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ममता बनर्जी बनाम चुनाव आयोग: निर्वाचन सदन में हाई-वोल्टेज ड्रामा, CEC को ‘झूठा’ बताकर दीदी ने किया मीटिंग का बॉयकॉट

The Hill India News
Last updated: February 2, 2026 3:00 pm
The Hill India News
Published: February 2, 2026
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नई दिल्ली/कोलकाता: पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक पारा अपने चरम पर पहुँच गया है। सोमवार को दिल्ली स्थित निर्वाचन सदन (निर्वाचन आयोग कार्यालय) उस समय रणक्षेत्र बन गया, जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस (TMC) का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) से मिलने पहुँचा। हालांकि, यह मुलाकात महज कुछ ही मिनटों में विवाद की भेंट चढ़ गई। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी बैठक को बीच में ही छोड़कर बाहर निकल आईं और चुनाव आयोग पर अपमानित करने का गंभीर आरोप लगाया।

Contents
‘सात बार सांसद रही, पर ऐसा CEC नहीं देखा’एसआईआर (SIR) पर रार: चुनाव से पहले क्या है मंशा?चुनाव आयोग का पलटवार: ‘धमकी और तोड़फोड़ बर्दाश्त नहीं’‘बहिष्कार नहीं करेंगे, मजबूती से लड़ेंगे’राजनीतिक ध्रुवीकरण और आगामी चुनावसंवैधानिक संस्था बनाम राज्य सरकार

‘सात बार सांसद रही, पर ऐसा CEC नहीं देखा’

काले रंग के लिबास में विरोध दर्ज कराने पहुँचीं ममता बनर्जी ने बाहर आते ही मीडिया के सामने अपना गुस्सा जाहिर किया। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त पर सीधा हमला बोलते हुए उन्हें ‘अहंकारी’ और ‘झूठा’ करार दिया। ममता बनर्जी ने कहा, “मेरा राजनीतिक करियर दशकों लंबा है, मैं सात बार सांसद रही हूं, लेकिन मैंने आज तक इतना एरोगेंट (अहंकारी) मुख्य चुनाव आयुक्त नहीं देखा। हमें वहां न्याय मांगने के लिए बुलाया गया था, लेकिन हमारा अपमान किया गया, हमें जलील किया गया।”

ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग भारतीय जनता पार्टी (BJP) के इशारे पर काम कर रहा है। उन्होंने कहा, “आपके पास बीजेपी की ताकत हो सकती है, लेकिन हमारे पास जनता की ताकत है।”

#WATCH | Delhi: Outside the Election Commission Office in Delhi, West Bengal CM Mamata Banerjee says, "Will the Election Commission choose the government before the election… We are watching. You have the power of the BJP. We have the power of the people. So we boycotted the… pic.twitter.com/OW8m3RFHgG

— ANI (@ANI) February 2, 2026


एसआईआर (SIR) पर रार: चुनाव से पहले क्या है मंशा?

विवाद की मुख्य जड़ पश्चिम बंगाल में जारी स्पेशल इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट (SIR) या मतदाता सूची का विशेष पुनरीक्षण है। ममता बनर्जी ने सवाल उठाया कि चुनाव से ठीक तीन महीने पहले बंगाल में इस प्रक्रिया की क्या आवश्यकता थी?

ममता बनर्जी के मुख्य आरोप:

  1. वोटों की कटौती: बंगाल में ‘जेन्युइन’ (असली) मतदाताओं के नाम जानबूझकर काटे जा रहे हैं।

  2. माइक्रो ऑब्जर्वर की तैनाती: बंगाल में 8,100 माइक्रो ऑब्जर्वर की नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए उन्होंने इसे लोकतंत्र के खिलाफ बताया।

  3. SIR में मौतें: ममता ने दावा किया कि SIR प्रक्रिया के दौरान जिन लोगों की मौत हुई है, उसकी नैतिक जिम्मेदारी चुनाव आयोग को लेनी चाहिए।

उन्होंने कड़े लहजे में कहा, “लोकतंत्र में चुनाव एक उत्सव (फेस्टिवल) की तरह होता है, लेकिन यहां इसे डराने-धमकाने का जरिया बनाया जा रहा है। हमने पांच पत्र लिखे, लेकिन एक का भी जवाब नहीं मिला।”


चुनाव आयोग का पलटवार: ‘धमकी और तोड़फोड़ बर्दाश्त नहीं’

TMC के आरोपों पर चुनाव आयोग ने भी आधिकारिक बयान जारी कर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। आयोग ने कहा कि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमंडल को कानून की मर्यादा समझाई गई है।

चुनाव आयोग के तर्क:

  • कानून का शासन: आयोग ने स्पष्ट किया कि जो कोई भी कानून अपने हाथ में लेगा, उससे पूरी सख्ती से निपटा जाएगा।

  • अधिकारियों को धमकी: चुनाव आयोग ने गंभीर आरोप लगाया कि टीएमसी विधायक और कार्यकर्ता चुनाव अधिकारियों (SDO/BDO) को खुलेआम धमकियां दे रहे हैं और उनके कार्यालयों में तोड़फोड़ की जा रही है।

  • CEC का अपमान: आयोग ने कहा कि संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल अस्वीकार्य है।

  • मानदेय का मुद्दा: आयोग ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) का बकाया मानदेय (18,000 में से शेष 11,000 रुपये) बिना किसी देरी के जारी किया जाए।

[Image: Election Commission of India headquarters with security deployment]


‘बहिष्कार नहीं करेंगे, मजबूती से लड़ेंगे’

मीटिंग का बॉयकॉट करने के बावजूद ममता बनर्जी ने साफ कर दिया कि वह चुनावी मैदान से पीछे नहीं हटेंगी। उन्होंने कहा, “हम चुनाव का बहिष्कार नहीं करेंगे। हम मैदान में उतरेंगे और पूरी मजबूती के साथ भाजपा और उनके समर्थकों का मुकाबला करेंगे।”

राजनीतिक ध्रुवीकरण और आगामी चुनाव

विशेषज्ञों का मानना है कि ममता बनर्जी का ‘ब्लैक प्रोटेस्ट’ और चुनाव आयोग के साथ यह सीधा टकराव बंगाल में मतदाताओं के ध्रुवीकरण की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा हो सकता है। टीएमसी लगातार खुद को ‘बंगाली अस्मिता’ के रक्षक और केंद्र सरकार की ‘कठपुतली’ एजेंसियों के शिकार के रूप में पेश कर रही है। वहीं, भाजपा इसे टीएमसी की हार का डर बता रही है।


संवैधानिक संस्था बनाम राज्य सरकार

निर्वाचन सदन में आज जो हुआ, वह भारतीय लोकतंत्र में एक दुर्लभ दृश्य था। एक मुख्यमंत्री द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त को सरेआम ‘झूठा’ कहना संवैधानिक मर्यादाओं पर भी सवाल खड़े करता है। जैसे-जैसे बंगाल में मतदान की तारीखें करीब आएंगी, यह टकराव और उग्र होने के आसार हैं। फिलहाल, सबकी नजरें अब चुनाव आयोग के अगले कदम और बंगाल में SIR की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हैं।

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