कोलकाता। पश्चिम बंगाल की सियासत में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच चल रही जुबानी जंग अब अदालत की चौखट तक पहुंच गई है। राज्य के कद्दावर भाजपा नेता और नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ शुक्रवार को एक बड़ा कानूनी कदम उठाते हुए 100 करोड़ रुपये के हर्जाने का मानहानि मुकदमा (Defamation Suit) दायर किया है। यह कानूनी कार्रवाई ममता बनर्जी द्वारा कथित तौर पर शुभेंदु अधिकारी को ‘कोयला घोटाले’ से जोड़ने वाले बयानों के विरोध में की गई है।
चुप्पी के बाद अदालत का रुख
शुभेंदु अधिकारी ने यह मुकदमा कोलकाता की अलीपुर अदालत (सिविल जज, सीनियर डिवीजन) में दाखिल किया है। शुभेंदु का आरोप है कि उन्होंने पहले मुख्यमंत्री को इस मामले में कानूनी नोटिस भेजकर स्पष्टीकरण मांगा था, लेकिन उनकी ओर से कोई संतोषजनक जवाब या माफीनामा नहीं आया। अधिकारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर इस कानूनी दस्तावेज़ की तस्वीर साझा करते हुए मुख्यमंत्री पर तीखा हमला बोला।
‘मैं अपने वचनों का सम्मान करता हूं’ – शुभेंदु का वार
शुभेंदु अधिकारी ने अपने पोस्ट में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को सीधे संबोधित करते हुए लिखा:
“ममता बनर्जी, मैं अपने वचनों का सम्मान करता हूं, जबकि आप मुद्दों और लोगों को भ्रमित करने का काम करती हैं। कथित कोयला घोटाले में मेरी संलिप्तता को लेकर आपके घृणित और मनगढ़ंत आरोपों के संबंध में भेजे गए मानहानि नोटिस पर आपकी भ्रामक चुप्पी आपको इस स्थिति से उबरने में मदद नहीं करेगी।”
अधिकारी ने आगे कड़े शब्दों में कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री को अदालत तक घसीटने का अपना वादा निभाया है और उनकी “धोखेबाज साजिश” का जवाब अब न्यायपालिका के माध्यम से दिया जाएगा।
क्या है विवाद की जड़?
विवाद का मुख्य केंद्र वह ‘कोयला घोटाला’ है जिसकी जांच वर्तमान में केंद्रीय एजेंसियां (CBI और ED) कर रही हैं। बीते कुछ समय से तृणमूल कांग्रेस (TMC) और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपनी जनसभाओं में शुभेंदु अधिकारी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाती रही हैं कि वे केंद्रीय एजेंसियों के डर से भाजपा में शामिल हुए हैं और कोयला घोटाले में उनकी भूमिका संदिग्ध है।
शुभेंदु अधिकारी का तर्क है कि ये आरोप पूरी तरह निराधार हैं और उनकी राजनीतिक छवि को धूमिल करने के उद्देश्य से लगाए गए हैं। इसी के प्रत्युत्तर में उन्होंने 100 करोड़ रुपये की मानहानि का दावा ठोक दिया है।
बंगाल की राजनीति में नया कानूनी मोर्चा
यह पहली बार नहीं है जब बंगाल के ये दो शीर्ष नेता आमने-सामने हैं, लेकिन 100 करोड़ रुपये का मानहानि का दावा इस सियासी लड़ाई को एक नए स्तर पर ले गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शुभेंदु अधिकारी इस मुकदमे के जरिए दो संदेश देना चाहते हैं:
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छवि की रक्षा: वे जनता को यह दिखाना चाहते हैं कि वे किसी भी घोटाले में संलिप्त नहीं हैं और वे कानूनी लड़ाई के लिए तैयार हैं।
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आक्रामक विपक्ष: भाजपा बंगाल में बैकफुट पर रहने के बजाय अब मुख्यमंत्री पर सीधे कानूनी प्रहार करने की रणनीति अपना रही है।
TMC की संभावित प्रतिक्रिया
अभी तक तृणमूल कांग्रेस या मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से इस मुकदमे पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। हालांकि, TMC के वरिष्ठ नेताओं का रुख अक्सर यह रहा है कि वे भाजपा के कानूनी दावों को “राजनीतिक नौटंकी” करार देते हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में मुख्यमंत्री के कानूनी सलाहकार इस मुकदमे का जवाब देने के लिए अदालत में अपनी दलीलें पेश करेंगे।
अदालती कार्यवाही पर सबकी नजर
अलीपुर कोर्ट में दायर इस मुकदमे के बाद अब सबकी निगाहें सुनवाई की अगली तारीख पर टिकी हैं। यदि यह मामला आगे बढ़ता है, तो मुख्यमंत्री को अदालत में अपना पक्ष रखना पड़ सकता है, जो बंगाल की राजनीति में एक दुर्लभ और प्रभावकारी घटना होगी।



