
नैनीताल/भवाली: विश्व प्रसिद्ध नीम करोली बाबा की तपोस्थली ‘श्री कैंचीधाम’ आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के विजनरी प्लान के तहत कैंचीधाम में लगने वाले भीषण जाम से मुक्ति दिलाने वाली कैंचीधाम बाईपास (सैनिटोरियम–रातीघाट) परियोजना अब अपने अंतिम चरण में है। शनिवार को मुख्यमंत्री ने खुद मोर्चा संभालते हुए इस महत्वपूर्ण परियोजना का स्थलीय निरीक्षण किया और अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए कि आगामी पर्यटन सीजन शुरू होने से पहले हर हाल में निर्माण कार्य पूर्ण कर लिया जाए।
जाम से स्थायी मुक्ति: मुख्यमंत्री का ‘मास्टर प्लान’
निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री धामी ने स्पष्ट किया कि कैंचीधाम में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए मौजूदा सड़क तंत्र पर दबाव काफी बढ़ गया है। मुख्यमंत्री ने कहा, “कैंचीधाम की मान्यता वैश्विक है। देश-विदेश से आने वाले भक्तों को जाम के झाम में न फंसना पड़े और उनकी यात्रा सुरक्षित व सुगम हो, यह हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। यह बाईपास केवल एक सड़क नहीं, बल्कि पर्यटन और धार्मिक आस्था को जोड़ने वाली जीवनरेखा साबित होगी।”
18.15 किमी बाईपास: क्या है परियोजना की प्रगति?
लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बाईपास के तकनीकी पहलुओं और अब तक हुई प्रगति की विस्तृत रिपोर्ट पेश की।
परियोजना का ब्यौरा:
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कुल लंबाई: 18.15 किलोमीटर।
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प्रथम चरण: 8 किलोमीटर सड़क का निर्माण और हॉटमिक्सिंग (डामरीकरण) का कार्य 12 करोड़ रुपये की लागत से पूर्ण हो चुका है।
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द्वितीय चरण: शेष 10.15 किलोमीटर हिस्से में पहाड़ कटिंग का चुनौतीपूर्ण कार्य 5.06 करोड़ रुपये की लागत से पूरा किया जा चुका है।
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वर्तमान स्थिति: वर्तमान में 9.81 करोड़ रुपये की लागत से कलमठ (Culverts), सुरक्षा दीवारें और रिटेनिंग वॉल का निर्माण युद्धस्तर पर जारी है।
रातीघाट पर बनेगा 74 मीटर का भव्य मोटर पुल
परियोजना की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी रातीघाट स्थित अल्मोड़ा राष्ट्रीय राजमार्ग से इस बाईपास को जोड़ना है। इसके लिए शिप्रा नदी के ऊपर 74.15 मीटर स्पान का एक विशाल मोटर पुल बनाया जा रहा है। शासन ने इसके लिए 9.63 करोड़ रुपये की स्वीकृति दे दी है और मौके पर काम शुरू हो चुका है। यह पुल अल्मोड़ा और पिथौरागढ़ की ओर जाने वाले यात्रियों के लिए एक वैकल्पिक और तेज मार्ग उपलब्ध कराएगा, जिससे मुख्य कैंचीधाम बाजार में वाहनों का दबाव 60% तक कम होने की उम्मीद है।
भवाली बाईपास और शिप्रा नदी पर ‘डबल लेन’ सौगात
कैंचीधाम बाईपास के निरीक्षण के बाद मुख्यमंत्री ने भवाली बाईपास और शिप्रा नदी पर नवनिर्मित 30 मीटर स्पान के डबल लेन मोटर पुल का भी जायजा लिया। लगभग 9.99 करोड़ रुपये की लागत से तैयार यह इंफ्रास्ट्रक्चर भवाली शहर के भीतर लगने वाले वर्षों पुराने जाम का स्थायी समाधान है।
इन सुविधाओं के लाभ:
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समय की बचत: नैनीताल से अल्मोड़ा जाने वाले यात्रियों को भवाली और कैंचीधाम के ट्रैफिक में नहीं फंसना पड़ेगा।
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पर्यटन को बढ़ावा: जाम मुक्त सड़कें सैलानियों के अनुभव को सुखद बनाएंगी।
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स्थानीय लाभ: भवाली और आसपास के व्यापारियों को व्यवस्थित ट्रैफिक से व्यापार में आसानी होगी।
श्रमिकों का सम्मान और सैलानियों से संवाद
मुख्यमंत्री धामी का एक मानवीय चेहरा भी निरीक्षण के दौरान देखने को मिला। उन्होंने कड़कड़ाती ठंड में सड़क निर्माण में जुटे श्रमिकों से बातचीत की और उनके कठिन परिश्रम की सराहना की। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि श्रमिकों के कल्याण और उनकी सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा जाए।
वहीं, नैनीताल में बर्फबारी का आनंद ले रहे पर्यटकों से भी सीएम ने फीडबैक लिया। हरियाणा और दिल्ली से आए पर्यटकों ने उत्तराखंड की बदलती तस्वीर और बेहतर सड़क कनेक्टिविटी की तारीफ की। पर्यटकों ने कहा कि सुरक्षित वातावरण और सुगम यातायात उत्तराखंड को देश का नंबर-वन डेस्टिनेशन बनाता है।
बुनियादी ढांचे को सशक्त कर रही राज्य सरकार
मुख्यमंत्री धामी ने जोर देकर कहा कि राज्य सरकार पर्यटन और यातायात सुधार के लिए बुनियादी ढांचे को सशक्त कर रही है। चाहे वो ‘मानसखंड मंदिर माला मिशन’ हो या ‘चारधाम ऑल वेदर रोड’, सरकार का लक्ष्य अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी पहुंचाना है। कैंचीधाम बाईपास इसी श्रृंखला का एक हिस्सा है जो भविष्य में कुमाऊं की आर्थिकी को नई गति प्रदान करेगा।
कैंचीधाम बाईपास परियोजना का समय पर पूरा होना उत्तराखंड के पर्यटन कैलेंडर के लिए मील का पत्थर साबित होगा। मुख्यमंत्री के कड़े रुख और निरंतर मॉनिटरिंग से यह साफ है कि इस बार यात्रा सीजन में पर्यटकों को कैंचीधाम की वादियों में घंटों जाम में नहीं बिताना पड़ेगा।




