
देहरादून, 28 नवंबर: देहरादून स्थित ग्राफिक एरा सिल्वर जुबली कन्वेंशन सेंटर में शुक्रवार को विश्व आपदा प्रबंधन सम्मेलन एवं 20वें उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सम्मेलन–2025 का विधिवत उद्घाटन हुआ। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह मौजूद रहे। इस अवसर पर एनडीएमए सदस्य डॉ. दिनेश कुमार असवाल की पुस्तकों का विमोचन भी किया गया।
महिला वैज्ञानिकों को सम्मान—Young Women Scientist Awards प्रदान
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री धामी ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाली प्रतिभाशाली महिला वैज्ञानिकों को दो प्रमुख पुरस्कार प्रदान किए।
- यंग वीमेन साइंटिस्ट अचीवमेंट अवार्ड–2025 (45 वर्ष तक):
डॉ. अंकिता राजपूत, डॉ. गरिमा पुनेठा, डॉ. ममता आर्या, डॉ. हर्षित पंत, डॉ. प्रियंका शर्मा और डॉ. प्रियंका पांडे। - यूकॉस्ट यंग वीमेन साइंटिस्ट एक्सीलेंस अवार्ड (30 वर्ष तक):
डॉ. प्रियंका उनियाल, पलक कंसल, राधिका खन्ना, स्तुति आर्या और देवयानी मुंगल को सम्मानित किया गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की युवा महिला वैज्ञानिकों के शोध कार्य से न केवल राज्य बल्कि देश और वैश्विक स्तर पर भी नई दिशा मिल रही है।
हरिद्वार, पंतनगर व औली में लगेंगे अत्याधुनिक मौसम राडार
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने घोषणा की कि राज्य के लिए मौसम पूर्वानुमान क्षमता बढ़ाने के लिए हरिद्वार, पंतनगर और औली में अत्याधुनिक राडार सिस्टम स्थापित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि हिमालयी क्षेत्रों में बदलते मौसम पैटर्न और आपदा जोखिम को देखते हुए यह कदम अत्यंत महत्वपूर्ण है।
डॉ. सिंह ने ‘सिलक्यारा विजय अभियान’ का उल्लेख करते हुए कहा कि यह उदाहरण है कि वैज्ञानिक दक्षता और मजबूत नेतृत्व किसी भी कठिन चुनौती को पार कर सकता है।
“हिमालय जीवन-स्रोत, संरक्षण सर्वोपरि”—मुख्यमंत्री धामी
सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि हिमालय मात्र पर्वत श्रृंखला नहीं बल्कि भारतीय उपमहाद्वीप का जीवन-स्रोत है। ग्लेशियर, नदियाँ और जैवविविधता संपूर्ण पर्यावरणीय संतुलन का आधार हैं। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन, अनियंत्रित विकास और संसाधनों के दोहन से हिमालय का संतुलन प्रभावित हो रहा है, जिससे भूस्खलन, बादल फटने और तीव्र वर्षा जैसी आपदाएँ बढ़ी हैं।
उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय वैज्ञानिकों, संस्थानों और हिमालयी राज्यों के विशेषज्ञों के बीच सहयोग को मजबूत करने पर जोर दिया।
सिलक्यारा सुरंग रेस्क्यू—वैज्ञानिक तकनीकों का उदाहरण
मुख्यमंत्री धामी ने सिलक्यारा सुरंग बचाव अभियान को देश के इतिहास का सबसे सफल आपदा प्रबंधन अभियान बताया, जहाँ 17 दिनों के प्रयासों के बाद 41 श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लागू 4P मंत्र—Predict, Prevent, Prepare, Protect—इस अभियान में साकार हुआ।
आपदा प्रबंधन को वैज्ञानिक और तकनीकी आधार पर मजबूत करने की राज्य की पहल
मुख्यमंत्री ने राज्य में लागू किए जा रहे कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों का उल्लेख किया, जिनमें—
- डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम
- ग्लेशियर रिसर्च सेंटर
- सेंसर आधारित झील मॉनिटरिंग
- ड्रोन सर्विलांस
- जीआईएस मैपिंग और सैटेलाइट मॉनिटरिंग
- अर्ली वार्निंग सिस्टम को सुदृढ़ करना
उन्होंने बताया कि पारंपरिक जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने के लिए स्प्रिंग रिजुविनेशन अथॉरिटी (SARA) का गठन किया गया है। साथ ही प्लास्टिक प्रबंधन में सफलता हेतु “डिजिटल डिपॉजिट रिफंड सिस्टम” लागू की गई है, जिसके परिणामस्वरूप 72 टन कार्बन उत्सर्जन में कमी आई है।
पर्यावरण संरक्षण में उत्तराखंड अग्रणी
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि सनातन संस्कृति में प्रकृति की पूजा हमारे जीवन का मूल है, और पर्यावरणीय संतुलन को बनाए रखना राज्य सरकार का “विकल्प-रहित संकल्प” है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस सम्मेलन से वैश्विक स्तर पर आपदा प्रबंधन व जलवायु परिवर्तन के समाधान हेतु नई दिशा मिलेगी।
सम्मेलन में व्यापक राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय भागीदारी
कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद नरेश बंसल, सचिव नितेश झा, यूकॉस्ट महानिदेशक दुर्गेश पंत, ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय के चेयरमैन कमल घनशाला, विभिन्न देशों के राजनयिक, कई विश्वविद्यालयों के वैज्ञानिक, शोधकर्ता और विषय विशेषज्ञ शामिल रहे।



