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रेमंड को शिखर पर पहुँचाने वाले विजयपत सिंघानिया का निधन, आसमान नापने से लेकर व्यापार तक बनाए कई कीर्तिमान

मुंबई/नई दिल्ली। भारतीय कॉर्पोरेट जगत के एक युग का अंत हो गया है। देश के सबसे प्रतिष्ठित लाइफस्टाइल और फैब्रिक ब्रांड ‘रेमंड’ (Raymond) को घर-घर तक पहुँचाने वाले दिग्गज उद्योगपति और पूर्व चेयरमैन विजयपत सिंघानिया का निधन शनिवार देर रात मुंबई में हो गया। 87 वर्षीय सिंघानिया पिछले कुछ समय से उम्र संबंधी बीमारियों से जूझ रहे थे। उनके निधन की पुष्टि उनके बेटे और रेमंड के मौजूदा चेयरमैन गौतम सिंघानिया ने सोशल मीडिया के माध्यम से की।

गौतम सिंघानिया ने भावुक पोस्ट साझा करते हुए लिखा, गहरे दुख और भारी मन से, हम पद्म भूषण डॉ. विजयपत कैलाशपत सिंघानिया के निधन की सूचना दे रहे हैं। इस खबर के बाद व्यापार जगत और उद्योग मंडलों में शोक की लहर दौड़ गई है।

चंदनवाड़ी श्मशान घाट पर होगा अंतिम संस्कार

रेमंड ग्रुप के आधिकारिक प्रवक्ता द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, विजयपत सिंघानिया ने मुंबई स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली। उनका अंतिम संस्कार रविवार को दक्षिण मुंबई के चंदनवाड़ी श्मशान घाट पर किया जाएगा। परिवार की ओर से जारी सूचना में कहा गया है कि अंतिम दर्शन के लिए परिजन और शुभचिंतक रविवार दोपहर 1:30 बजे ‘हवेली’ (एल.डी. रूपारेल मार्ग) पर एकत्रित होंगे।

12 हजार करोड़ का साम्राज्य और विरासत की कहानी

मीडिया रिपोर्ट्स और व्यापारिक विश्लेषकों के अनुसार, विजयपत सिंघानिया अपने पीछे करीब 12,000 करोड़ रुपये की विशाल संपत्ति और एक अटूट व्यावसायिक विरासत छोड़ गए हैं। हालांकि, उनके जीवन का उत्तरार्ध पारिवारिक विवादों के कारण भी चर्चा में रहा। साल 2015 में उन्होंने कंपनी की अपनी 37 फीसदी हिस्सेदारी अपने बेटे गौतम सिंघानिया को सौंप दी थी। उनके नेतृत्व में ही रेमंड एक छोटे ब्रांड से निकलकर दुनिया के सबसे बड़े सूट फैब्रिक निर्माताओं में से एक बना।

रेमंड को ‘द कंप्लीट मैन’ बनाने का सफर

विजयपत सिंघानिया ने साल 1980 में रेमंड ग्रुप की कमान संभाली थी और साल 2000 तक इसके चेयरमैन व मैनेजिंग डायरेक्टर रहे। यह उनके दूरदर्शी नेतृत्व का ही परिणाम था कि रेमंड केवल ऊनी कपड़ों और सूट के टुकड़ों तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने कंपनी का विस्तार सिंथेटिक फैब्रिक, डेनिम, स्टील, इंडस्ट्रियल फाइल्स और सीमेंट जैसे विविध क्षेत्रों में किया।

उन्होंने विज्ञापनों की दुनिया में ‘द कंप्लीट मैन’ (The Complete Man) की टैगलाइन के साथ एक ऐसी भावनात्मक पहचान बनाई, जिसने भारतीय पुरुषों के फैशन के प्रति नजरिए को बदल कर रख दिया। आज भारत में रेमंड को केवल एक ब्रांड नहीं, बल्कि एक स्तर (Status) के रूप में देखा जाता है।

आसमान के खिलाड़ी: हॉट एयर बैलून से बनाया था विश्व रिकॉर्ड

विजयपत सिंघानिया केवल बोर्डरूम के ही राजा नहीं थे, बल्कि उन्हें रोमांचक कारनामों का भी जुनून था। एविएशन (विमानन) के क्षेत्र में उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता:

  1. विश्व रिकॉर्ड: नवंबर 2005 में, 67 वर्ष की परिपक्व उम्र में उन्होंने हॉट एयर बैलून के जरिए लगभग 69,000 फीट की ऊंचाई तक उड़ान भरकर एक ऐतिहासिक विश्व रिकॉर्ड कायम किया था।

  2. वायुसेना का सम्मान: उनकी विशेषज्ञता और जुनून को देखते हुए भारतीय वायुसेना ने उन्हें 1994 में ‘ऑनरेरी एयर कमोडोर’ की उपाधि से सम्मानित किया था।

  3. राष्ट्रीय पुरस्कार: साहसिक कार्यों के लिए उन्हें प्रतिष्ठित ‘तेजिंग नोर्गे नेशनल एडवेंचर अवॉर्ड’ से भी नवाजा गया।

पद्म भूषण से हुए सम्मानित

देश के विकास और उद्योग जगत में उनके अभूतपूर्व योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें ‘पद्म भूषण’ जैसे उच्च नागरिक सम्मान से अलंकृत किया था। वे केवल एक उद्योगपति नहीं थे, बल्कि एक लेखक और सामाजिक कार्यकर्ता के तौर पर भी सक्रिय रहे।

आज विजयपत सिंघानिया का निधन न केवल सिंघानिया परिवार के लिए, बल्कि उन लाखों लोगों के लिए एक व्यक्तिगत क्षति है जो उन्हें अपना प्रेरणास्रोत मानते थे। उनके जाने से भारतीय उद्योग जगत ने एक ऐसा व्यक्तित्व खो दिया है जिसने जमीन पर साम्राज्य खड़ा किया और आसमान में अपनी जीत के झंडे गाड़े।

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