देहरादून/दिल्ली। उत्तराखंड के सबसे चर्चित और संवेदनशील अंकिता भंडारी हत्याकांड में एक बार फिर बड़ा मोड़ आ गया है। इस मामले में जिस ‘वीआईपी’ (VIP) के नाम को लेकर पिछले दो सालों से सियासी और सामाजिक गलियारों में तूफान मचा हुआ था, अब उस पर कानून का शिकंजा कसना शुरू हो गया है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की दिल्ली स्पेशल क्राइम ब्रांच (शाखा-2) ने इस मामले में ‘अज्ञात वीआईपी’ के खिलाफ औपचारिक रूप से मुकदमा दर्ज कर लिया है।
सोमवार को सीबीआई की एक विशेष टीम देहरादून और ऋषिकेश पहुंच चुकी है। जांच एजेंसी का मुख्य फोकस उन डिजिटल साक्ष्यों और बयानों को खंगालना है, जो उस रहस्यमयी वीआईपी की पहचान उजागर कर सकें, जिसके लिए कथित तौर पर अंकिता पर दबाव बनाया गया था।
SIT के बाद अब CBI की एंट्री: क्या खुलेगा वीआईपी का राज?
अंकिता हत्याकांड में भले ही वनंत्रा रिजॉर्ट के मालिक पुलकित आर्या, सहायक प्रबंधक अंकित गुप्ता और कर्मचारी सौरभ भास्कर को उम्रकैद की सजा सुनाई जा चुकी हो, लेकिन अंकिता के माता-पिता और उत्तराखंड की जनता एक ही सवाल पूछ रही थी— “वह वीआईपी कौन है?”
इस विवाद ने तब और तूल पकड़ा जब पूर्व विधायक सुरेश राठौर की कथित पत्नी उर्मिला सनावर का एक वीडियो और ऑडियो रिकॉर्डिंग सोशल मीडिया पर वायरल हुई। इस ऑडियो में अंकिता केस और वीआईपी का जिक्र होने के बाद प्रदेश भर में कांग्रेस और अन्य संगठनों ने उग्र प्रदर्शन किए। जनभावनाओं और न्याय की मांग को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 9 जनवरी को इस मामले की सीबीआई जांच की संस्तुति दी थी, जिस पर अमल करते हुए अब एफआईआर दर्ज की गई है।
जांच का दायरा: डिजिटल साक्ष्य और बैंकिंग ट्रांजेक्शन पर नजर
सीबीआई की स्पेशल क्राइम ब्रांच इस बार केवल फिजिकल सबूतों तक सीमित नहीं रहेगी। जानकारी के अनुसार, जांच का दायरा काफी विस्तृत है:
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वायरल ऑडियो-वीडियो: उर्मिला सनावर और अन्य से जुड़े डिजिटल फुटप्रिंट्स की फॉरेंसिक जांच।
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बैंकिंग और संपर्क विवरण: रिजॉर्ट के मालिकों और संदिग्धों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और वित्तीय लेन-देन की समीक्षा।
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दस्तावेजी सबूत: पूर्व की एसआईटी जांच के दौरान मिले सबूतों का दोबारा विश्लेषण।
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गवाहों के बयान: उन कर्मचारियों और करीबियों से दोबारा पूछताछ जो उस रात रिजॉर्ट में मौजूद थे।
फ्लैशबैक: वह काली रात और अंकिता की हत्या
पौड़ी गढ़वाल की रहने वाली 19 वर्षीय अंकिता भंडारी ऋषिकेश के गंगा भोगपुर स्थित ‘वनंत्रा रिजॉर्ट’ में रिसेप्शनिस्ट के तौर पर काम करती थी। 18 सितंबर 2022 को अंकिता अचानक लापता हो गई। शुरुआती जांच में पता चला कि रिजॉर्ट के मालिक पुलकित आर्या और उसके साथियों का अंकिता से किसी बात को लेकर विवाद हुआ था।
आरोप लगा कि अंकिता पर किसी ‘वीआईपी’ को ‘स्पेशल सर्विस’ देने का दबाव बनाया जा रहा था, जिसका अंकिता ने कड़ा विरोध किया। इसी विवाद के बाद पुलकित और उसके साथियों ने अंकिता की हत्या कर उसकी बॉडी को चीला नहर में फेंक दिया। 24 सितंबर को अंकिता का शव बरामद हुआ, जिसके बाद पूरे उत्तराखंड में आक्रोश की लहर दौड़ गई थी।
सियासी घमासान और मुख्यमंत्री का फैसला
अंकिता केस उत्तराखंड में केवल एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया। कांग्रेस ने ‘वीआईपी’ का नाम उजागर न करने के पीछे सत्ता पक्ष के संरक्षण का आरोप लगाया। वहीं, बीजेपी सरकार ने स्पष्ट किया कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अंकिता के परिजनों से मुलाकात के बाद भरोसा दिलाया था कि न्याय की राह में जो भी आएगा, उसे हटाया जाएगा। सीबीआई जांच की संस्तुति इसी दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
क्या कहती है कानूनी प्रक्रिया?
अब जबकि सीबीआई ने ‘अज्ञात’ के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है, तो यह माना जा रहा है कि एजेंसी के पास कुछ शुरुआती इनपुट्स हैं। कानून विशेषज्ञों के अनुसार, सीबीआई की जांच का मुख्य उद्देश्य उस साजिश (Conspiracy) की कड़ियों को जोड़ना है, जो मुख्य हत्याकांड के पीछे छिपी हुई थी। यदि जांच में किसी प्रभावशाली व्यक्ति का नाम सामने आता है, तो यह उत्तराखंड की राजनीति में एक बड़ा भूचाल ला सकता है।
फिलहाल, सीबीआई की टीम ऋषिकेश के उस चर्चित रिजॉर्ट और घटनास्थल का मुआयना कर रही है। उत्तराखंड की नजरें अब दिल्ली से आई इस टीम पर टिकी हैं, उम्मीद है कि अंकिता को पूर्ण न्याय मिलेगा और उस वीआईपी का चेहरा बेनकाब होगा जिसका नाम अब तक फाइलों में दबा रहा।



