बनेगा।



