
नई दिल्ली, 28 नवंबर। संसद मार्ग थाने के बाहर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान कथित रूप से पुलिसकर्मियों से हाथापाई करने के आरोप में गिरफ्तार नौ आरोपियों को शुक्रवार को दिल्ली की एक अदालत ने जमानत प्रदान कर दी। न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने कहा कि आरोपियों की निरंतर हिरासत की आवश्यकता नहीं है और मामले की आगे की जांच को जमानत से कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।
गौरतलब है कि इस मामले में कुल 17 लोगों को गिरफ्तार किया गया था, जिन पर भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत बलवा, सरकारी कार्य में बाधा डालना, सरकारी कर्मचारी पर हमला करने और शांति भंग करने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए थे। अदालत में इस समय नौ आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई हो रही थी।
पृष्ठभूमि: इंडिया गेट के निकट प्रदर्शन और विवाद
घटनाक्रम के अनुसार, बीते सप्ताह संसद मार्ग थाने के निकट एक समूह द्वारा प्रदर्शन किया जा रहा था। यह विरोध प्रदर्शन किसी सामाजिक मुद्दे को लेकर था, जिसकी अनुमति पूर्व में पुलिस से नहीं ली गई थी। पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान स्थिति तनावपूर्ण हो गई और भीड़ को नियंत्रित करने के प्रयास में कुछ प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर पुलिसकर्मियों से धक्का-मुक्की और हाथापाई की।
मामले में दर्ज एफआईआर के अनुसार:
- प्रदर्शनकारियों ने पुलिस बैरिकेड्स हटाने का प्रयास किया
- पुलिसकर्मियों को सरकारी कार्य करने से रोका
- मौके पर तैनात कर्मचारियों के साथ कथित दुव्यवहार किया
- कानून-व्यवस्था बिगाड़ने का प्रयास किया
इसी आधार पर 17 लोगों को हिरासत में लिया गया और अदालत में पेश किया गया था।
अदालत की कार्यवाही: “जमानत नियम, जेल अपवाद”
सुनवाई के दौरान आरोपियों के वकीलों ने अदालत को बताया कि उनके मुवक्किल शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कर रहे थे और किसी भी तरह की हिंसा में शामिल नहीं थे। वकीलों ने कहा कि यह मामला “अनावश्यक कठोरता” का प्रतीक है और पुलिस द्वारा “अत्यधिक कार्रवाई” की गई है।
वहीं अभियोजन पक्ष ने दावा किया कि प्रदर्शनकारियों ने न केवल शांति व्यवस्था में बाधा डाली, बल्कि पुलिस कर्मियों की सुरक्षा को भी जोखिम में डाला। अभियोजन ने कहा कि यदि आरोपियों को जमानत दी गई, तो वे साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ कर सकते हैं।
हालांकि, न्यायिक मजिस्ट्रेट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा:
- जांच प्रारंभिक अवस्था में है
- सभी आरोप दस्तावेजी और वीडियो साक्ष्यों पर आधारित हैं
- आरोपियों की हिरासत जारी रखने का कोई ठोस कारण नहीं
- जमानत प्रदान करना उपयुक्त है, बशर्ते वे शर्तों का पालन करें
अदालत ने 20-20 हजार रुपये के निजी मुचलके पर नौ आरोपियों को जमानत दे दी।
लगाई गई शर्तें
अदालत ने जमानत देते समय कुछ शर्तें भी निर्धारित कीं, जिनमें शामिल हैं:
- आरोपी जांच अधिकारी के समक्ष आवश्यकतानुसार उपस्थित होंगे
- वे मामले के साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेंगे
- किसी गवाह को प्रभावित नहीं करेंगे
- भारत से बाहर नहीं जाएंगे बिना अदालत की अनुमति के
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी आरोपी ने इन शर्तों का उल्लंघन किया, तो उनकी जमानत रद्द की जा सकती है।
बचे हुए आठ आरोपियों की याचिकाओं पर जल्द सुनवाई
चूंकि कुल 17 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था, इसलिए शेष आठ लोगों की जमानत याचिकाओं पर अगली तारीख को सुनवाई की जाएगी। अदालत ने कहा कि प्रत्येक याचिका पर स्वतंत्र रूप से विचार किया जाएगा।
पुलिस की प्रतिक्रिया
दिल्ली पुलिस सूत्रों के अनुसार, घटना से जुड़े वीडियो फुटेज, मोबाइल रिकॉर्डिंग और सीसीटीवी कैमरों की जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि जिन लोगों ने भी हिंसक गतिविधियों में हिस्सा लिया है, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा—
“दिल्ली पुलिस शांतिपूर्ण प्रदर्शन का सम्मान करती है, लेकिन कानून अपने हाथ में लेने की अनुमति किसी को नहीं दी जाएगी।”
सिविल राइट्स समूहों की प्रतिक्रिया
दूसरी ओर, कुछ मानवाधिकार संगठनों और वकीलों ने आरोपियों को जमानत मिलने को “न्यायिक संतुलन” का निर्णय बताया है।
एक कानून विशेषज्ञ ने कहा कि अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि बिना न्यायिक आवश्यकता के हिरासत में रखना संविधान के अनुच्छेद 21 के खिलाफ है।
निष्कर्ष
इंडिया गेट और संसद मार्ग जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में प्रदर्शन पहले भी कानून-व्यवस्था के लिहाज से चुनौती रहे हैं। ताज़ा घटना एक बार फिर उसी तनावपूर्ण माहौल का संकेत देती है, जहाँ प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की स्थिति बनती है।
हालांकि अदालत के आदेश के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आगे की जांच किस दिशा में बढ़ती है और शेष आरोपियों की जमानत पर क्या फैसला आता है।
फिलहाल नौ आरोपियों के जेल से बाहर आने के साथ, घटनाक्रम एक नए मोड़ पर पहुंच गया है और अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया के पूरा होने पर ही सामने आएगा।



