
देहरादून | न्यूज़ डेस्क उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था ने बीते कुछ वर्षों में विकास के नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। गुरुवार को सचिवालय स्थित मीडिया सेंटर में प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुन्दरम द्वारा प्रस्तुत उत्तराखंड आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 की रिपोर्ट राज्य की प्रगति की एक सुनहरी तस्वीर पेश करती है। रिपोर्ट के अनुसार, राज्य का सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) वर्ष 2021-22 के मुकाबले डेढ़ गुना से ज्यादा बढ़ गया है, जो राज्य की मजबूत आर्थिक नीतियों का प्रमाण है।
अर्थव्यवस्था का बढ़ता आकार: GSDP और विकास दर
प्रमुख सचिव ने बताया कि वर्ष 2024-25 में राज्य की GSDP ₹3,81,889 करोड़ रही है। यदि इसकी तुलना वर्ष 2021-22 (₹2.54 लाख करोड़) से की जाए, तो इसमें अभूतपूर्व उछाल दर्ज किया गया है। वर्तमान वित्तीय वर्ष में राज्य की ग्रोथ रेट 7.23 प्रतिशत रही है, जबकि सरकार का लक्ष्य इसे और अधिक गति देना है। भविष्य की संभावनाओं को देखते हुए, वर्ष 2026-27 के लिए GSDP का अनुमान 8.2 प्रतिशत रखा गया है।
आम आदमी की आय में वृद्धि और गरीबी में कमी
आर्थिक सर्वेक्षण के सबसे उत्साहजनक आंकड़े प्रति व्यक्ति आय और गरीबी उन्मूलन से जुड़े हैं:
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प्रति व्यक्ति आय: वर्ष 2021-22 में राज्य में प्रति व्यक्ति आय ₹1,94,670 थी, जो अब बढ़कर ₹2,73,921 हो गई है।
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MP Index (गरीबी): मल्टी डायमेंशनल पॉवर्टी इंडेक्स में भी सुधार हुआ है। गरीबी की दर 9.7% से घटकर अब 6.92% रह गई है।
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SDG इंडेक्स: सतत विकास लक्ष्यों (SDG) में उत्तराखंड ने लंबी छलांग लगाई है। 2021-22 में चौथे स्थान पर रहने वाला राज्य, 2023-24 में देश में प्रथम स्थान पर पहुंच गया है।
इंडस्ट्रियल बूम: स्टार्टअप्स और MSME का जाल
राज्य में स्वरोजगार और उद्योगों को बढ़ावा देने के सरकारी प्रयासों के नतीजे अब धरातल पर दिखने लगे हैं।
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स्टार्टअप क्रांति: वर्ष 2017 तक राज्य में स्टार्टअप्स की संख्या ‘शून्य’ थी। 2021-22 में यह 702 हुई और वर्ष 2025 में यह आंकड़ा 1750 के पार पहुंच गया है।
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MSME सेक्टर: सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों की संख्या 59,798 से बढ़कर 79,394 हो गई है। इन उद्योगों ने करीब 4.56 लाख लोगों को रोजगार प्रदान किया है।
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बड़ी इंडस्ट्री: बड़े उद्योगों की संख्या भी 107 से बढ़कर 128 हो गई है।
इन्फ्रास्ट्रक्चर और शिक्षा: बदलती तस्वीर
सड़क कनेक्टिविटी और हवाई सेवाओं के विस्तार ने पर्यटन और व्यापार को नई ऊर्जा दी है।
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सड़कें: सड़कों की कुल लंबाई अब 51,278 किमी हो गई है।
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एयर कनेक्टिविटी: राज्य में हेलीपोर्ट की संख्या 2 से बढ़कर 7 और हेलीपैड की संख्या 60 से बढ़कर 118 हो गई है।
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शिक्षा: इंजीनियरिंग कॉलेजों की संख्या में जबरदस्त इजाफा हुआ है, जो 20 से बढ़कर 52 हो गई है। वहीं, स्कूलों में ‘ड्रॉपआउट रेट’ में भी उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है।
ऊर्जा और कृषि: आत्मनिर्भरता की ओर कदम
उत्तराखंड ने बिजली उत्पादन और कृषि उत्पादकता में भी नए मानक स्थापित किए हैं।
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विद्युत उत्पादन: 2021-22 में 5,157 मिलियन यूनिट का उत्पादन होता था, जो अब बढ़कर 16,500 मिलियन यूनिट हो गया है। विशेषकर सौर ऊर्जा के क्षेत्र में उत्पादन 439 मेगावाट से बढ़कर 1027 मेगावाट पहुंच गया है।
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खेती-किसानी: धान और गेहूं की उत्पादकता 28.23 कुंतल से बढ़कर 32.47 कुंतल प्रति हेक्टेयर हो गई है। सबसे चौंकाने वाला बदलाव सुगंधित पौधों (Aromatic Plants) के क्षेत्र में आया है, जिसका रकबा 900 हेक्टेयर से बढ़कर 10,000 हेक्टेयर हो गया है।
सामाजिक सुरक्षा और स्वास्थ्य: बेहतर हुआ जीवन स्तर
स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के चलते राज्य में शिशु मृत्यु दर (IMR) 22 से घटकर 20 और मातृ मृत्यु दर 103 से घटकर 91 पर आ गई है। लोगों की औसत जीवन प्रत्याशा (Life Expectancy) भी अब 71.7 साल से बढ़कर 73 साल हो गई है। इसके अलावा, राज्य के 100% घरों में अब शौचालय की सुविधा उपलब्ध है।
पर्यटन और होमस्टे: अर्थव्यवस्था की रीढ़
पर्यटन राज्य की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार बना हुआ है। होटलों की संख्या 10,509 तक पहुंच गई है, जबकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने वाले होमस्टे की संख्या 3,935 से बढ़कर 6,161 हो गई है।
उत्तराखंड आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 यह स्पष्ट करता है कि राज्य “ईज ऑफ डूइंग बिजनेस” के साथ-साथ सामाजिक कल्याण के पैमानों पर भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुन्दरम के अनुसार, नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च (NCAER) के साथ मिलकर तैयार की गई यह रिपोर्ट राज्य के ‘सशक्त उत्तराखंड’ के संकल्प को सिद्ध करती है।



