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गृह मंत्री अमित शाह ने गुरु तेग बहादुर के 350वें शहादत दिवस पर दी श्रद्धांजलि, कहा — “उन्होंने हिंद की अस्मिता की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया”

नई दिल्ली, 25 नवंबर: भारत के इतिहास में अद्वितीय बलिदान और धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा के प्रतीक सिख धर्म के नौवें गुरु, ‘हिंद की चादर’ गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहादत दिवस के अवसर पर मंगलवार को देशभर में श्रद्धांजलि सभाएं आयोजित की गईं। इसी क्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी गुरु तेग बहादुर के अतुलनीय बलिदान को स्मरण करते हुए उन्हें नमन किया।

अमित शाह ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर संदेश जारी कर कहा कि गुरु तेग बहादुर ने न केवल आध्यात्मिक मार्ग का प्रसार किया, बल्कि क्रूर आक्रमणकारियों के अत्याचारों के विरुद्ध भारतीय संस्कृति, आस्था और मानवाधिकारों की रक्षा के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए।


“हिंद की चादर का बलिदान युगों-युगों तक प्रेरणा देता रहेगा” — शाह

अमित शाह ने अपने संदेश में लिखा,
“सिख धर्म के नौवें गुरु, ‘हिंद की चादर’ गुरु तेग बहादुर जी के 350वें बलिदान दिवस पर उन्हें नमन करता हूं। उन्होंने आध्यात्मिक साधना की, दिव्य समागम आयोजित किए और क्रूर आक्रमणकारियों से स्वसंस्कृति तथा स्वधर्म की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया।”

उन्होंने आगे कहा कि गुरु तेग बहादुर का बलिदान न केवल भारत के इतिहास में, बल्कि संपूर्ण मानव सभ्यता में स्वतंत्रता और धार्मिक अधिकारों की रक्षा के सबसे ऊँचे उदाहरणों में से एक है।
“गुरु तेग बहादुर जी ने सिद्ध कर दिया कि अत्याचार के आगे सिर झुकाने की बजाय सत्य और धर्म के लिए मृत्यु स्वीकार करना ही सच्चा साहस है।”


गुरु तेग बहादुर का बलिदान: धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा का वैश्विक उदाहरण

गुरु तेग बहादुर सिख पंथ के नौवें गुरु थे, जो अपनी आध्यात्मिक गहराई, त्याग, शांति और दया के लिए जाने जाते हैं। मुगल काल में जब कश्मीरी पंडितों को धर्मांतरण के लिए प्रताड़ित किया जा रहा था, तब उनकी रक्षा के लिए गुरु तेग बहादुर ने आगे आकर विशाल मानवता का पक्ष लिया।

उन्होंने औरंगज़ेब की अत्याचारी नीतियों के विरुद्ध आवाज उठाई और कहा,
“यदि धर्म और मानवता की रक्षा करनी है, तो किसी एक को बलिदान देना होगा।”

इसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर दिल्ली लाया गया और 1675 में चांदनी चौक में शहीद कर दिया गया।
उनका बलिदान भारतीय इतिहास में धर्म की स्वतंत्रता के लिए दिए गए सर्वश्रेष्ठ बलिदानों में से एक माना जाता है।


देशभर में कार्यक्रम, कीर्तन और श्रद्धांजलि सभाएं

गुरु तेग बहादुर के 350वें शहादत दिवस पर दिल्ली, पंजाब, हरियाणा से लेकर विदेशों में बसे सिख समुदायों तक श्रद्धांजलि के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
विशेष तौर पर —

  • गुरुद्वारा बंगला साहिब में अखंड पाठ और कीर्तन
  • गुरुद्वारा सीस गंज साहिब में विशेष दीवान
  • इतिहासकारों और विद्वानों द्वारा व्याख्यान
  • स्कूलों और विश्वविद्यालयों में सेमिनार

सीस गंज गुरुद्वारा वही स्थान है, जहां गुरु तेग बहादुर का बलिदान हुआ था और आज भी यह स्थल प्रतिदिन हजारों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है।


सरकार ने भी किए अनेक स्मृति कार्यक्रम

गृह मंत्रालय और सांस्कृतिक मंत्रालय समय–समय पर गुरु तेग बहादुर और अन्य सिख गुरुओं के बलिदान को राष्ट्रीय स्मृति दिवसों के माध्यम से चिह्नित करते रहे हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 2022 में गुरु तेग बहादुर के 400वें प्रकाश पर्व पर बड़े पैमाने पर कार्यक्रम आयोजित किए गए थे।

हाल के वर्षों में केंद्र सरकार ने सिख इतिहास को राष्ट्रीय पाठ्यक्रम, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और डिजिटल अभिलेखागार में भी विशेष स्थान दिया है।


सिख समुदाय ने सराहा—“सरकार हमारी विरासत को सम्मान दे रही है”

सिख समाज के कई संगठनों ने कहा है कि गुरु तेग बहादुर के योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित होते देखना गौरव की बात है।
दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधन समिति (DSGMC) के सदस्यों ने कहा कि भारत सरकार सिख विरासत को वैश्विक मंच पर स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।


भारत को मिली विरासत: त्याग, साहस और धार्मिक स्वतंत्रता

गुरु तेग बहादुर जी की शिक्षाएं शांति, विनम्रता, न्याय और मानवता के सिद्धांतों पर आधारित हैं।
उनका शहादत दिवस हमें यह याद दिलाता है कि —

  • अत्याचार के सामने सिर झुकाना विकल्प नहीं है
  • कमजोरों की रक्षा धर्म का सर्वोच्च स्वरूप है
  • सत्य के लिए संघर्ष ही सच्चा धर्म है

उनका संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है, खासकर उस दौर में जब दुनिया धार्मिक पहचान और असहिष्णुता की चुनौतियों से जूझ रही है।


अंत में…

गृह मंत्री अमित शाह सहित देश के अनेक नेताओं, संतों, गुरुद्वारा समितियों और नागरिकों ने गुरु तेग बहादुर जी को नमन कर उनके अमर बलिदान को याद किया।

गुरु तेग बहादुर न केवल सिख समुदाय के, बल्कि पूरे भारत और विश्व मानवता के लिए एक शाश्वत प्रेरणा हैं—जो यह सिखाते हैं कि धर्म के मार्ग पर चलना कठिन हो सकता है, लेकिन सत्य और मानवता के लिए दिया गया बलिदान सदियों तक प्रकाश देता है।

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