
मुंबई/नांदेड़: महाराष्ट्र में स्थानीय निकाय चुनावों की सरगर्मी के बीच नांदेड़ महानगरपालिका चुनाव (Nanded Municipal Election) ने एक नया मोड़ ले लिया है। बीजेपी के दिग्गज नेता और राज्यसभा सांसद अशोक चव्हाण एक कथित वायरल ऑडियो क्लिप (Viral Audio Clip) के कारण विवादों के घेरे में आ गए हैं। इस ऑडियो ने नांदेड़ के राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है और विपक्षी दलों को सत्ता पक्ष पर हमला करने का नया हथियार दे दिया है।
क्या है वायरल ऑडियो का पूरा मामला?
सोशल मीडिया पर वायरल हो रही इस कथित ऑडियो क्लिप में अशोक चव्हाण और पूर्व राज्यमंत्री डी.पी. सावंत की आवाज होने का दावा किया जा रहा है। बातचीत नांदेड़ के प्रभाग क्रमांक 14 (इतवारा मदीनानगर) के संदर्भ में है।
आरोप है कि जब एक कार्यकर्ता या इच्छुक उम्मीदवार ने मुस्लिम बहुल क्षेत्र होने के नाते एक मुस्लिम चेहरे को पैनल में शामिल करने का सुझाव दिया, तो चव्हाण ने कथित तौर पर उसे सिरे से खारिज कर दिया। ऑडियो में कथित तौर पर कहा जा रहा है:
“हमें मुस्लिम उम्मीदवार नहीं चाहिए, हम सिर्फ हिंदुओं का ही पैनल बनाएंगे। चुनाव के खर्च की चिंता मत करो, उसकी जिम्मेदारी पार्टी उठाएगी।”
नोट: कोई भी जिम्मेदार मीडिया संस्थान इस वायरल ऑडियो क्लिप की सत्यता की पुष्टि नहीं करता है।
टिकट के बदले ’50-50 लाख’ का विवाद
यह ऑडियो ऐसे समय में सामने आया है जब बीजेपी के भीतर टिकट बंटवारे को लेकर पहले से ही असंतोष पनप रहा है। पार्टी के भीतर ही कुछ पुराने वफादारों ने आरोप लगाया है कि टिकट वितरण के लिए 50-50 लाख रुपये की मांग की जा रही है और निष्ठावान कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज कर ‘बाहरी’ या रसूखदार लोगों को प्राथमिकता दी जा रही है। अशोक चव्हाण के इस कथित ऑडियो ने इन आरोपों की आग में घी डालने का काम किया है।
सियासी वार-पलटवार: ‘साठी बुद्धी नाठी’
इस विवाद ने नांदेड़ की राजनीति के दो पुराने प्रतिद्वंदियों—अशोक चव्हाण और अजित पवार गुट के नेता प्रताप पाटिल चिखलीकर—को आमने-सामने खड़ा कर दिया है।
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चिखलीकर का हमला: चिखलीकर ने अशोक चव्हाण पर तीखा तंज कसते हुए मराठी की प्रसिद्ध कहावत ‘साठी बुद्धी नाठी’ (बुढ़ापे में बुद्धि का सठिया जाना) का प्रयोग किया। उन्होंने कहा कि चव्हाण अपनी राजनीतिक जमीन खो रहे हैं और हताशा में ऐसे फैसले ले रहे हैं।
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अशोक चव्हाण का रुख: हालांकि अभी तक अशोक चव्हाण की ओर से इस ऑडियो क्लिप को लेकर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन उनके समर्थकों ने इसे विरोधियों की साजिश और ‘फेक ऑडियो’ करार दिया है।
नांदेड़ का चुनावी समीकरण और प्रभाव
नांदेड़ हमेशा से अशोक चव्हाण का गढ़ रहा है, लेकिन कांग्रेस छोड़ बीजेपी में शामिल होने के बाद यह उनका पहला बड़ा स्थानीय चुनाव है।
| मुख्य विवाद | संभावित प्रभाव |
| मुस्लिम उम्मीदवार मुद्दा | अल्पसंख्यक बाहुल्य क्षेत्रों में बीजेपी की रणनीति पर सवाल। |
| भ्रष्टाचार के आरोप | 50 लाख के आरोप से कैडर (कार्यकर्ताओं) में नाराजगी। |
| गठबंधन में दरार | महायुति के भीतर (अशोक चव्हाण बनाम चिखलीकर) मतभेद उजागर। |
चुनाव से ठीक पहले इस तरह के ऑडियो का सामने आना नांदेड़ के ध्रुवीकरण की ओर इशारा करता है। यदि यह क्लिप सही पाई जाती है, तो यह समावेशी राजनीति के दावों पर सवाल खड़े करेगी, और यदि यह फर्जी है, तो यह ‘डीपफेक’ और ‘प्रोपेगेंडा’ की राजनीति का एक खतरनाक उदाहरण होगा। फिलहाल, हुडा पुलिस और स्थानीय प्रशासन चुनावी माहौल को देखते हुए सतर्क है।



