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Uttarakhand: सत्ता और संवेदना का संगम: जब काफिला रोक सड़क हादसे में घायल युवक की मदद को उतरे मंत्री डॉ. धन सिंह रावत

देहरादून/ऋषिकेश: राजनीति के गलियारों में अक्सर ‘सत्ता’ की धमक सुनाई देती है, लेकिन कभी-कभी ‘संवेदना’ की गूंज इन सबसे ऊपर निकल जाती है। उत्तराखंड की देवभूमि में शनिवार को कुछ ऐसा ही दृश्य देखने को मिला, जिसने यह साबित कर दिया कि एक जनसेवक के लिए जन-सेवा का धर्म राजनीति से कहीं ऊंचा है। सूबे के स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने प्रोटोकॉल और समय की पाबंदी को दरकिनार करते हुए सड़क पर घायल पड़े एक युवक की मदद कर न केवल उसकी जान बचाई, बल्कि मानवता की एक ऐसी मिसाल पेश की जिसकी चर्चा आज पूरे प्रदेश में हो रही है।

ऋषिकेश-कौड़ियाला मार्ग पर हुआ हादसा

घटना उस समय की है जब कैबिनेट मंत्री डॉ. धन सिंह रावत देहरादून से श्रीनगर (गढ़वाल) में आयोजित एक पूर्वनिर्धारित कार्यक्रम में शिरकत करने के लिए रवाना हुए थे। उनका काफिला ऋषिकेश-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर तेज गति से आगे बढ़ रहा था। जैसे ही काफिला ऋषिकेश-कौड़ियाला मार्ग पर सिंगटाली के समीप पहुँचा, डॉ. रावत की पैनी नजर सड़क किनारे हुए एक हादसे पर पड़ी।

एक तेज रफ्तार मोटरसाइकिल सवार युवक अनियंत्रित होकर सड़क किनारे लगे पत्थरों से टकरा गया था। टक्कर इतनी जोरदार थी कि युवक सड़क पर ही गिर गया और दर्द से कराह रहा था। जहाँ आम तौर पर वीआईपी मूवमेंट के दौरान सुरक्षा के कारण काफिले रुकते नहीं हैं, वहीं डॉ. धन सिंह रावत ने संवेदनशीलता दिखाते हुए तत्काल अपनी गाड़ी रुकवाने का आदेश दिया।

प्रोटोकॉल छोड़ खुद पहुंचे घायल के पास

गाड़ी रुकते ही स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत खुद नीचे उतरे और घायल युवक के पास पहुंचे। उन्होंने न केवल युवक को सहारा दिया बल्कि उससे बातचीत कर उसकी स्थिति का जायजा लिया। मंत्री को अपने बीच पाकर घायल युवक और वहां मौजूद राहगीर भी अचंभित रह गए।

डॉ. रावत ने एक कुशल चिकित्सक (अकादमिक रूप से) और एक जिम्मेदार नागरिक की भूमिका निभाते हुए युवक से उसकी चोटों के बारे में पूछा। प्राथमिक जांच में युवक की स्थिति स्थिर पाई गई, लेकिन डॉ. रावत ने कोई जोखिम नहीं लेना चाहा।

“राजनीति जनसेवा का माध्यम है, और जब कोई व्यक्ति संकट में हो, तो मदद करना हमारा पहला कर्तव्य है। सड़क दुर्घटनाओं में शुरुआती समय ‘गोल्डन ऑवर’ होता है, जिसमें सही मदद किसी की जान बचा सकती है।” — डॉ. धन सिंह रावत (घटनास्थल पर बातचीत के दौरान)

सतर्कता और तत्परता: खुद मिलाया एम्बुलेंस को फोन

एक स्वास्थ्य मंत्री के रूप में अपनी जिम्मेदारी को समझते हुए डॉ. धन सिंह रावत ने बिना देरी किए खुद अपने फोन से 108 एम्बुलेंस सेवा को सूचित किया। उन्होंने विभाग को सतर्क किया ताकि घायल को तत्काल चिकित्सा सहायता मिल सके। हालांकि, घायल युवक ने मंत्री की इस सहृदयता के लिए आभार व्यक्त किया और बताया कि वह अपने साथी के साथ अस्पताल जाने में सक्षम है। जब तक युवक ने पूरी तरह सुरक्षित महसूस नहीं किया और वह अपने साथी के साथ उपचार के लिए रवाना नहीं हुआ, तब तक डॉ. रावत घटनास्थल पर ही डटे रहे। इसके बाद ही उन्होंने श्रीनगर के लिए अपना सफर जारी रखा।


उत्तराखंड सरकार: संवेदनाओं का सिलसिला

यह पहली बार नहीं है जब उत्तराखंड के मंत्रियों ने इस तरह की मानवीय मिसाल पेश की है। डॉ. धन सिंह रावत के इस कार्य ने कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा की उस घटना की यादें ताजा कर दी हैं, जो साल 2024 में उधम सिंह नगर जिले के शक्ति फार्म इलाके में घटी थी।

उक्त समय पर मंत्री सौरभ बहुगुणा ने भी सड़क पर घायल पड़े एक व्यक्ति को देखकर अपना काफिला रुकवाया था। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने एम्बुलेंस का इंतजार करने के बजाय घायल को अपनी ही सरकारी गाड़ी में बिठाया और खुद उसे अस्पताल लेकर गए थे।

सोशल मीडिया पर सराहना की लहर

डॉ. धन सिंह रावत के इस सराहनीय कदम की सोशल मीडिया पर जमकर तारीफ हो रही है। लोगों का कहना है कि उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में, जहाँ भौगोलिक परिस्थितियां कठिन हैं, वहां मंत्रियों का यह संवेदनशील व्यवहार आम जनता में सुरक्षा और विश्वास की भावना पैदा करता है।

सत्ता जब बने सेवा का माध्यम

आज की इस घटना ने स्पष्ट संदेश दिया है कि राजनीति केवल फाइलें निपटाने या भाषण देने तक सीमित नहीं है। डॉ. धन सिंह रावत ने यह दिखाकर कि ‘सत्ता नहीं संवेदना सुर्खियां बनती है’, यह सिद्ध कर दिया है कि एक संवेदनशील नेतृत्व ही जनता का सच्चा प्रतिनिधि होता है। सड़क दुर्घटनाओं के बढ़ते मामलों के बीच मंत्री का यह व्यवहार आम नागरिकों को भी सड़क पर घायलों की मदद करने के लिए प्रेरित करेगा।

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