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उत्तराखंड कृषि महकमे का दुबई जाने का सपना टूटा: CM धामी ने अफसरों के विदेश दौरे पर लगाई रोक, कृषि मंत्री ने भी दिखाए तीखे तेवर

The Hill India News
Last updated: January 30, 2026 3:00 am
The Hill India News
Published: January 30, 2026
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देहरादून: उत्तराखंड की नौकरशाही में समयबद्धता और कार्यप्रणाली को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। दुबई में आयोजित होने वाले दुनिया के सबसे बड़े खाद्य व्यापार मेलों में से एक, गल्फूड फेस्टिवल–2026 (GULFOOD 2026) में शिरकत करने जा रहे उत्तराखंड के उच्चाधिकारियों के दल को मुख्यमंत्री कार्यालय से बड़ा झटका लगा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ऐन वक्त पर इस प्रतिनिधिमंडल के विदेश दौरे की फाइल को ठंडे बस्ते में डाल दिया, जिससे न केवल विभाग की किरकिरी हुई है, बल्कि राज्य के उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रमोट करने का एक सुनहरा अवसर भी हाथ से निकल गया है।

Contents
क्या था पूरा मामला? आखिरी मिनट तक टिकी थीं उम्मीदेंनियमों की अनदेखी पड़ी भारी: क्यों रुकी फाइल?कृषि मंत्री गणेश जोशी के तीखे तेवर: “अफसरों की कार्यप्रणाली पर सवाल”गल्फूड फेस्टिवल का महत्व: उत्तराखंड ने क्या खोया?प्रशासनिक जवाबदेही पर उठे सवालअगला कदम: समीक्षा और जिम्मेदारी तय होगी?

क्या था पूरा मामला? आखिरी मिनट तक टिकी थीं उम्मीदें

दुबई में 26 से 30 जनवरी 2026 तक आयोजित होने वाले इस प्रतिष्ठित वैश्विक आयोजन के लिए उत्तराखंड कृषि विभाग ने एक भारी-भरकम प्रस्ताव तैयार किया था। योजना थी कि उत्तराखंड के जैविक उत्पाद, सगंध पौधों (Aromatic Plants) के अर्क और उद्यानिकी उत्पादों को वैश्विक निर्यातकों के सामने प्रदर्शित किया जाए।

इस प्रतिनिधिमंडल में कृषि सचिव, सगंध पौधा केंद्र (CAP) के निदेशक, संयुक्त निदेशक कृषि दिनेश कुमार, CEO नरेंद्र यादव और एक मार्केटिंग अधिकारी का नाम प्रस्तावित था। सूत्रों के अनुसार, आयोजन शुरू होने के एक दिन पहले तक अधिकारी बैग पैक कर मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) से ‘ग्रीन सिग्नल’ का इंतजार कर रहे थे, लेकिन फाइल पर मंजूरी की मुहर नहीं लग सकी।

नियमों की अनदेखी पड़ी भारी: क्यों रुकी फाइल?

सरकारी नियमों के अनुसार, किसी भी राज्य स्तरीय अधिकारी के विदेश दौरे के लिए एक तय प्रक्रिया होती है। इसमें विदेश मंत्रालय की क्लीयरेंस, वित्त विभाग की सहमति और फिर मुख्यमंत्री की अंतिम मंजूरी आवश्यक होती है। जानकारों का कहना है कि कृषि और उद्यान विभाग ने इस पूरी प्रक्रिया में भारी लापरवाही बरती।

प्रस्ताव समय पर नहीं भेजा गया और जरूरी औपचारिकताएं आयोजन की तारीख नजदीक आने तक अधूरी थीं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, जो शासन में पारदर्शिता और अनुशासन के लिए जाने जाते हैं, ने प्रक्रियात्मक खामियों और अंतिम समय की हड़बड़ाहट को देखते हुए इस दौरे को अनुमति देने से इनकार कर दिया।

कृषि मंत्री गणेश जोशी के तीखे तेवर: “अफसरों की कार्यप्रणाली पर सवाल”

इस पूरे प्रकरण पर विभागीय मंत्री गणेश जोशी ने अपनी ही टीम के अधिकारियों को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने मुख्यमंत्री के निर्णय को पूरी तरह सही ठहराते हुए प्रशासनिक चूक की बात स्वीकार की है।

“विदेश दौरे जैसे महत्वपूर्ण आयोजनों के लिए महीनों पहले तैयारी करनी होती है। यदि अधिकारी समय रहते औपचारिकताएं पूरी नहीं कर सकते, तो सरकार ऐसे आधे-अधूरे प्रस्तावों को स्वीकार नहीं कर सकती। मुख्यमंत्री जी का निर्णय प्रशासनिक अनुशासन बनाए रखने के लिए आवश्यक था।” – गणेश जोशी, कृषि एवं उद्यान मंत्री

मंत्री के इस बयान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि शासन के भीतर अधिकारियों की ‘लेट-लतीफी’ को अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

गल्फूड फेस्टिवल का महत्व: उत्तराखंड ने क्या खोया?

गल्फूड (Gulfood) दुनिया का सबसे बड़ा वार्षिक खाद्य और पेय पदार्थ व्यापार प्रदर्शनी है। यहाँ 120 से अधिक देशों के प्रतिनिधि और हजारों अंतरराष्ट्रीय खरीदार पहुँचते हैं। उत्तराखंड के लिए यह मौका इसलिए भी महत्वपूर्ण था क्योंकि:

  • ब्रांड उत्तराखंड: राज्य के ऑर्गेनिक उत्पादों को ‘मिलेट मिशन’ के तहत वैश्विक पहचान मिल सकती थी।

  • विदेशी निवेश: दुबई और खाड़ी देशों के निवेशकों के साथ सगंध पौधा क्षेत्र (Aromatic sector) में MoU होने की संभावना थी।

  • निर्यात क्षमता: स्थानीय किसानों के उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार मिलने का रास्ता खुल सकता था।

प्रशासनिक जवाबदेही पर उठे सवाल

यह पहली बार नहीं है जब उत्तराखंड में किसी विभाग की फाइल समय पर मंजूरी न मिलने के कारण अटकी हो। लेकिन, एक अंतरराष्ट्रीय स्तर के दौरे का इस तरह रद्द होना अधिकारियों की कार्यशैली पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। सचिवालय के गलियारों में चर्चा है कि यदि विभाग गंभीर था, तो प्रस्ताव महीनों पहले क्यों नहीं भेजा गया? क्या विभाग ने ‘अंतिम समय के दबाव’ की रणनीति अपनाई थी, जो इस बार मुख्यमंत्री के सख्त रुख के आगे फेल हो गई?

अगला कदम: समीक्षा और जिम्मेदारी तय होगी?

राजनीतिक गलियारों में माना जा रहा है कि इस लापरवाही के लिए आने वाले दिनों में कुछ अधिकारियों पर गाज गिर सकती है। मुख्यमंत्री कार्यालय ने भविष्य के लिए सभी विभागों को संकेत दे दिया है कि किसी भी प्रकार की आधिकारिक यात्रा या आयोजन के लिए समय-सीमा का पालन अनिवार्य है।

गल्फूड फेस्टिवल 2026 का दौरा रद्द होना उत्तराखंड के कृषि निर्यात के लिए एक बड़ा झटका है। यह घटना सबक है कि वैश्विक मंच पर पहुंचने के लिए केवल उत्पादों की गुणवत्ता काफी नहीं है, बल्कि प्रशासनिक तत्परता और नियमों का पालन भी उतना ही अनिवार्य है।

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