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मणिपुर में राष्ट्रपति शासन का अंत: युमनाम खेमचंद सिंह ने ली मुख्यमंत्री पद की शपथ, दो डिप्टी सीएम के साथ ‘त्रिकोणीय’ शक्ति संतुलन

The Hill India News
Last updated: February 4, 2026 1:16 pm
The Hill India News
Published: February 4, 2026
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इंफाल: पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर में लगभग एक साल से जारी संवैधानिक शून्यता और राष्ट्रपति शासन का आज औपचारिक रूप से अंत हो गया। भाजपा के कद्दावर नेता और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष युमनाम खेमचंद सिंह ने मणिपुर के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की है। राजभवन में आयोजित एक गरिमामय समारोह में राज्यपाल ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई।

Contents
जातीय समीकरणों को साधने की बड़ी कोशिशराष्ट्रपति शासन और हिंसा का पृष्ठभूमिकुकी-जो विधायकों की इंफाल वापसी: शांति की नई उम्मीद?कौन हैं युमनाम खेमचंद सिंह? ताइक्वांडो मैट से सीएम की कुर्सी तकराजनीतिक सफर और RSS से जुड़ावनई सरकार के सामने चुनौतियां

इस नई सरकार का स्वरूप बेहद खास है, जिसे राज्य में जारी जातीय तनाव को कम करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। खेमचंद के साथ दो उप-मुख्यमंत्री (डिप्टी सीएम) भी बनाए गए हैं, जो राज्य के तीन प्रमुख समुदायों—मैतेई, नागा और कुकी का प्रतिनिधित्व करते हैं।

जातीय समीकरणों को साधने की बड़ी कोशिश

मणिपुर की नई कैबिनेट में सामाजिक और जातीय संतुलन को प्राथमिकता दी गई है। मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह मैतेई समुदाय से आते हैं और निवर्तमान मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह के बेहद करीबी माने जाते हैं। उनके साथ शपथ लेने वाले दो डिप्टी सीएम इस प्रकार हैं:

  1. लोधी दिखो: नागा समुदाय से आने वाले दिखो को डिप्टी सीएम बनाकर भाजपा ने राज्य के पहाड़ी जिलों और नागा समूहों को सकारात्मक संदेश देने का प्रयास किया है।

  2. नेमचा किपगेन: कुकी समुदाय से आने वालीं नेमचा किपगेन ने भी डिप्टी सीएम पद की शपथ ली। वे मणिपुर के इतिहास में पहली महिला डिप्टी सीएम और इस संकट काल में कुकी समुदाय का सरकार में सबसे बड़ा चेहरा बनकर उभरी हैं।

राष्ट्रपति शासन और हिंसा का पृष्ठभूमि

मणिपुर में इस नई सरकार का गठन एक बेहद कठिन दौर के बाद हुआ है। राज्य में 3 मई 2023 को चुरचांदपुर में शुरू हुई हिंसा ने पूरे प्रदेश को अपनी चपेट में ले लिया था। मैतेई और कुकी समुदायों के बीच शुरू हुई इस झड़प के बाद कानून-व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो गई थी। हिंसा की नैतिकता और राजनीतिक दबाव के बीच पिछले साल एन. बीरेन सिंह ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद 12 फरवरी 2025 को राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया था।

आज लगभग एक साल बाद राष्ट्रपति शासन हटने के कुछ ही घंटों के भीतर नई सरकार का गठन होना इस बात का संकेत है कि केंद्र सरकार और भाजपा आलाकमान ने मणिपुर के लिए एक नया ‘रोडमैप’ तैयार कर लिया है।

कुकी-जो विधायकों की इंफाल वापसी: शांति की नई उम्मीद?

इस शपथ ग्रहण समारोह की सबसे बड़ी और सुखद खबर यह रही कि लंबे समय के बाद दो कुकी-जो विधायक— एलएम खौटे और न्गुर्संगलुर सनाते इंफाल पहुंचे। हिंसा भड़कने के बाद से ही कुकी विधायक सुरक्षा कारणों से इंफाल आने से बच रहे थे। उनकी मौजूदगी यह दर्शाती है कि नई लीडरशिप टीम पर समुदायों का भरोसा बहाल करने की कोशिशें रंग ला रही हैं।

कौन हैं युमनाम खेमचंद सिंह? ताइक्वांडो मैट से सीएम की कुर्सी तक

54 वर्षीय युमनाम खेमचंद सिंह का सफर किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। राजनीति में आने से पहले वे एक अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी और सफल व्यवसायी थे।

  • मार्शल आर्ट्स में महारत: खेमचंद सिंह ताइक्वांडो के दिग्गज खिलाड़ी रहे हैं। उन्होंने दक्षिण कोरिया में इस खेल की ट्रेनिंग ली और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व किया। वे भारतीय ताइक्वांडो टीम के कप्तान भी रहे।

  • ब्लैक बेल्ट सम्मान: हाल ही में उन्हें सियोल स्थित ‘ग्लोबल ट्रेडिशनल ताइक्वांडो फेडरेशन’ द्वारा 5वीं डैन ब्लैक बेल्ट से सम्मानित किया गया, जो उनके अनुशासन को दर्शाता है।

  • खेल प्रशासक: उन्होंने ताइक्वांडो फेडरेशन ऑफ इंडिया (TFI) के उपाध्यक्ष के रूप में काम किया और पूर्वोत्तर भारत में मार्शल आर्ट्स की नींव रखने में अहम भूमिका निभाई। 1982 में उन्होंने असम ताइक्वांडो एसोसिएशन की स्थापना भी की थी।

राजनीतिक सफर और RSS से जुड़ाव

खेमचंद ने 2012 में राजनीति में प्रवेश किया। शुरुआत में उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा, लेकिन मामूली अंतर (157 वोट) से हार गए। इसके बाद वे भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के करीब आए। उनकी सांगठनिक क्षमता और जमीनी स्तर पर पकड़ ने उन्हें पार्टी का पसंदीदा बनाया।

2017 से 2022 तक वे मणिपुर विधानसभा के अध्यक्ष रहे। इस दौरान उन्होंने जटिल विधायी मामलों को जिस कुशलता से संभाला, उसी का परिणाम है कि आज संकट की इस घड़ी में पार्टी ने उन्हें ‘कैप्टन’ की जिम्मेदारी सौंपी है।

नई सरकार के सामने चुनौतियां

भले ही नई सरकार ने शपथ ले ली है, लेकिन मुख्यमंत्री खेमचंद के सामने कांटों भरा ताज है। उनकी प्राथमिकता सूची में ये तीन बिंदु सबसे ऊपर होंगे:

  1. शांति बहाली: मैतेई और कुकी समुदायों के बीच अविश्वास की खाई को पाटना।

  2. विस्थापितों का पुनर्वास: राहत शिविरों में रह रहे हजारों लोगों को उनके घरों तक वापस भेजना।

  3. आर्थिक सुधार: हिंसा के कारण रुकी हुई विकास योजनाओं को फिर से पटरी पर लाना।

भाजपा प्रदेश कार्यालय में जीत का जश्न मनाया जा रहा है, लेकिन इंफाल से लेकर चुरचांदपुर तक की जनता की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह नई त्रिकोणीय शक्ति (Meitei-Naga-Kuki) मणिपुर में स्थायी शांति ला पाएगी।


युमनाम खेमचंद सिंह का मुख्यमंत्री बनना मणिपुर की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत है। एक खिलाड़ी के रूप में उन्होंने हमेशा अंतिम सेकंड तक लड़ना सीखा है, और अब मणिपुर के भविष्य के लिए भी उन्हें उसी ‘ब्लैक बेल्ट’ वाले अनुशासन और धैर्य की आवश्यकता होगी।

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