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पाकिस्तान में आज़ादी का जश्न बना मातम, अंधाधुंध फायरिंग में 3 की मौत, 60 से अधिक घायल

कराची समेत कई शहरों में जश्न के बीच गोलियों की तड़तड़ाहट, अस्पतालों में अफरा-तफरी

इस्लामाबाद/कराची (एजेंसियां) — पाकिस्तान में स्वतंत्रता दिवस (14 अगस्त) का जश्न मनाने के दौरान खुशियों का माहौल अचानक मातम में बदल गया, जब कराची समेत कई इलाकों में अंधाधुंध फायरिंग की घटनाएं हुईं। देर रात तक चली इन घटनाओं में कम से कम 3 लोगों की मौत हो गई, जबकि 60 से अधिक लोग घायल हुए हैं। कई घायलों की हालत नाज़ुक बताई जा रही है।


खुशियों के बीच गूंजने लगी गोलियां

स्वतंत्रता दिवस की रात पाकिस्तान के कई शहरों में लोग आतिशबाज़ी और फायरिंग कर जश्न मना रहे थे। कराची के लियाकताबाद, ओरंगी टाउन, गुलशन-ए-इकबाल और क्लिफटन जैसे इलाकों में अचानक गोलियों की बौछार शुरू हो गई।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, यह फायरिंग “हवाओं में गोलियां चलाकर जश्न मनाने” की परंपरा का हिस्सा थी, लेकिन इस बार यह लापरवाही कई जिंदगियों पर भारी पड़ गई।


अस्पतालों में अफरा-तफरी

घटना के बाद जिन्ना पोस्टग्रेजुएट मेडिकल सेंटर, सिविल हॉस्पिटल और अन्य चिकित्सा केंद्रों में घायलों को लाया गया। डॉक्टरों ने बताया कि कई लोग स्ट्रे बुलेट्स (भटकी हुई गोलियां) का शिकार हुए, जिनमें बच्चे और महिलाएं भी शामिल हैं।
अस्पताल प्रशासन के अनुसार, कुछ घायलों के सिर और सीने में गोली लगने के कारण उनकी स्थिति गंभीर है।


पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई

कराची पुलिस ने पुष्टि की कि स्वतंत्रता दिवस के मौके पर हवाई फायरिंग के चलते ही ज्यादातर लोग घायल हुए। पुलिस ने कई इलाकों में छापेमारी कर दर्जनों संदिग्धों को हिरासत में लिया है और अवैध हथियार बरामद किए हैं।
कराची के पुलिस प्रमुख ने कहा —

“हम बार-बार लोगों से अपील करते हैं कि हवाई फायरिंग न करें। यह खतरनाक और गैर-कानूनी है, लेकिन दुर्भाग्य से इस बार भी कई लोगों ने चेतावनियों को नज़रअंदाज़ किया।”


सोशल मीडिया पर आलोचना और गुस्सा

घटना की खबर फैलते ही सोशल मीडिया पर पाकिस्तानियों ने जमकर नाराज़गी जताई। ट्विटर (X) और फेसबुक पर #BanAerialFiring ट्रेंड करने लगा। लोगों ने कहा कि यह ‘जश्न’ नहीं बल्कि ‘खुदकुशी’ जैसा है, जो मासूम लोगों की जान ले रहा है।


परंपरा बन चुकी है जानलेवा आदत

पाकिस्तान के कई हिस्सों में त्योहारों, खेलों की जीत और राष्ट्रीय आयोजनों के समय हवाई फायरिंग करना आम बात है। हर साल ऐसी घटनाओं में कई लोगों की मौत होती है, लेकिन इस बार का हादसा पैमाने और पीड़ितों की संख्या के लिहाज से ज्यादा गंभीर है।
मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने सरकार से इस पर सख्त कानून लागू करने और दोषियों को कठोर सज़ा देने की मांग की है।


पीड़ित परिवारों का दर्द

मारे गए एक युवक के परिजन ने रोते हुए कहा —

“हम अपने बेटे को झंडा फहराने के बाद घर आने का इंतज़ार कर रहे थे, लेकिन हमें उसकी लाश मिली। यह कोई जश्न नहीं, यह तो बर्बरता है।”


सरकार की अपील और वादा

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने घटना पर शोक जताते हुए कहा कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने पुलिस और प्रशासन को सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए और पीड़ित परिवारों को आर्थिक मदद का आश्वासन दिया।

14 अगस्त को पाकिस्तान में आज़ादी का जश्न मनाने के लिए लोग सड़कों पर उतरे थे, लेकिन लापरवाह और खतरनाक हवाई फायरिंग ने इन जश्नों को खून में रंग दिया। यह घटना न सिर्फ कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाती है, बल्कि समाज में रची-बसी खतरनाक ‘जश्न मनाने की संस्कृति’ पर भी गहरी चोट करती है। जब तक यह सोच नहीं बदलेगी, हर साल ऐसे जश्न मासूम जिंदगियां निगलते रहेंगे।

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