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भारत-अमेरिका ट्रेड वॉर पर लगाम: ट्रंप ने 50% से घटाकर 18% किया टैरिफ, पीयूष गोयल बोले- ‘भारतीय किसानों और MSME की बड़ी जीत’

नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक रिश्तों में एक नए स्वर्ण युग की शुरुआत होती दिख रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुई उच्च स्तरीय टेलीफोनिक वार्ता के बाद, अमेरिका ने भारत से आयातित वस्तुओं पर लगने वाले भारी-भरकम टैरिफ में ऐतिहासिक कटौती का ऐलान किया है। इस फैसले को वैश्विक कूटनीति और व्यापारिक संतुलन के लिहाज से मोदी सरकार की एक बड़ी ‘रणनीतिक जीत’ के रूप में देखा जा रहा है।

मंगलवार को नई दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इस कदम की सराहना की। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका द्वारा टैरिफ दरों में की गई इस भारी कमी का सीधा और सकारात्मक प्रभाव भारत के आम नागरिकों, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) और विशेष रूप से देश के अन्नदाताओं पर पड़ेगा।

टैरिफ में 32% की भारी गिरावट: व्यापार में नई जान

अमरीका ने सोमवार रात एक चौंकाने वाले लेकिन सकारात्मक फैसले में भारत पर लगे टैरिफ को 50 फीसदी से घटाकर सीधे 18 फीसदी करने की घोषणा की। राष्ट्रपति ट्रंप ने खुद इस बात की पुष्टि की कि पीएम मोदी से लंबी चर्चा के बाद वे भारत को व्यापारिक राहत देने के लिए सहमत हुए हैं। इस फैसले पर खुशी जताते हुए पीयूष गोयल ने कहा,-

“अमेरिका ने स्वयं पहले टैरिफ लगाया था और अब स्वयं ही इसे कम किया है। यह भारत की बढ़ती वैश्विक शक्ति और पीएम मोदी के कुशल नेतृत्व का प्रमाण है। यह डील भारत के उज्ज्वल भविष्य की ओर एक बड़ा पड़ाव है और आने वाले दिनों के लिए बेहद शुभ संकेत है।”

किसानों और MSME के हितों का पूर्ण संरक्षण

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पीयूष गोयल ने उन चिंताओं को भी खारिज किया जिसमें विदेशी व्यापार समझौतों से किसानों के नुकसान की आशंका जताई जाती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि:

  • किसानों की सुरक्षा: पीएम मोदी ने डील फाइनल करते समय भारतीय किसानों के हितों को ‘रेड लाइन’ की तरह रखा है। कृषि उत्पादों के निर्यात में अब भारतीय किसानों को अमेरिकी बाजारों में बेहतर प्रतिस्पर्धा करने का मौका मिलेगा।

  • MSME सेक्टर को बूस्ट: भारत का लघु उद्योग (MSME) जो अमेरिका को बड़े पैमाने पर इंजीनियरिंग गुड्स, टेक्सटाइल और हस्तशिल्प का निर्यात करता है, उसके लिए अब राह आसान हो जाएगी। लागत कम होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय उत्पादों की मांग बढ़ेगी।

रूसी तेल पर बड़ा समझौता: वेनेजुएला की ओर मुड़ेगा भारत?

इस डील का सबसे दिलचस्प और रणनीतिक पहलू ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ा है। राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर इस बातचीत का ब्योरा साझा किया। उन्होंने बताया कि भारत अब रूस से कच्चे तेल की खरीद को कम करने या बंद करने पर विचार कर रहा है।

ट्रंप ने लिखा, “प्रधानमंत्री मोदी मेरे सबसे करीबी दोस्तों में से एक हैं। वे रूसी तेल खरीदना बंद करने और अमेरिका व संभवतः वेनेजुएला से अधिक तेल खरीदने पर सहमत हुए हैं। इससे न केवल व्यापारिक संतुलन बनेगा, बल्कि यूक्रेन में चल रहे युद्ध को समाप्त करने में भी मदद मिलेगी।”

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए रूस के बजाय अमेरिका और वेनेजुएला की ओर रुख करता है, तो यह वैश्विक भू-राजनीति (Geopolitics) में एक बड़ा बदलाव होगा।

साझा बयान का इंतजार: इसी सप्ताह हो सकती है घोषणा

पीयूष गोयल ने संकेत दिया है कि भारत और अमेरिका के बीच इस ट्रेड डील की प्रक्रिया अभी अंतिम चरण में है। उन्होंने कहा, “हो सकता है कि भारत और अमेरिका इसी सप्ताह इस ट्रेड डील को लेकर एक साझा बयान (Joint Statement) जारी करें।” यह साझा बयान उन सभी सेक्टरों की सूची स्पष्ट करेगा जिन्हें इस टैरिफ कटौती का सीधा लाभ मिलेगा।

रूस-यूक्रेन युद्ध और भारत की भूमिका

अमेरिकी राष्ट्रपति के अनुसार, भारत का यह कदम यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो सकता है। रूस की अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा तेल निर्यात पर निर्भर है, और भारत उसका एक प्रमुख खरीदार रहा है। ट्रंप का मानना है कि रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाकर इस मानवीय संकट को रोका जा सकता है।

वैश्विक बाजार में भारत का बढ़ता कद

अमेरिका द्वारा टैरिफ में कटौती करना केवल एक व्यापारिक रियायत नहीं है, बल्कि यह इस बात का संकेत है कि अमेरिका अब भारत को एक प्रतिस्पर्धी के बजाय एक ‘अनिवार्य साझेदार’ के रूप में देख रहा है। 50% से 18% तक का यह सफर भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए निर्यात के नए द्वार खोलेगा और घरेलू उद्योगों को वैश्विक मंच पर नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।

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