
देहरादून: उत्तराखंड सरकार ने प्रदेश के श्रम शक्ति को आधुनिक तकनीक से जोड़ने और उनके कौशल विकास को पारदर्शी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को सचिवालय में श्रमिक प्रशिक्षण प्रबंधन प्रणाली (Training Management System – TMS) पोर्टल का विधिवत शुभारंभ किया। ‘उत्तराखंड भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड’ द्वारा विकसित यह पोर्टल पंजीकृत श्रमिकों और उनके आश्रितों के लिए रोजगार के नए द्वार खोलेगा।
पारदर्शिता और तकनीक का संगम: क्या है TMS पोर्टल?
श्रमिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों में होने वाली अनियमितताओं को खत्म करने और पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन करने के उद्देश्य से इस पोर्टल को तैयार किया गया है। मुख्यमंत्री ने पोर्टल की सराहना करते हुए कहा कि यह तकनीक आधारित प्रणाली श्रमिकों के सर्वांगीण विकास में मील का पत्थर साबित होगी।
इस प्रणाली के माध्यम से अब प्रशिक्षण प्रदाताओं (Training Providers), मूल्यांकनकर्ताओं और प्रशिक्षकों का चयन पूरी तरह ऑनलाइन होगा। खास बात यह है कि इसमें केवल भारत सरकार द्वारा ‘इम्पैनल्ड’ संस्थाओं और प्रमाणित विशेषज्ञों को ही शामिल किया जाएगा, जिससे प्रशिक्षण की गुणवत्ता से कोई समझौता न हो सके।
स्थानीय जरूरतों पर फोकस: प्लम्बर, कारपेंटर और इलेक्ट्रीशियन को प्राथमिकता
मुख्यमंत्री ने बैठक के दौरान अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि प्रशिक्षण केवल औपचारिक न हो, बल्कि उसे बाजार की मांग से जोड़ा जाए। उन्होंने प्लम्बर, कारपेंटर और इलेक्ट्रीशियन जैसे व्यवसायों में प्रशिक्षण पर विशेष बल देने को कहा।
मुख्यमंत्री के प्रमुख निर्देश:
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उद्यमियों से फीडबैक: सीएम ने कहा कि राज्य के उद्यमियों से नियमित संवाद कर यह पता लगाया जाए कि उन्हें किस तरह के कौशल की आवश्यकता है।
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क्षेत्रीय संतुलन: स्थानीय स्तर पर ही कुशल श्रमिक तैयार किए जाएं ताकि क्षेत्रीय जनसांख्यिकीय संतुलन बना रहे और स्थानीय युवाओं को गांव-घर के पास ही रोजगार मिले।
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फॉरवर्ड लिंकेज: केवल ट्रेनिंग देना पर्याप्त नहीं है; प्रशिक्षण के बाद श्रमिकों को बाजार और रोजगार से जोड़ने के लिए मजबूत ‘फॉरवर्ड लिंकेज’ तैयार किया जाए।
पोर्टल की मुख्य विशेषताएं और लाभ
श्रमिक प्रशिक्षण पोर्टल (TMS) न केवल श्रमिकों के लिए बल्कि विभाग के लिए भी डेटा प्रबंधन को आसान बनाएगा। श्रमायुक्त पीसी दुमका ने अपने प्रस्तुतीकरण में पोर्टल के पांच मुख्य स्तंभों की जानकारी दी:
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शून्य डुप्लीकेसी: ऑनलाइन पंजीकरण और आधार लिंकिंग से एक ही व्यक्ति द्वारा बार-बार लाभ लेने या फर्जीवाड़े पर पूरी तरह रोक लगेगी।
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डिजिटल अटेंडेंस: प्रशिक्षण केंद्रों पर उपस्थिति और मूल्यांकन की प्रक्रिया डिजिटल होगी, जिससे पारदर्शिता सुनिश्चित होगी।
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सेंट्रलाइज्ड डेटाबेस: प्रदेश के सभी प्रशिक्षित श्रमिकों का एक केंद्रीय डेटाबेस होगा, जिससे कंपनियां सीधे कुशल कामगारों से संपर्क कर सकेंगी।
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गुणवत्ता में सुधार: मूल्यांकन की सख्त प्रक्रिया के कारण श्रमिकों को उच्च स्तरीय कौशल प्रशिक्षण प्राप्त होगा।
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जवाबदेही: प्रशिक्षण प्रदाताओं और विभागीय अधिकारियों की जिम्मेदारी तय होगी, जिससे योजनाओं का समयबद्ध क्रियान्वयन हो सके।
श्रम विभाग की ‘डीबीटी’ योजनाओं की सराहना
समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने श्रम विभाग द्वारा संचालित डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) योजनाओं की सफलता पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सीधे बैंक खातों में लाभ पहुंचने से बिचौलियों की भूमिका समाप्त हुई है। श्रम सचिव डॉ. श्रीधर बाबू अद्दंकी ने आश्वस्त किया कि विभाग सभी योजनाओं को परिणामोन्मुखी बनाने के लिए लगातार तकनीकी नवाचार कर रहा है।
आर्थिकी मजबूत करने पर जोर
सीएम धामी ने ‘उत्तराखंड भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड’ को अपनी आय बढ़ाने के लिए नए स्रोतों और प्रयासों पर काम करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जब बोर्ड वित्तीय रूप से सशक्त होगा, तभी वह श्रमिकों के कल्याण के लिए और अधिक प्रभावी योजनाएं लागू कर सकेगा।
‘आत्मनिर्भर श्रमिक’ से ‘सशक्त उत्तराखंड’
‘ट्रेनिंग मैनेजमेंट सिस्टम’ का शुभारंभ यह दर्शाता है कि राज्य सरकार अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति को तकनीक से जोड़कर मुख्यधारा में लाना चाहती है। यदि यह पोर्टल अपनी घोषणाओं के अनुरूप क्रियान्वित होता है, तो उत्तराखंड आने वाले समय में कुशल श्रम शक्ति का एक बड़ा हब बनकर उभरेगा, जिससे न केवल औद्योगिक विकास होगा बल्कि पलायन जैसी गंभीर समस्या पर भी लगाम लगेगी।



