
देहरादून | उत्तराखंड की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बीच ‘हर घर जल’ और सतत जल प्रबंधन के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए धामी सरकार ने अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। शनिवार को मुख्यमंत्री आवास में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और भारत सरकार के केंद्रीय जल शक्ति राज्य मंत्री डॉ. राज भूषण चौधरी के बीच एक महत्वपूर्ण शिष्टाचार भेंट हुई।
इस बैठक का मुख्य एजेंडा उत्तराखंड में जल संसाधन प्रबंधन, पेयजल योजनाओं की प्रगति और राज्य की विशिष्ट भौगोलिक संरचना के अनुरूप भविष्य की सिंचाई परियोजनाओं को सुदृढ़ करना रहा। दोनों नेताओं के बीच हुई इस सार्थक चर्चा को राज्य में चल रही केंद्रीय योजनाओं की गति बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
जल जीवन मिशन और पर्वतीय चुनौतियां
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बैठक के दौरान केंद्रीय मंत्री को उत्तराखंड की विशिष्ट पर्वतीय संरचना से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड देश की जीवनदायिनी नदियों का उद्गम स्थल है, लेकिन ऊँचाई वाले क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती है।
मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि “जल जीवन मिशन” के तहत राज्य सरकार हर ग्रामीण और पर्वतीय घर तक पाइप के जरिए शुद्ध जल पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि राज्य में परंपरागत जल स्रोतों (धारे, नौले) के पुनर्जीवन और उनके संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
भविष्य की योजनाओं पर मंथन: जल संरक्षण और वर्षा जल संचयन
भेंट के दौरान मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उत्तराखंड सरकार केंद्र के सहयोग से निम्नलिखित क्षेत्रों में प्राथमिकता के आधार पर कार्य कर रही है:
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वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting): पर्वतीय क्षेत्रों में पानी की कमी को दूर करने के लिए वर्षा जल का संचय अनिवार्य किया जा रहा है।
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सिंचाई परियोजनाओं का विस्तार: मैदानी और तराई क्षेत्रों के साथ-साथ पहाड़ों में छोटी सिंचाई योजनाओं (Micro Irrigation) को बढ़ावा दिया जा रहा है।
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जल स्रोतों का पुनर्जीवन: जलवायु परिवर्तन के कारण सूखते जल स्रोतों को रिचार्ज करने के लिए वैज्ञानिक पद्धति का उपयोग किया जा रहा है।
केंद्रीय मंत्री ने की उत्तराखंड के प्रयासों की सराहना
केंद्रीय जल शक्ति राज्य मंत्री डॉ. राज भूषण चौधरी ने उत्तराखंड में मंत्रालय की विभिन्न योजनाओं, विशेषकर ‘नमामि गंगे’ और ‘स्वच्छता अभियान’ के प्रभावी क्रियान्वयन की जमकर प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुरूप हिमालयी राज्यों की विशेष आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए हर संभव आर्थिक और तकनीकी सहयोग प्रदान कर रही है।
डॉ. चौधरी ने विश्वास दिलाया कि उत्तराखंड में जल प्रबंधन से जुड़ी किसी भी बड़ी परियोजना के लिए केंद्र सरकार की ओर से फंड और समन्वय की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी। उन्होंने राज्य सरकार द्वारा जल संरक्षण की दिशा में किए जा रहे नवाचारों को अन्य राज्यों के लिए भी अनुकरणीय बताया।
उत्तराखंड बनेगा ‘जल प्रबंधन का मॉडल राज्य’
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बैठक के अंत में विश्वास व्यक्त किया कि केंद्र और राज्य के बीच यह बेहतर समन्वय उत्तराखंड को जल प्रबंधन के क्षेत्र में एक आदर्श राज्य के रूप में स्थापित करेगा। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में राज्य न केवल अपनी जल सुरक्षा सुनिश्चित करेगा, बल्कि जल संरक्षण की दिशा में देश का मार्गदर्शन भी करेगा।
रणनीतिक महत्व: क्यों महत्वपूर्ण है यह भेंट?
राजनीतिक और प्रशासनिक विश्लेषकों का मानना है कि केंद्र और राज्य के बीच ऐसे संवादों से परियोजनाओं की ‘रेड-टेपिज्म’ (लालफीताशाही) खत्म होती है और फाइलों का निपटारा तेजी से होता है। उत्तराखंड जैसे राज्य में, जहाँ पर्यटन और तीर्थाटन का भारी दबाव रहता है, वहां जल प्रबंधन का मजबूत होना राज्य की अर्थव्यवस्था और पर्यावरण दोनों के लिए संजीवनी है।
निष्कर्ष: सशक्त उत्तराखंड की ओर एक और कदम
मुख्यमंत्री धामी का “सतत जल प्रबंधन” पर फोकस यह दर्शाता है कि सरकार भविष्य की पीढ़ियों के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझती है। केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. राज भूषण चौधरी के सकारात्मक रुख ने इस संकल्प को और भी मजबूती प्रदान की है। अब उम्मीद की जा रही है कि आने वाले बजट और कार्य योजनाओं में उत्तराखंड के जल संसाधनों के लिए बड़े आवंटन देखने को मिल सकते हैं।



