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उत्तराखंड सहकारिता क्षेत्र का कायाकल्प: 177 पदों पर सीधी भर्ती का एलान, 350 प्रोफेशनल सचिव बदलेंगे पैक्स की सूरत

देहरादून: उत्तराखंड में ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले सहकारिता क्षेत्र को सुदृढ़, पारदर्शी और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़े कदम उठाए हैं। बुधवार को सहकारिता मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने अपने शासकीय आवास पर विभाग की हाई-प्रोफाइल समीक्षा बैठक ली। इस बैठक में न केवल खाली पदों पर भर्ती की समय सीमा तय की गई, बल्कि राज्य में भंडारण क्षमता बढ़ाने और पैक्स (PACS) समितियों के आधुनिकरण को लेकर भी रोडमैप तैयार किया गया।

जिला सहकारी बैंकों में बंपर भर्ती और कैडर सुधार

उत्तराखंड के युवाओं के लिए सहकारिता विभाग से बड़ी खुशखबरी सामने आई है। बैठक में निर्णय लिया गया है कि जिला सहकारी बैंकों में रिक्त पड़े वर्ग-1, वर्ग-2 और वर्ग-3 के कुल 177 पदों पर जल्द ही भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाएगी। पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए यह भर्तियां IBPS (इंस्टिट्यूट ऑफ बैंकिंग पर्सनेल सिलेक्शन) के माध्यम से आयोजित की जाएंगी।

इसके साथ ही, समितियों के प्रबंधन को और अधिक पेशेवर बनाने के लिए सरकार कैडर नियमावली में बड़े संशोधन करने जा रही है। मंत्री धन सिंह रावत ने निर्देश दिए हैं कि जल्द ही 350 प्रोफेशनल सचिवों की नियुक्ति की जाए, जो निचले स्तर पर सहकारी समितियों के कामकाज को कॉर्पोरेट कुशलता के साथ संचालित करेंगे।


643 पैक्स (PACS) समितियों का गठन: अंतिम चरण में काम

राज्य की विषम भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए उत्तराखंड सरकार ने 643 बहुउद्देश्यीय पैक्स (Primary Agricultural Credit Societies) के गठन का लक्ष्य रखा था। सचिव सहकारिता डॉ. इकबाल अहमद ने बैठक में जानकारी दी कि इस लक्ष्य के सापेक्ष 621 पैक्स का गठन पहले ही किया जा चुका है।

शेष समितियों के गठन की प्रक्रिया भी अंतिम चरण में है। ये समितियां न केवल किसानों को ऋण उपलब्ध कराएंगी, बल्कि खाद, बीज और अन्य कृषि आवश्यकताओं के लिए ‘वन-स्टॉप शॉप’ के रूप में कार्य करेंगी। इसके साथ ही, निबंधक कार्यालय के लिए चिन्हित भूमि पर निर्माण कार्य शीघ्र प्रारंभ करने के निर्देश भी जारी किए गए हैं।


भंडारण योजना: हरिद्वार से शुरू होगी बड़ी पहल

किसानों की उपज को सुरक्षित रखने और उन्हें बेहतर मूल्य दिलाने के लिए उत्तराखंड सरकार अनाज भंडारण योजना पर तेजी से काम कर रही है। निबंधक सहकारिता मेहरबान सिंह बिष्ट ने बताया कि:

  • हरिद्वार मॉडल: हरिद्वार जिले की चार पैक्स में 1000 मैट्रिक टन क्षमता के गोदाम बनाने के लिए डीपीआर (DPR) तैयार हो चुकी है।

  • विकासखंड स्तर पर विस्तार: राज्य के 95 विकासखंडों में खाली पड़ी भूमि पर 50 से 500 मैट्रिक टन क्षमता के कुल 95 गोदाम बनाने की कार्यवाही गतिमान है।

यह कदम राज्य में कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने और सहकारी क्षेत्र को खाद्य सुरक्षा में बड़ी भूमिका निभाने के लिए तैयार करेगा।


कानून में बदलाव और राष्ट्रीय समितियों के साथ समन्वय

सहकारिता आंदोलन को नई दिशा देने के लिए सरकार सहकारी समिति अधिनियम-2003 और नियमावली-2004 में आवश्यक संशोधन करने जा रही है। एक विशेषज्ञ कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर शासन को अनुमोदन के लिए प्रस्ताव भेज दिया गया है।

साथ ही, उत्तराखंड अब तीन नई राष्ट्रीय सहकारी समितियों के साथ हाथ मिलाने जा रहा है:

  1. NCOL (नेशनल कोऑपरेटिव एक्सपोर्ट समिति)

  2. भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड

  3. राष्ट्रीय कार्बनिक सहकारी समिति

इन समझौतों से उत्तराखंड के स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार (Global Market) तक पहुंच मिलेगी और राज्य के बीजों की गुणवत्ता में सुधार होगा।


गुजरात सहकारिता सम्मेलन की तैयारी

फरवरी माह में गुजरात में प्रस्तावित राष्ट्रीय सहकारिता सम्मेलन में उत्तराखंड अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराने की तैयारी कर रहा है। सहकारिता मंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सम्मेलन के सभी कार्य बिंदुओं को समय पर पूरा किया जाए। उत्तराखंड की एनसीईआरटी (NCERT) की गतिविधियों में भागीदारी और राज्य के ‘सक्सेस मॉडल’ को इस सम्मेलन में प्रदर्शित किया जाएगा।

पारदर्शिता और सशक्तिकरण पर जोर

डॉ. धन सिंह रावत ने स्पष्ट किया कि सहकारिता का अर्थ ही ‘सबका साथ’ है। उन्होंने कहा, “हमारा लक्ष्य सहकारी संस्थाओं का शत-प्रतिशत डिजिटलीकरण करना है ताकि भ्रष्टाचार की गुंजाइश खत्म हो और सीधा लाभ किसान व समिति सदस्यों को मिले।” विभाग अब मानव संसाधन सुदृढ़ीकरण और शासन स्तर पर सुधारात्मक कदमों से सहकारिता आंदोलन को जन-आंदोलन बनाने की ओर अग्रसर है।

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