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UP: योगी सरकार का बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, 9 IAS अधिकारियों की जिम्मेदारी बदली

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में प्रशासनिक स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत करने और शासन के लक्ष्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए योगी सरकार ने एक बार फिर बड़ा फेरबदल किया है। शासन द्वारा जारी ताजा आदेश के अनुसार, भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के 9 वरिष्ठ अधिकारियों के कार्यक्षेत्र में बदलाव किया गया है। इस फेरबदल की सबसे खास बात यह है कि कई वरिष्ठ अधिकारियों को उनके वर्तमान पदों के साथ-साथ महत्वपूर्ण विभागों का ‘अतिरिक्त प्रभार’ सौंपा गया है, ताकि अनुभव और दक्षता का अधिकतम लाभ उठाया जा सके।

महत्वपूर्ण पदों पर अतिरिक्त प्रभार का दांव

उत्तर प्रदेश सरकार के कार्मिक एवं नियुक्ति विभाग द्वारा जारी सूची के अनुसार, प्रशासनिक कार्यकुशलता को बढ़ाने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों को दोहरी जिम्मेदारियां दी गई हैं।

एस.एम. देवराज (M. Devaraj), जो वर्तमान में नियुक्ति एवं कार्मिक विभाग जैसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण विभाग में प्रमुख सचिव के पद पर तैनात हैं, उन्हें अब उत्तर प्रदेश प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी (UPAM) के महानिदेशक का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है। देवराज की छवि एक सख्त और अनुशासित अधिकारी की रही है, ऐसे में अकादमी की कमान मिलने से प्रशासनिक प्रशिक्षण में नए सुधारों की उम्मीद की जा रही है।

आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग में बड़ा बदलाव

राज्य के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूती देने के लिए आलोक कुमार-III को बड़ी जिम्मेदारी दी गई है। वर्तमान में नियोजन तथा कार्यक्रम कार्यान्वयन विभाग के प्रमुख सचिव और उत्तर प्रदेश के ‘वन ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी’ तथा ‘जीरो पावर्टी’ मिशन के नोडल अधिकारी आलोक कुमार-III को अब आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग का अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि नियोजन (Planning) और आईटी (IT) विभाग के एक ही वरिष्ठ अधिकारी के पास होने से प्रदेश की डिजिटल और आर्थिक नीतियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो सकेगा।

प्रमुख सचिवों की नई तैनाती और फेरबदल

प्रशासनिक फेरबदल की इस कड़ी में अनुराग यादव को बड़ी जिम्मेदारी मिली है। वर्तमान में आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग देख रहे अनुराग यादव को अब समाज कल्याण एवं सैनिक कल्याण विभाग का प्रमुख सचिव नियुक्त किया गया है। समाज कल्याण विभाग राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं की रीढ़ माना जाता है, ऐसे में अनुराग यादव का अनुभव यहां महत्वपूर्ण साबित होगा।

वहीं, ग्राम्य विकास के क्षेत्र में भी बड़े बदलाव किए गए हैं। प्रमुख सचिव, ग्राम्य विकास एवं ग्रामीण अभियंत्रण सेवा सौरभ बाबू को उनके वर्तमान पद के साथ-साथ महानिदेशक, दीनदयाल उपाध्याय राज्य ग्राम्य विकास संस्थान का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। इससे ग्रामीण विकास से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रशिक्षण कार्यक्रमों में तेजी आने की संभावना है।

परिवहन और निकाय स्तर पर बदलाव

शासन ने निगमों और निकायों में भी नए अधिकारियों को कमान सौंपी है:

  • डॉ. बिपिन कुमार मिश्रा: शाहजहांपुर के नगर आयुक्त रहे डॉ. बिपिन कुमार मिश्रा को अब उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (UPSRTC) में अपर प्रबंध निदेशक (Additional MD) के पद पर तैनात किया गया है। परिवहन निगम की सेवाओं में सुधार और राजस्व बढ़ाने की चुनौती अब उनके कंधों पर होगी।

  • सौम्या गुरूरानी: प्रतीक्षारत चल रही सौम्या गुरूरानी को नगर आयुक्त, नगर निगम शाहजहांपुर बनाया गया है।

  • हिमांशु कौशिक: लंबे समय से प्रतीक्षारत हिमांशु कौशिक को प्रबंध निदेशक, यू.पी. इलेक्ट्रॉनिक्स कारपोरेशन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है।

मध्य-स्तरीय नौकरशाही में भी सक्रियता

स्वास्थ्य और कृषि विभाग में भी नई नियुक्तियां हुई हैं। रवि रंजन, जो अब तक यू.पी. इलेक्ट्रॉनिक्स कारपोरेशन और यू.पी. एग्रो के प्रबंध निदेशक के रूप में कार्य कर रहे थे, उन्हें विशेष सचिव, चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग बनाया गया है। प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण के लिए उन्हें फील्ड से मुख्यालय लाया गया है।

वहीं, टी.के. शिबु, जो वर्तमान में कृषि उत्पादन आयुक्त शाखा (APC) में विशेष सचिव हैं, उन्हें प्रबंध निदेशक, यू.पी. एग्रो का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।

मिशन ‘वन ट्रिलियन इकॉनमी’ पर फोकस

यूपी में आईएएस अधिकारियों का तबादला केवल एक नियमित प्रक्रिया नहीं है, बल्कि इसके पीछे राज्य के आर्थिक लक्ष्यों को प्राप्त करने की एक सोची-समझी रणनीति दिखती है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का जो लक्ष्य रखा है, उसके लिए विभागों के बीच ‘सिनर्जी’ (तालमेल) होना अनिवार्य है। आलोक कुमार-III को आईटी विभाग सौंपना इसी दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है, क्योंकि तकनीक के बिना आर्थिक विकास की गति को तेज करना संभव नहीं है।

प्रशासनिक दक्षता और जवाबदेही

यह ताजा फेरबदल यह संकेत देता है कि सरकार उन अधिकारियों पर भरोसा जता रही है जो पहले से ही महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स को सफलतापूर्वक संभाल रहे हैं। अतिरिक्त प्रभार देकर सरकार ने संसाधनों के अनुकूलतम उपयोग का प्रयास किया है। अब देखना यह होगा कि नई जिम्मेदारियों के साथ ये अधिकारी सरकार की फ्लैगशिप योजनाओं को धरातल पर कितनी जल्दी और प्रभावी ढंग से उतार पाते हैं।

आगामी समय में कुछ अन्य विभागों और जिलाधिकारियों (DM) के स्तर पर भी बदलाव की चर्चाएं गलियारों में तेज हैं, जिससे यह स्पष्ट है कि 2027 की तैयारियों और विकास कार्यों की समीक्षा के आधार पर ही नौकरशाही की बिसात बिछाई जा रही है।

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