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केदारनाथ धाम में कुदरत का ‘सफेद पहरा’: भारी बर्फबारी से थमा जनजीवन, माइनस में पहुंचा पारा; पुनर्निर्माण कार्य ठप

रुद्रप्रयाग |: देवभूमि उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में मौसम के मिजाज एक बार फिर तल्ख हो गए हैं। विश्व प्रसिद्ध केदारनाथ धाम (Kedarnath Dham) में नए साल के आगाज के साथ ही शुरू हुआ बर्फबारी का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। मंगलवार दोपहर बाद धाम में हुई भारी बर्फबारी (Snowfall in Kedarnath) ने न केवल ठंड के प्रकोप को बढ़ा दिया है, बल्कि वहां चल रहे महत्वपूर्ण पुनर्निर्माण कार्यों पर भी ब्रेक लगा दिया है।

दोपहर बाद बदला मौसम का मिजाज

मंगलवार सुबह से ही केदारघाटी में बादलों की आवाजाही जारी थी, लेकिन दोपहर करीब 3 बजे के बाद अचानक मौसम ने करवट बदली और आसमान से सफेद आफत बरसने लगी। देखते ही देखते बाबा केदार का दरबार पूरी तरह बर्फ की सफेद चादर से ढक गया। ताजा बर्फबारी के कारण केदारनाथ में तापमान शून्य से कई डिग्री नीचे (Minus Temperature) चला गया है, जिससे वहां रह रहे सुरक्षाकर्मियों और कर्मचारियों के लिए मुश्किलें खड़ी हो गई हैं।

पुनर्निर्माण कार्यों पर ‘बर्फ’ का ब्रेक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट के तहत केदारनाथ धाम में चल रहे द्वितीय चरण के पुनर्निर्माण कार्य (Reconstruction Works) अब मौसम की भेंट चढ़ते नजर आ रहे हैं। लगातार हो रही बर्फबारी के कारण निर्माण सामग्री का रखरखाव और काम करना असंभव हो गया है।

धाम में कार्यों की देखरेख कर रहे रिटायर्ड कैप्टन सोबन सिंह ने बताया, “दोपहर 3 बजे के बाद बर्फबारी इतनी तेज हो गई कि विजिबिलिटी कम हो गई और कड़ाके की ठंड के कारण मजदूरों के लिए औजार पकड़ना भी दूभर हो गया। सुरक्षा को देखते हुए फिलहाल सभी कार्यों को रोकना पड़ा है।”

मजदूरों का पलायन शुरू: खाली हो रहा है धाम

बढ़ती ठंड और बर्फबारी के कारण केदारनाथ धाम में काम कर रहे मजदूरों ने अब सुरक्षित स्थानों की ओर रुख करना शुरू कर दिया है। जिला प्रशासन के अनुसार, प्रतिकूल मौसम को देखते हुए मजदूर अब धीरे-धीरे सोनप्रयाग और गौरीकुंड की ओर लौटने लगे हैं। अत्यधिक ठंड में खुले आसमान के नीचे या टीन शेड में रहना स्वास्थ्य के लिए जोखिम भरा साबित हो रहा है।

“केदारनाथ धाम में नए साल से ही मौसम चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। लगातार हो रही बारिश और बर्फबारी से तापमान में भारी गिरावट आई है। ठंड के कारण निर्माण कार्य जारी रखना कठिन है, इसलिए मजदूर वापस लौट रहे हैं।” > — प्रतीक जैन, जिलाधिकारी, रुद्रप्रयाग


प्रमुख बिंदु: केदारनाथ में वर्तमान स्थिति

  • तापमान: न्यूनतम तापमान -5°C से -10°C के बीच रिकॉर्ड किया जा रहा है।

  • बर्फ की परत: धाम में अब तक कई फीट बर्फ जमा हो चुकी है।

  • प्रशासनिक अलर्ट: जिला प्रशासन ने केदारनाथ जाने वाले रास्तों पर विशेष सावधानी बरतने के निर्देश दिए हैं।

  • आपूर्ति: ठंड के कारण पाइपलाइनों में पानी जमने की समस्या भी सामने आ रही है।


निचले इलाकों में भी बढ़ा ठंड का प्रकोप

केदारनाथ की चोटियों पर हो रही इस बर्फबारी का सीधा असर रुद्रप्रयाग, अगस्त्यमुनि और गुप्तकाशी जैसे निचले इलाकों में भी देखने को मिल रहा है। पूरी केदारघाटी में शीतलहर (Cold Wave) का प्रकोप है। स्थानीय व्यापारियों और निवासियों का कहना है कि इस साल जनवरी की शुरुआत से ही ठंड ने पिछले कई वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है।

प्रशासन की पैनी नजर

रुद्रप्रयाग के डीएम प्रतीक जैन ने स्पष्ट किया है कि आपदा प्रबंधन विभाग और स्थानीय प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। धाम में मौजूद सीमित संख्या में कर्मचारियों को पर्याप्त रसद और ईंधन उपलब्ध कराया गया है। प्रशासन की प्राथमिकता किसी भी प्रकार की अनहोनी को रोकना और वहां मौजूद लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

भविष्य की चुनौतियां

मौसम विभाग (IMD) के पूर्वानुमान के अनुसार, आने वाले 48 घंटों में केदारनाथ सहित बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री में बर्फबारी और तेज हो सकती है। ऐसे में पुनर्निर्माण कार्यों के दोबारा शुरू होने में अभी लंबा वक्त लग सकता है। आमतौर पर भारी बर्फबारी के बाद धाम में मार्च-अप्रैल तक ही पूर्ण क्षमता के साथ काम शुरू हो पाता है।


केदारनाथ धाम में कुदरत का यह रौद्र रूप जहां पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए विहंगम दृश्य पैदा करता है, वहीं स्थानीय प्रशासन और पुनर्निर्माण टीम के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। बाबा केदार की शरण में फिलहाल सन्नाटा पसरा है और हर तरफ केवल बर्फ की चादर ही नजर आ रही है।

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