
देहरादून: भारत के 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर देवभूमि उत्तराखंड एक ऐतिहासिक और गौरवशाली पल का साक्षी बनने जा रहा है। देशप्रेम और सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल पेश करते हुए उत्तराखंड वक्फ बोर्ड ने एक बड़ा फैसला लिया है। बोर्ड ने प्रदेश की सभी मस्जिदों, मदरसों और वक्फ संपत्तियों पर 26 जनवरी को अनिवार्य रूप से राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराने और भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करने के आदेश जारी किए हैं।
गणतंत्र का 77वां महापर्व और उत्तराखंड की पहल
उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के मुख्य कार्यपालक अधिकारी द्वारा जारी इस आधिकारिक आदेश में संविधान के महत्व को रेखांकित किया गया है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि 26 जनवरी 1950 को भारत एक स्वतंत्र गणराज्य बना था और बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के नेतृत्व में तैयार किया गया संविधान लागू हुआ था।
बोर्ड का मानना है कि 2 साल, 11 महीने और 18 दिन के कड़े परिश्रम से तैयार हुआ यह संविधान ही है जो देश के हर नागरिक को समानता और सुरक्षा का अधिकार देता है। इसी भावना को जन-जन तक पहुँचाने के लिए वक्फ बोर्ड ने अपने अधीन आने वाले सभी प्रबंधन कमेटियों (मुतवलियों) को निर्देशित किया है कि वे अपने परिसरों में ध्वजारोहण कार्यक्रम को पूरी गरिमा के साथ संपन्न कराएं।
‘वतन से मोहब्बत ईमान का हिस्सा’: शादाब शम्स
उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स ने इस निर्णय पर खुशी जताते हुए इसे ‘सैनिक भूमि’ के सम्मान से जोड़ा है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड केवल देवताओं की भूमि नहीं है, बल्कि यह वीरों और सैनिकों की भूमि भी है।
“हमारा मानना है कि वतन से मोहब्बत ईमान का एक बड़ा हिस्सा है। देश का यह पर्व सबसे ऊंचा है और हमें अपने राष्ट्रीय ध्वज के प्रति अपनी अटूट निष्ठा का इजहार करना चाहिए। इस गणतंत्र दिवस पर हम उत्तराखंड की हर मस्जिद और मदरसे से देशप्रेम की एक नई मिसाल पेश करेंगे।” — शादाब शम्स, अध्यक्ष, उत्तराखंड वक्फ बोर्ड
कड़ाई से पालन के निर्देश और सुरक्षा मानक
बोर्ड द्वारा जारी पत्र में मुख्य सचिव के आदेशों का हवाला देते हुए सभी वक्फ प्रबंधन कमेटियों को सख्त हिदायत दी गई है। आदेश के अनुसार:
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ध्वजारोहण: 26 जनवरी की सुबह निर्धारित समय पर वक्फ परिसरों में तिरंगा फहराया जाएगा।
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सांस्कृतिक कार्यक्रम: मदरसों में छात्रों द्वारा देशभक्ति के गीत, भाषण और महापुरुषों के बलिदान को याद करने वाले कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
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सामुदायिक सहभागिता: स्थानीय लोगों को इस उत्सव में शामिल कर आपसी सद्भाव और भाईचारे का संदेश दिया जाएगा।
अमर शहीदों को श्रद्धांजलि और राष्ट्रीय गौरव
गणतंत्र दिवस का मुख्य उद्देश्य उन अमर सपूतों को याद करना है जिन्होंने देश की आजादी और संविधान की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। वक्फ बोर्ड के इस कदम को इसी दिशा में एक सकारात्मक पहल माना जा रहा है। आदेश में उल्लेख है कि जिस तरह देश के दूतावास और दुनिया भर में फैले भारतीय इसे हर्षोल्लास से मनाते हैं, उसी तरह देवभूमि का मुस्लिम समाज भी अपनी वतन परस्ती को ध्वज फहराकर प्रकट करेगा।
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सामाजिक और राजनीतिक मायने
विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तराखंड वक्फ बोर्ड का यह कदम धार्मिक स्थलों और शिक्षण संस्थानों में राष्ट्रीय चेतना को जगाने का काम करेगा। यह आदेश उन भ्रांतियों को भी तोड़ने का प्रयास है जो अक्सर मदरसों और राष्ट्रीय पर्वों के जुड़ाव को लेकर उठती रही हैं।
उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के इस निर्णय के मुख्य बिंदु:
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सैनिक भूमि का सम्मान: राज्य के सैनिक परिवेश को देखते हुए राष्ट्रवाद को प्राथमिकता।
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संविधान के प्रति निष्ठा: छात्रों और युवाओं को संवैधानिक मूल्यों के प्रति जागरूक करना।
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एकता का संदेश: धर्म से ऊपर राष्ट्र को रखते हुए आपसी प्रेम और सद्भाव को बढ़ावा देना।
डिजिटल युग में राष्ट्रवाद की गूँज
बोर्ड ने सभी मुतवलियों को यह भी सुझाव दिया है कि वे ध्वजारोहण और कार्यक्रमों की तस्वीरें और वीडियो साझा करें, ताकि समाज में सकारात्मक संदेश प्रसारित हो सके। वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष ने उम्मीद जताई है कि 26 जनवरी 2026 को होने वाला यह आयोजन उत्तराखंड के इतिहास में एक नया अध्याय लिखेगा, जहाँ मजहबी बंदिशों से परे हर दिल में केवल ‘तिरंगा’ होगा।
राष्ट्र प्रथम की भावना
गणतंत्र दिवस केवल एक तारीख नहीं, बल्कि भारतीय लोकतंत्र की सफलता का उत्सव है। उत्तराखंड वक्फ बोर्ड द्वारा लिया गया यह निर्णय ‘राष्ट्र प्रथम’ (Nation First) की भावना को चरितार्थ करता है। जब हर मस्जिद और मदरसे की छत पर तिरंगा लहराएगा, तो वह दृश्य न केवल राज्य बल्कि पूरे देश के लिए एकता की एक अटूट मिसाल बनेगा।



