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Reading: सुप्रीम कोर्ट का रेलवे से बड़ा सवाल: दुर्घटना बीमा कवर केवल ऑनलाइन टिकट धारकों के लिए ही क्यों?
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The Hill India > Blog > देश > सुप्रीम कोर्ट का रेलवे से बड़ा सवाल: दुर्घटना बीमा कवर केवल ऑनलाइन टिकट धारकों के लिए ही क्यों?
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सुप्रीम कोर्ट का रेलवे से बड़ा सवाल: दुर्घटना बीमा कवर केवल ऑनलाइन टिकट धारकों के लिए ही क्यों?

The Hill India News
Last updated: November 28, 2025 2:56 am
The Hill India News
Published: November 28, 2025
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नई दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने भारतीय रेलवे को यात्रियों के दुर्घटना बीमा कवर को लेकर महत्वपूर्ण सवालों के घेरे में खड़ा किया है। अदालत ने पूछा है कि दुर्घटना बीमा सुविधा सिर्फ ऑनलाइन टिकट खरीदने वाले यात्रियों तक ही सीमित क्यों है, जबकि ऑफलाइन यानी काउंटर से टिकट खरीदने वाले करोड़ों यात्री इस सुरक्षा दायरे से बाहर हैं।

Contents
सुप्रीम कोर्ट का सवाल—‘क्या ऑफलाइन यात्री कम महत्वपूर्ण हैं?’फिलहाल केवल ऑनलाइन टिकट पर मिलता है बीमा—क्या है व्यवस्था?याचिकाकर्ता की दलील—यह भेदभावपूर्ण नीति हैरेलवे का अब तक का रुखअदालत ने मांगा व्यापक जवाब—अगली सुनवाई तयपृष्ठभूमि—घटनाओं के बाद बीमा कवर पर बढ़ती चर्चासुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी के बाद रेलवे की नीति पर उठे सवाल

न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की खंडपीठ ने गुरुवार को इस मुद्दे पर सुनवाई की। पीठ को बताया गया कि फिलहाल रेलवे की बीमा सुविधा केवल IRCTC के माध्यम से ऑनलाइन बुक किए गए टिकटों पर उपलब्ध है, जबकि रेलवे काउंटर से खरीदे गए टिकटों पर यह लाभ नहीं मिलता।


सुप्रीम कोर्ट का सवाल—‘क्या ऑफलाइन यात्री कम महत्वपूर्ण हैं?’

जैसे ही जानकारी पीठ के सामने रखी गई, न्यायालय ने रेलवे की नीति पर गंभीर सवाल उठाए। न्यायालय ने कहा कि रेल दुर्घटना की स्थिति में ऑनलाइन और ऑफलाइन टिकट धारकों के बीच भेदभाव समझ से परे है।

पीठ ने टिप्पणी की:
“जब सभी यात्री समान रूप से जोखिम का सामना करते हैं, तो बीमा कवर में भेदभाव क्यों? ऑफलाइन टिकट लेने वाले यात्री क्या कम महत्वपूर्ण हैं?”

अदालत ने रेलवे से स्पष्ट और विस्तृत जवाब माँगते हुए कहा कि बीमा कवर एक मूलभूत सुरक्षा है जो सभी यात्रियों को समान रूप से उपलब्ध होना चाहिए।


फिलहाल केवल ऑनलाइन टिकट पर मिलता है बीमा—क्या है व्यवस्था?

IRCTC के जरिए ऑनलाइन टिकट बुक करने वाले यात्रियों को एक वैकल्पिक बीमा सुविधा दी जाती है, जिसमें मात्र 35 पैसे के प्रीमियम में—

  • दुर्घटना में मृत्यु पर ₹10 लाख
  • स्थायी विकलांगता पर ₹10 लाख
  • आंशिक विकलांगता पर ₹7.5 लाख

तक का कवर मिलता है।

लेकिन लाखों यात्री रोजाना रेलवे टिकट काउंटर से टिकट खरीदते हैं, और वर्तमान नीति के तहत वे इस सुविधा से वंचित रह जाते हैं।


याचिकाकर्ता की दलील—यह भेदभावपूर्ण नीति है

मामला एक जनहित याचिका के जरिए सामने आया, जिसमें यह कहा गया कि रेलवे की वर्तमान नीति संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन करती है, जो ‘समानता के अधिकार’ की गारंटी देता है।
याचिकाकर्ता का कहना है कि रेलवे एक सार्वजनिक सेवा है और हर श्रेणी के यात्री को समान सुरक्षा देने की जिम्मेदारी उसकी है।

याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि:

  • दुर्घटना किसी यात्री के टिकट खरीदने के तरीके से नहीं होती
  • ऑफलाइन टिकट काउंटर पर अधिकतर गरीब और ग्रामीण यात्री निर्भर रहते हैं
  • इसलिए उन्हें सुरक्षा कवच से वंचित रखना अनुचित और भेदभावपूर्ण है

रेलवे का अब तक का रुख

सुनवाई के दौरान रेलवे की ओर से कहा गया कि बीमा सुविधा IRCTC के साथ एक व्यावसायिक व्यवस्था के तहत उपलब्ध है। ऑफलाइन टिकट प्रणाली में बीमा शामिल करने के लिए अतिरिक्त व्यवस्थाओं और नीति-निर्धारण की आवश्यकता है।

हालांकि सर्वोच्च न्यायालय इस दलील से संतुष्ट नहीं दिखा और रेलवे से स्पष्ट नीति और उसके औचित्य पर विस्तृत जवाब माँगा है।


अदालत ने मांगा व्यापक जवाब—अगली सुनवाई तय

पीठ ने रेलवे को निर्देश दिया है कि—

  • ऑनलाइन और ऑफलाइन टिकटों के बीच बीमा कवर में अंतर का तार्किक आधार बताए
  • क्या सभी यात्रियों को समान बीमा सुविधा देने पर विचार किया जा रहा है
  • भविष्य की नीति क्या होगी

रेलवे अब इस दिशा में विस्तृत हलफनामा दाखिल करेगा। अगली सुनवाई पर अदालत नीति की वैधता और बदलाव की संभावनाओं पर विचार करेगी।


पृष्ठभूमि—घटनाओं के बाद बीमा कवर पर बढ़ती चर्चा

हाल के वर्षों में कई छोटे-बड़े रेल हादसों के बाद यात्रियों की सुरक्षा और बीमा कवर को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि—

  • अधिकांश यात्री अभी भी ऑफलाइन टिकट पर यात्रा करते हैं
  • ऑनलाइन टिकट का प्रतिशत कुल टिकट बिक्री का एक सीमित हिस्सा है
  • इसलिए बीमा कवर को सार्वभौमिक बनाना समय की जरूरत है

रेलवे से जुड़े परिवहन विशेषज्ञों का मानना है कि बीमा कवर को सभी यात्रियों के लिए समान रूप से उपलब्ध करने से प्रशासनिक जिम्मेदारी भी आसान होगी और यात्रियों का भरोसा भी बढ़ेगा।


सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी के बाद रेलवे की नीति पर उठे सवाल

सुप्रीम कोर्ट की इस सख्त टिप्पणी के बाद रेलवे पर दबाव बढ़ गया है कि वह अपनी बीमा नीति पर पुनर्विचार करे। अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि समान जोखिम में समान अधिकार होना चाहिए।
यह देखना दिलचस्प होगा कि रेलवे ऑफ़लाइन टिकट सिस्टम में बीमा शामिल करने को लेकर क्या कदम उठाता है। देश की सबसे बड़ी अदालत ने संकेत दे दिया है कि अब यात्रियों की सुरक्षा को लेकर दोहरी नीति स्वीकार नहीं होगी।

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