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उत्तराखंड: चमोली में फर्जी हॉलमार्क के जरिए असली सोना डकार कर थमा दी नकली ज्वेलरी, दो गिरफ्तार

चमोली (उत्तराखंड)। देवभूमि के शांत पर्वतीय अंचलों में विश्वास की आड़ में ठगी का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने स्वर्ण व्यवसाय की शुचिता और हॉलमार्किंग की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उत्तराखंड के चमोली जिले की पुलिस ने एक ऐसे शातिर गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जो कम कैरेट की या नकली ज्वेलरी पर बिना लाइसेंस वाली मशीन से फर्जी ‘हॉलमार्क’ लगाकर लोगों को असली बताकर ठग रहा था। पुलिस ने इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है और उनके पास से अवैध हॉलमार्क मशीन भी बरामद की है।

विश्वास की आड़ में ‘पीली धातु’ का काला खेल

मामले का खुलासा तब हुआ जब ज्योतिर्मठ (जोशीमठ) के थैंग गांव की निवासी लवली रावत ने पुलिस में लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के अनुसार, महिला ने अपनी आर्थिक जरूरतों के चलते जुलाई 2025 में अपनी सोने की नथ और झुमके (कीमत लगभग 40 हजार रुपये) अपर बाजार स्थित ‘आदय ज्वेलर्स’ के संचालक बंटी कुमार के पास गिरवी रखे थे। महिला समय पर ब्याज चुकाती रही और नवंबर 2025 में मूलधन वापस कर दिसंबर में अपनी ज्वेलरी छुड़ा ली।

ठगी का अहसास महिला को तब हुआ जब उसने उन आभूषणों को पहना। आसपास के लोगों ने ज्वेलरी की चमक और गुणवत्ता पर संदेह जताया। जब महिला ने बाजार के अन्य जौहरियों को अपनी नथ और झुमके दिखाए, तो उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। जांच में पता चला कि वे आभूषण पूरी तरह नकली थे, लेकिन उन पर बड़ी चालाकी से ‘हॉलमार्क’ की मुहर लगाई गई थी ताकि वह असली प्रतीत हों।

चमोली पुलिस की त्वरित कार्रवाई: विशेष टीम का गठन

मामले की संवेदनशीलता और स्वर्ण व्यवसाय से जुड़े भरोसे को देखते हुए चमोली पुलिस अधीक्षक (SP) सुरजीत सिंह पंवार ने तत्काल विशेष जांच टीम गठित करने के निर्देश दिए। पुलिस उपाधीक्षक मदन सिंह बिष्ट और कर्णप्रयाग के पुलिस उपाधीक्षक त्रिवेंद्र सिंह राणा के नेतृत्व में टीम ने जांच शुरू की।

अपर उपनिरीक्षक भूपेंद्र सिंह ने पीड़िता से पूछताछ कर नकली आभूषणों को साक्ष्य के तौर पर कब्जे में लिया और मुख्य आरोपी बंटी कुमार को हिरासत में लिया। कड़ी पूछताछ के बाद बंटी ने अपना जुर्म कबूल कर लिया। उसने बताया कि उसने महिला के असली सोने के आभूषणों को खुद रख लिया और उसके बदले उसी डिजाइन की नकली ज्वेलरी तैयार करवाई, जिस पर फर्जी हॉलमार्क लगवाया गया था।

कर्णप्रयाग से जुड़ा ‘फर्जीवाड़ा’ का तार

आरोपी बंटी कुमार के खुलासे ने पुलिस को ठगी के एक बड़े नेटवर्क तक पहुँचा दिया। बंटी ने बताया कि इस पूरे खेल में कर्णप्रयाग निवासी पंकज कुमार प्रभु उसका मुख्य सहयोगी था। पंकज के पास बिना लाइसेंस वाली एक अवैध हॉलमार्क मशीन थी। वह कम कैरेट की ज्वेलरी पर फर्जी तरीके से ’20 कैरेट’ या उससे अधिक की मुहर लगाकर उसे प्रमाणित (Certified) ज्वेलरी की तरह पेश करता था।

पुलिस ने तत्काल कर्णप्रयाग बाजार में छापेमारी कर पंकज कुमार प्रभु को गिरफ्तार कर लिया। मौके से हॉलमार्क लगाने वाली आधुनिक मशीन और अन्य उपकरण बरामद किए गए हैं।

सख्त धाराओं में मुकदमा दर्ज

पुलिस ने बताया कि इस मामले में आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4) (जालसाजी), 338 (आपराधिक न्यास भंग) और भारतीय मानक ब्यूरो अधिनियम 2016 की धारा 29 के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस गिरोह ने अब तक और कितने लोगों को अपना शिकार बनाया है।

क्या बोले चमोली एसपी?

घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए एसपी सुरजीत सिंह पंवार ने कहा, “उत्तराखंड में स्वर्ण व्यवसाय पारंपरिक रूप से विश्वसनीयता का प्रतीक रहा है। इस तरह की घटनाओं से पूरे व्यवसाय की छवि धूमिल होती है। हॉलमार्किंग की प्रक्रिया केवल भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के अधिकृत केंद्रों के माध्यम से ही होनी चाहिए। फर्जी मशीन का उपयोग कर हॉलमार्क की कूटरचना करना एक गंभीर अपराध है। हम इस मामले की विस्तृत जांच कर रहे हैं ताकि भविष्य में ऐसी पुनरावृत्ति न हो।”

ग्राहकों के लिए सतर्कता है जरूरी

इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि केवल ‘हॉलमार्क’ का निशान देखकर ही ज्वेलरी पर आंख मूंदकर भरोसा न करें। विशेषज्ञों का कहना है कि:

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