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देशफीचर्ड

नई दिल्ली में होगा ‘यूएनटीसीसी सम्मेलन’: 32 देशों के सैन्य प्रमुख जुटेंगे, शांति अभियानों के भविष्य पर मंथन

The Hill India News
Last updated: October 12, 2025 3:39 pm
The Hill India News
Published: October 12, 2025
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नई दिल्ली, 12 अक्टूबर 2025: भारत 14 से 16 अक्टूबर तक राजधानी नई दिल्ली में ‘यूएनटीसीसी (United Nations Triangular Cooperation Conclave)’ का आयोजन करने जा रहा है। यह उच्च-स्तरीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों (UN Peacekeeping Operations) के भविष्य, उभरते सुरक्षा खतरों और तकनीकी नवाचारों की भूमिका पर केंद्रित होगा।

Contents
क्या है यूएनटीसीसी (UNTCC)?सम्मेलन का उद्देश्य: उभरते खतरों पर साझा रणनीतिभारत की भूमिका: वैश्विक शांति में अग्रणी योगदान‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ — भारत की विदेश नीति का मूल दर्शनचीन और पाकिस्तान को नहीं मिला न्योता32 देशों की भागीदारी से बनेगा वैश्विक मंचअंतिम दिन होगा ‘दिल्ली डिक्लेरेशन’

भारत, जो संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में सबसे बड़े योगदानकर्ताओं में से एक है, इस वैश्विक मंच की मेजबानी कर रहा है। सम्मेलन में 32 देशों के प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे, जिनमें 15 देशों के आर्मी चीफ, 17 देशों के वाइस चीफ और कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारी शामिल होंगे।

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह सम्मेलन भारत की वैश्विक शांति, स्थिरता और सहयोग के प्रति प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है और ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ (संपूर्ण विश्व एक परिवार) के भारतीय दर्शन को मूर्त रूप देता है।


क्या है यूएनटीसीसी (UNTCC)?

यूएनटीसीसी एक ऐसा वैश्विक मंच है जहाँ संयुक्त राष्ट्र के सैन्य योगदानकर्ता देश (Troop Contributing Countries – TCCs) एक साथ आकर शांति अभियानों के सामने आने वाली ऑपरेशनल चुनौतियों, उभरते खतरों, ट्रेनिंग और टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल, तथा समावेशी निर्णय-प्रक्रिया पर विचार-विमर्श करते हैं।

यह सम्मेलन उन देशों को एक साझा मंच प्रदान करता है जो संयुक्त राष्ट्र के झंडे तले दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में शांति बनाए रखने के लिए अपने सैनिक भेजते हैं। भारत इस प्रक्रिया का एक प्रमुख भागीदार रहा है और अब तक दो लाख से अधिक भारतीय सैनिक यूएन मिशनों में सेवाएं दे चुके हैं।


सम्मेलन का उद्देश्य: उभरते खतरों पर साझा रणनीति

तीन दिनों तक चलने वाले इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य है —

“उभरते वैश्विक खतरों पर विचार-विमर्श करना और भविष्य की शांति स्थापना रणनीति के लिए एक साझा दृष्टिकोण विकसित करना।”

सम्मेलन को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, और थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी संबोधित करेंगे।
इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र के वरिष्ठ अधिकारी और अन्य शांति मिशनों में शामिल देशों के प्रतिनिधि भी अपने अनुभव साझा करेंगे।

सेमिनार सत्रों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), साइबर सुरक्षा, डिजिटल निगरानी तकनीक, और शांतिवार्ता के दौरान नागरिक सुरक्षा जैसे अहम मुद्दों पर गहन चर्चा होगी।


भारत की भूमिका: वैश्विक शांति में अग्रणी योगदान

भारत 1948 से ही संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में सक्रिय भागीदारी निभाता आ रहा है।
भारतीय सेना के सैनिकों ने कांगो, दक्षिण सूडान, लेबनान, सोमालिया और हैती जैसे संघर्षग्रस्त क्षेत्रों में सेवा दी है।

भारत न केवल सैनिकों की संख्या के लिहाज़ से अग्रणी है, बल्कि महिला शांति रक्षकों की तैनाती में भी उसने नई मिसाल कायम की है।
2024 में भारत ने अफ्रीका में पहली पूरी महिला शांति रक्षक इकाई भेजकर इतिहास रचा था।

यूएनटीसीसी सम्मेलन के माध्यम से भारत यह संदेश देना चाहता है कि वह न केवल शांति अभियानों का हिस्सा है, बल्कि उनके भविष्य की दिशा तय करने वाला विचार-नेता (Thought Leader) भी है।


‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ — भारत की विदेश नीति का मूल दर्शन

सम्मेलन की थीम भारत की प्राचीन अवधारणा ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ पर आधारित है — यानी पूरा विश्व एक परिवार है।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह विचार आज के जटिल वैश्विक माहौल में पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक है।

भारत का मानना है कि शांति अभियानों की सफलता केवल सैनिक शक्ति पर नहीं, बल्कि साझेदारी, संवाद और मानवता-आधारित दृष्टिकोण पर निर्भर करती है।


चीन और पाकिस्तान को नहीं मिला न्योता

सूत्रों के अनुसार, इस सम्मेलन में चीन और पाकिस्तान को आमंत्रित नहीं किया गया है।
हालांकि, नेपाल, बांग्लादेश, भूटान और श्रीलंका सहित सभी अन्य पड़ोसी देशों ने अपनी भागीदारी की पुष्टि की है।

राजनयिक सूत्रों का कहना है कि भारत का यह निर्णय रणनीतिक दृष्टि से लिया गया है, क्योंकि हाल के वर्षों में भारत-चीन सीमा तनाव और पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के मुद्दे पर सहयोग की संभावनाएँ सीमित रही हैं।


32 देशों की भागीदारी से बनेगा वैश्विक मंच

इस सम्मेलन में भाग लेने वाले देशों में शामिल हैं —
अल्जीरिया, आर्मेनिया, ऑस्ट्रेलिया, बांग्लादेश, भूटान, ब्राजील, बुरुंडी, कंबोडिया, मिस्र, इथियोपिया, फिजी, फ्रांस, घाना, इटली, कजाखिस्तान, केन्या, किर्गिजस्तान, मेडागास्कर, मलेशिया, मंगोलिया, मोरक्को, नेपाल, नाइजीरिया, पोलैंड, रवांडा, श्रीलंका, सेनेगल, तंजानिया, थाईलैंड, युगांडा, उरुग्वे और वियतनाम।

इन देशों की भागीदारी से सम्मेलन एक संतुलित बहु-क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व वाला मंच बन गया है, जहाँ अफ्रीका, एशिया, यूरोप और लैटिन अमेरिका — चारों महाद्वीपों की आवाज़ शामिल होगी।


अंतिम दिन होगा ‘दिल्ली डिक्लेरेशन’

सूत्रों के अनुसार, सम्मेलन के समापन दिवस पर एक ‘दिल्ली डिक्लेरेशन’ जारी किया जाएगा, जिसमें सदस्य देश शांति अभियानों में पारदर्शिता, समन्वय और तकनीकी सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताएँगे।

यह डिक्लेरेशन आने वाले वर्षों में यूएन शांति अभियानों के आधुनिकीकरण की दिशा तय करने में अहम दस्तावेज़ साबित हो सकता है।

नई दिल्ली में होने वाला यह यूएनटीसीसी सम्मेलन भारत की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय भूमिका का प्रमाण है।
एक ओर यह भारत की राजनयिक सक्रियता और वैश्विक नेतृत्व को रेखांकित करता है, वहीं दूसरी ओर यह बताता है कि भारत अब केवल शांति मिशनों में योगदान देने वाला देश नहीं, बल्कि वैश्विक सुरक्षा-चिंतन का नेतृत्वकर्ता बन चुका है।

‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना के साथ भारत यह संदेश दे रहा है कि 21वीं सदी की दुनिया में शांति केवल युद्ध की अनुपस्थिति नहीं, बल्कि साझेदारी, समानता और सहयोग की उपस्थिति है।

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