
वॉशिंगटन/जेनेवा/कीव: यूक्रेन युद्ध अपने निर्णायक मोड़ पर खड़ा है, और वैश्विक कूटनीतिक हलचलों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि युद्ध समाप्त करने की उनकी तैयारी अब लगभग अंतिम चरण में है। ट्रंप ने मंगलवार को दावा किया कि उनका शांति-फॉर्मूला ‘फाइन-ट्यून’ हो चुका है और बेहद जल्द व्यापक रूप से लागू हो सकता है। इसी रणनीति के तहत उन्होंने अपने विशेष दूत स्टीव विटकॉफ को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात के लिए भेजा है, जबकि अमेरिकी आर्मी सेक्रेटरी डैन ड्रिस्कॉल यूक्रेनी अधिकारियों से संवाद कर रहे हैं।
ट्रंप के इस दावे के बाद युद्धग्रस्त पूर्वी यूरोप, मध्य यूरोपीय राजधानियों और पश्चिमी राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है कि क्या वॉशिंगटन, मॉस्को और कीव के बीच पर्दे के पीछे एक संभावित समझौते की जमीं तैयार हो चुकी है।
“मैं पुतिन और जेलेंस्की से मिल सकता हूँ” — ट्रंप
सोशल मीडिया पर जारी एक विस्तृत बयान में ट्रंप ने कहा कि उन्हें शांति प्रक्रिया की हर प्रगति की सीधे जानकारी दी जा रही है। उन्होंने अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम, उपराष्ट्रपति जेडी वैंस, विदेश मंत्री मार्को रुबियो, युद्ध मंत्री पीट हेगसेथ और चीफ ऑफ स्टाफ सूसी वाइल्स का नाम लेते हुए बताया कि उनकी निगरानी में बातचीत आगे बढ़ रही है।
ट्रंप ने लिखा:
“मैं जल्द ही राष्ट्रपति पुतिन और राष्ट्रपति जेलेंस्की से मिलने की उम्मीद करता हूँ। लेकिन यह तभी होगा जब समझौता पूरी तरह तैयार हो या अंतिम चरण में पहुँचे। मुझे भरोसा है कि यह युद्ध जल्द खत्म हो सकता है।”
यह बयान ऐसे समय आया है जब वाशिंगटन और मॉस्को के बीच कई स्तरों पर गुप्त वार्ताएं जारी हैं और अबू धाबी में अमेरिकी रक्षा अधिकारियों और रूसी प्रतिनिधियों की बैठक के बाद कूटनीतिक गतिविधियां और तेज हो गई हैं।
अबू धाबी में हुई अहम बातचीत, उसी दौरान कीव पर मिसाइल बारिश
अमेरिकी आर्मी सेक्रेटरी डैन ड्रिस्कॉल, जो इन वार्ताओं का एक केंद्रीय हिस्सा हैं, उन्होंने सोमवार देर रात और मंगलवार को संयुक्त अरब अमीरात की राजधानी अबू धाबी में रूसी अधिकारियों से युद्ध खत्म करने के संभावित प्रस्ताव पर चर्चा की।
उनके प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल जेफ टॉलबर्ट ने कहा:
“बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है और हम आशावादी हैं।”
लेकिन विडंबना ये रही कि इन्हीं वार्ताओं के बीच रूस ने एक बार फिर यूक्रेन की राजधानी कीव को निशाना बनाया। कई मिसाइलों और ड्रोन हमलों में कम से कम 7 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई घायल हुए।
उसी समय, यूक्रेन ने भी दक्षिणी रूस पर जवाबी हमला किया जिसमें 3 लोगों की मौत और कई घरों को नुकसान की खबर सामने आई।
हमलों का यह आदान-प्रदान यह स्पष्ट करता है कि जमीन पर युद्ध जारी है, लेकिन कूटनीति के स्तर पर वार्ताएं अपने चरम पर हैं।
ट्रंप का शांति प्रस्ताव: ‘रूस-हितैषी’ होने का आरोप
ट्रंप के शांति-प्रस्ताव की मूल रूपरेखा पिछले सप्ताह मीडिया में आई थी, जिसमें कहा गया कि कई बिंदु रूस के पक्ष में अधिक झुके हुए दिखते हैं। यही वजह थी कि यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की ने अमेरिका से त्वरित संवाद साधा और अपने सुरक्षा सलाहकारों को सतर्क रहने के निर्देश दिए।
हालांकि अभी प्रस्ताव सार्वजनिक नहीं हुआ है, लेकिन रिपोर्ट्स के अनुसार इसमें शामिल हो सकते हैं:
- कुछ विवादित क्षेत्रों पर रूस का अस्थायी प्रशासन
- युद्धविराम की त्वरित घोषणा
- नाटो विस्तार पर यूक्रेन से समझौता
- सुरक्षा गारंटी के लिए अमेरिका और यूरोपीय देशों की निगरानी
इन बिंदुओं ने यूक्रेन में मिश्रित प्रतिक्रिया पैदा की है। कई यूक्रेनी सांसदों ने चिंता जताई है कि यदि प्रस्ताव रूस को अधिक लाभ पहुंचाता है, तो कीव की सुरक्षा पर दीर्घकालिक खतरा उत्पन्न हो सकता है।
यूरोप में हलचल: फ्रांस और ब्रिटेन ने दी बड़ी संकेत
इसी बीच यूरोपीय देशों ने भी अपने संकेत दे दिए हैं। फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने मंगलवार को कहा कि शांति प्रयास “स्पष्ट रूप से एक महत्वपूर्ण मोड़” पर पहुंच चुके हैं। जेनेवा में अमेरिकी और यूक्रेनी अधिकारियों की बैठक के बाद मैक्रों ने कहा:
“वार्ताओं की गति तेज हो रही है। हमें इस समय का पूरा फायदा उठाना चाहिए।”
हाल ही में फ्रांस और ब्रिटेन की संयुक्त अध्यक्षता में एक वीडियो कॉन्फ्रेंस हुई, जिसमें वे देश शामिल थे जो रूस के साथ किसी संभावित सीजफायर की निगरानी कर सकते हैं। इस बैठक में भी यह संकेत मिला कि यूरोप युद्धविराम को लेकर गंभीरता से रणनीति बना रहा है।
ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने भी आशावादी रुख अपनाते हुए कहा:
“मुझे लगता है कि हम सकारात्मक दिशा में बढ़ रहे हैं।”
यह पहली बार है जब दो प्रमुख यूरोपीय नेता एक साथ खुले मंच पर शांति प्रक्रिया को गति देने की बात कर रहे हैं।
क्या युद्ध वास्तव में अंत के करीब है?
भूमि पर जारी हमलों और कूटनीतिक बैठकों के इस समानांतर घटनाक्रम ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं—
- क्या ट्रंप प्रशासन एक बड़े ‘शांति-डील’ के करीब है?
- क्या रूस अब वार्ता को लेकर अधिक लचीला रुख अपना रहा है?
- क्या जेलेंस्की युद्ध जारी रखने के बजाए राजनीतिक समाधान की ओर झुक रहे हैं?
विश्लेषकों का कहना है कि इस युद्ध को रोकने में अब अमेरिका की भूमिका निर्णायक बन चुकी है। ट्रंप के सीधे दखल और शीर्ष अधिकारियों की सक्रियता ने इस उम्मीद को मजबूत किया है कि आने वाले महीनों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
हालांकि सावधानी भी जरूरी है, क्योंकि युद्धविराम और स्थायी शांति में बड़ा अंतर होता है। पिछले दो वर्षों में कई बार वार्ता की कोशिशें हुईं, पर हमला फिर शुरू हो गया।
ट्रंप द्वारा पुतिन और जेलेंस्की से संभावित मुलाकात का उल्लेख यह संकेत देता है कि कूटनीति अब निर्णायक मोड़ पर है। अमेरिका, रूस, यूक्रेन और यूरोप—चारों पक्ष एक महत्वपूर्ण चरण में हैं, जहाँ एक छोटी-सी प्रगति भी दुनिया की सबसे बड़ी भू-राजनीतिक संकटों में से एक को खत्म करने का रास्ता खोल सकती है। वैश्विक निगाहें अब वाशिंगटन और मॉस्को के अगले कदम पर टिकी हैं।



