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हरिद्वार: खानपुर रेंजर की ‘हठधर्मिता’ के खिलाफ फूटा ग्रामीणों का गुस्सा, डीएफओ कार्यालय में घंटों नारेबाजी, जांच टीम गठित

हरिद्वार। तीर्थनगरी हरिद्वार में वन विभाग और ग्रामीणों के बीच का संघर्ष एक बार फिर सड़कों पर आ गया है। शुक्रवार को हरिद्वार के बिल्केश्वर रोड स्थित डीएफओ (प्रभागीय वनाधिकारी) कार्यालय पर खानपुर रेंज के ग्रामीणों ने जमकर बवाल काटा। ग्रामीणों का आरोप है कि खानपुर रेंज के रेंजर न केवल हठधर्मिता पर उतारू हैं, बल्कि वे ग्रामीणों के साथ अभद्रता और भ्रष्टाचार में भी संलिप्त हैं। इस दौरान ग्रामीणों ने रेंजर को तत्काल प्रभाव से पद से हटाने की मांग को लेकर कार्यालय परिसर में ही धरना दिया और नारेबाजी की।

विवाद की जड़: महिलाओं को हिरासत में लेने का मामला

पूरे विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब खानपुर रेंज के अंतर्गत आने वाले गांवों की कुछ महिलाएं जंगल में सूखी लकड़ियां बीनने गई थीं। बताया जा रहा है कि वन विभाग की गश्ती टीम ने इन महिलाओं को पकड़ लिया और उन्हें बंधक जैसी स्थिति में रखा। इस घटना की खबर जैसे ही गांव में फैली, ग्रामीण आक्रोशित हो गए। हालांकि, ग्रामीणों के भारी दबाव के चलते विभाग ने एक दिन पहले ही महिलाओं को छोड़ दिया था, लेकिन रेंजर के व्यवहार से उपजा असंतोष शांत नहीं हुआ।

डीएफओ दफ्तर में ग्रामीणों का धावा

शुक्रवार सुबह बड़ी संख्या में ग्रामीण, जिनमें महिलाएं और युवा शामिल थे, हरिद्वार स्थित डीएफओ कार्यालय पहुंचे। ग्रामीणों का गुस्सा इतना अधिक था कि उन्होंने कार्यालय के भीतर घुसकर डीएफओ स्वप्निल अनिरुद्ध के सामने ही नारेबाजी शुरू कर दी। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि खानपुर रेंज के वर्तमान रेंजर का व्यवहार जनविरोधी है और वे स्थानीय निवासियों को बेवजह प्रताड़ित कर रहे हैं।

रिश्वतखोरी और अभद्रता के गंभीर आरोप

सिकरौदा गांव से आए ग्रामीण बुरहान ने मीडिया और उच्चाधिकारियों के सामने रेंजर पर गंभीर आरोप मढ़े। उन्होंने कहा:

“रेंजर साहब बिना किसी ठोस कारण के ग्रामीणों को परेशान करते हैं। जंगल से सूखी लकड़ियां लाना ग्रामीणों का पारंपरिक अधिकार रहा है, लेकिन इसे आधार बनाकर महिलाओं के साथ अभद्रता की गई। रेंजर पर रिश्वतखोरी के भी आरोप हैं। जब तक उन्हें पद से हटाया नहीं जाता, हमारा विरोध जारी रहेगा।”

ग्रामीणों ने स्पष्ट तौर पर कहा कि वन विभाग के कुछ अधिकारी अपनी शक्तियों का दुरुपयोग कर रहे हैं और निर्दोष ग्रामीणों, विशेषकर महिलाओं को मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे हैं।

प्रशासनिक दखल: एसडीओ के नेतृत्व में जांच टीम गठित

कार्यालय परिसर में बढ़ते हंगामे और कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए डीएफओ स्वप्निल अनिरुद्ध ने मोर्चा संभाला। उन्होंने ग्रामीणों के प्रतिनिधिमंडल से वार्ता की और उनकी शिकायतों को विस्तार से सुना। ग्रामीणों की भावनाओं और आरोपों की गंभीरता को देखते हुए डीएफओ ने तत्काल प्रभाव से एक उच्च स्तरीय जांच टीम के गठन का आदेश दिया।

डीएफओ स्वप्निल अनिरुद्ध ने पत्रकारों से वार्ता करते हुए कहा:

“ग्रामीणों ने लकड़ी बीनने और वन क्षेत्रों के रास्तों के उपयोग को लेकर अपनी शिकायत दर्ज कराई है। रेंजर के विरुद्ध लगाए गए अभद्रता और भ्रष्टाचार के आरोपों की निष्पक्ष जांच की जाएगी। इसके लिए हरिद्वार की एसडीओ (उप प्रभागीय वनाधिकारी) पूनम सिलोरी के नेतृत्व में एक कमेटी बनाई गई है। जांच रिपोर्ट में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसी के आधार पर कड़ी विधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।”

स्थानीय राजनीति और भविष्य की राह

खानपुर क्षेत्र में वन विभाग और जनता के बीच यह टकराव नया नहीं है, लेकिन महिलाओं के साथ अभद्रता के आरोप ने इसे संवेदनशील बना दिया है। स्थानीय सामाजिक संगठनों ने भी ग्रामीणों के इस आंदोलन को समर्थन देने का ऐलान किया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि एसडीओ की जांच में रेंजर को क्लीन चिट देने की कोशिश की गई या कार्रवाई में देरी हुई, तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।

फिलहाल, डीएफओ के ठोस आश्वासन के बाद ग्रामीण शांत होकर वापस लौट गए हैं, लेकिन वन विभाग के गलियारों में इस हंगामे के बाद सन्नाटा पसरा है। एसडीओ पूनम सिलोरी को जल्द से जल्द अपनी रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं, जिसमें मौके पर मौजूद गवाहों और पीड़ित महिलाओं के बयान भी दर्ज किए जाएंगे।

जनभावना बनाम विभाग के नियम

यह घटना दर्शाती है कि हिमालयी राज्यों में वन संपदा पर ग्रामीणों के पारंपरिक अधिकारों और वन विभाग के कड़े नियमों के बीच एक गहरी खाई है। रेंजर पर लगे आरोपों ने विभाग की छवि पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। अब सबकी निगाहें एसडीओ पूनम सिलोरी की जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं कि क्या रेंजर के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई होगी या मामला ठंडे बस्ते में चला जाएगा।

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