मसूरी/देहरादून: उत्तराखंड की ‘पहाड़ों की रानी’ मसूरी में शुक्रवार, 16 जनवरी को धार्मिक स्थलों के अतिक्रमण के मुद्दे पर जबरदस्त तनाव देखने को मिला। टिहरी बाइपास मार्ग पर स्थित बाबा बुल्ले शाह की मजार और उसके आसपास के क्षेत्र को लेकर बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने जोरदार विरोध प्रदर्शन और हंगामा किया। संगठन का दावा है कि यहां मजारों की संख्या में अवैध रूप से वृद्धि हो रही है, जबकि प्रशासन का कहना है कि यह संपत्ति निजी है।
विरोध की गूंज: “साजिश के तहत हो रहा विस्तार”
शुक्रवार सुबह बड़ी संख्या में बजरंग दल के कार्यकर्ता टिहरी बाइपास स्थित मजार परिसर के पास एकत्रित हुए। कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए आरोप लगाया कि पहले इस स्थान पर केवल एक पुरानी मजार हुआ करती थी, लेकिन पिछले कुछ समय में यहां दर्जनों छोटी-छोटी मजारें बना दी गई हैं।
बजरंग दल के नगर मंत्री अनिल परवाह ने तीखा रुख अपनाते हुए कहा, “यदि स्कूल प्रबंधन मजार के लिए अपनी भूमि दे सकता है, तो हिंदू समाज को भी वहां हनुमान मंदिर या माता के मंदिर निर्माण की अनुमति मिलनी चाहिए।” उन्होंने प्रशासन को चेतावनी दी कि यदि समय रहते अवैध विस्तार पर कार्रवाई नहीं हुई, तो संगठन खुद कड़े कदम उठाएगा, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
प्रशासन का पक्ष: 50 साल पुराना इतिहास और निजी भूमि
तनाव की सूचना मिलते ही मसूरी पुलिस, प्रशासनिक अधिकारी और नगर पालिका की टीम दलबल के साथ मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को शांत कराने के लिए तथ्यों के साथ अपनी बात रखी।
नगर पालिका कर अधीक्षक अनिरुद्ध चौधरी ने स्पष्ट किया कि यह मजार किसी सरकारी, नजूल या वन विभाग की भूमि पर नहीं है। उन्होंने कहा, “बाबा बुल्ले शाह की मजार पिछले लगभग 50 वर्षों से एक निजी संपत्ति पर स्थित है। यह भूमि एक निजी स्कूल की है और मजार का मामला स्कूल प्रबंधन की बोर्ड बैठकों में भी आता रहा है।” अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि चूंकि संपत्ति निजी है, इसलिए प्रशासन सीधे तौर पर इसे अवैध नहीं कह सकता, जब तक कि नियमों का उल्लंघन न हो।
कानून व्यवस्था: “किसी को भी हाथ में कानून लेने की अनुमति नहीं”
प्रशासन ने बजरंग दल के अल्टीमेटम पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि देवभूमि में शांति व्यवस्था भंग करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। पुलिस प्रशासन ने मौके पर अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात कर दिया है। अधिकारियों ने दो टूक शब्दों में कहा कि किसी भी संगठन को कानून अपने हाथ में लेकर किसी ढांचे को नुकसान पहुंचाने का अधिकार नहीं है। मजार से संबंधित सभी दस्तावेजों और तथ्यों की रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेजी जा रही है।
सियासी और सामाजिक गलियारों में हलचल
उत्तराखंड में ‘लैंड जिहाद’ और ‘अवैध मजारों’ को लेकर सरकार पहले से ही सख्त रुख अपनाए हुए है। हाल के महीनों में सरकार ने वन विभाग की भूमि से सैकड़ों अवैध मजारों को ध्वस्त किया है। हालांकि, मसूरी का यह मामला इसलिए पेचीदा हो गया है क्योंकि यह निजी भूमि से जुड़ा है। स्थानीय निवासियों के बीच इस मुद्दे को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। जहां एक पक्ष इसे धार्मिक आस्था का मामला बता रहा है, वहीं दूसरा पक्ष इसे बढ़ती जनसांख्यिकी और अतिक्रमण के नजरिए से देख रहा है।
प्रमुख बिंदु: एक नजर में
| विवरण | तथ्य |
| घटना स्थल | टिहरी बाइपास, मसूरी |
| मुख्य विवाद | बाबा बुल्ले शाह मजार का कथित विस्तार |
| प्रदर्शनकारी | बजरंग दल के कार्यकर्ता |
| प्रशासन का रुख | भूमि निजी है, कानून हाथ में न लें |
| सुरक्षा स्थिति | मौके पर पुलिस तैनात, स्थिति नियंत्रण में |
भविष्य की रणनीति और शासन को रिपोर्ट
मसूरी प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मजार परिसर की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी करवाई गई है। मजार की वर्तमान स्थिति और पुराने रिकॉर्ड्स का मिलान किया जाएगा ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि कोई नया अवैध निर्माण तो नहीं हुआ है। यदि निजी भूमि पर भी निर्माण मानकों के विपरीत पाया जाता है, तो नगर पालिका नियमानुसार नोटिस जारी करेगी।
मसूरी का यह विवाद राज्य में धार्मिक स्थलों को लेकर चल रही बहस को फिर से केंद्र में ले आया है। प्रशासन के लिए चुनौती यह है कि वह निजी संपत्ति के अधिकारों की रक्षा करते हुए शहर की शांति व्यवस्था को कैसे कायम रखता है। फिलहाल, प्रदर्शनकारी पीछे हट गए हैं, लेकिन प्रशासन पूरी सतर्कता बरत रहा है।



