उत्तराखंडफीचर्ड

उत्तराखंड: मुख्य सचिव का विभागों को सख्त निर्देश, सिंचाई क्षमता दोगुनी करने और पेयजल योजनाओं को ‘जीरो कार्बन’ बनाने का लक्ष्य

देहरादून: उत्तराखंड में विकास परियोजनाओं की रफ्तार तेज करने और सरकारी धन के सदुपयोग को सुनिश्चित करने के लिए शासन ने कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने मंगलवार को सचिवालय में एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक ली। इस बैठक में पूंजीगत व्यय, केंद्र पोषित योजनाओं (CSS), बाह्य सहायतित परियोजनाओं (EAP) और नाबार्ड से जुड़ी योजनाओं की प्रगति को खंगाला गया। मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि अब केवल बजट खर्च करना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि कार्यों की गुणवत्ता और निर्धारित समय सीमा का पालन करना अनिवार्य होगा।


गुणवत्ता नियंत्रण: ‘थर्ड पार्टी इवैल्यूएशन’ का बनेगा मजबूत मैकेनिज्म

मुख्य सचिव ने कार्यों की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए एक क्रांतिकारी कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने वित्त एवं नियोजन विभाग को निर्देशित किया कि इंडिपेंडेंट थर्ड पार्टी इवैल्यूएशन (स्वतंत्र तृतीय पक्ष मूल्यांकन) के लिए एक सुदृढ़ ढांचा तैयार किया जाए।

  • जवाबदेही तय: उन्होंने कहा कि जिन प्रोजेक्ट्स में थर्ड पार्टी इवैल्यूएशन का प्रावधान नहीं है, वहां इसे तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए।

  • कड़ी कार्रवाई: कार्यों में शिथिलता बरतने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी और उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित होगी।

  • एम्पैनल्ड एजेंसियां: नियोजन विभाग द्वारा सूचीबद्ध एजेंसियों को तत्काल गुणवत्ता नियंत्रण के काम में लगाया जाएगा।


कृषि एवं सिंचाई: 5 साल में दोगुनी होगी सिंचित भूमि

उत्तराखंड की कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए मुख्य सचिव ने सिंचाई विभाग को एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य दिया है। वर्तमान में प्रदेश की कुल सिंचित भूमि लगभग 15 प्रतिशत है, जिसे अगले 5 वर्षों में बढ़ाकर 30 प्रतिशत करने का टारगेट दिया गया है।

  • नया इंफ्रास्ट्रक्चर: इसके लिए नए बैराज और नहरों के निर्माण पर फोकस किया जाएगा।

  • आधुनिक तकनीक: पायलट प्रोजेक्ट के रूप में सफल रहे ‘स्प्रिंकलर सिस्टम’ को अब पूरे प्रदेश में लागू किया जाएगा।

  • पुनरुद्धार: मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि जो सिंचाई तंत्र ध्वस्त हो चुके हैं या बंद पड़े हैं, उन्हें तत्काल मरम्मत कर चालू किया जाए।


पर्यावरण और पेयजल: ‘जीरो कार्बन’ उत्सर्जन का विजन

जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों को देखते हुए मुख्य सचिव ने पेयजल विभाग को भविष्योन्मुखी लक्ष्य दिया है। उन्होंने जल संस्थान और जल निगम को अपनी सभी पेयजल योजनाओं को जीरो कार्बन उत्सर्जन की दिशा में ले जाने का निर्देश दिया।

  • सोलर एनर्जी: पेयजल योजनाओं को चलाने के लिए सौर ऊर्जा का उपयोग किया जाएगा और इन्हें बैटरी स्टोरेज से जोड़ा जाएगा। इसके लिए ‘क्लाइमेट चेंज फंड’ का भी उपयोग करने की बात कही गई।

  • रियल टाइम मॉनिटरिंग: एसटीपी (Sewage Treatment Plants) की कार्यप्रणाली पर नजर रखने के लिए 24×7 रियल टाइम मॉनिटरिंग मैकेनिज्म तैयार करने को कहा गया है।


स्मार्ट वॉटर मैनेजमेंट: देहरादून में 100% वाटर मीटरिंग

पानी की बर्बादी रोकने के लिए मुख्य सचिव ने देहरादून के लिए एक सख्त डेडलाइन निर्धारित की है।

  • 31 मार्च की समय सीमा: देहरादून की सभी सरकारी कॉलोनियों और आवासों में 31 मार्च तक शत-प्रतिशत वाटर मीटर लगाने का लक्ष्य दिया गया है।

  • शहरी विस्तार: देहरादून के बाद प्रदेश के सभी नगर निगमों को भी वाटर मीटरिंग से संतृप्त किया जाएगा।

  • सख्त संदेश: दूषित पानी की शिकायत मिलने पर संबंधित क्षेत्र के अधिकारियों पर सीधी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, ‘सौंग बांध परियोजना’ की पेयजल घटक की डीपीआर एक सप्ताह में उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए।


पर्यटन और बुनियादी ढांचा: टिहरी बनेगा इंटरनेशनल डेस्टिनेशन

उत्तराखंड को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने के लिए टिहरी पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। मुख्य सचिव ने कहा कि टिहरी को एक इंटरनेशनल डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने के लिए शीघ्र ही एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाए।

  • रिंग रोड: बहुप्रतीक्षित ‘टिहरी झील रिंग रोड परियोजना’ को जल्द शुरू करने के निर्देश दिए गए।

  • शहरी विकास: देहरादून सहित बड़े शहरों में विशाल पार्कों का निर्माण किया जाएगा।

  • फॉरेस्ट एंड आईटी: वन विभाग को एक्सप्रेस-वे के किनारे सिटी ग्रीनिंग और बायोफेंसिंग का मॉडल तैयार करने तथा आईटी विभाग को ‘साइंस सिटी’ के संचालन के लिए मजबूत मैकेनिज्म बनाने को कहा गया।


बैठक में मौजूद प्रमुख अधिकारी

इस महत्वपूर्ण बैठक में प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, आर. मीनाक्षी सुन्दरम, पीसीसीएफ कपिल लाल, सचिव नितेश कुमार झा, सचिन कुर्वे, दिलीप जावलकर, डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय सहित वित्त और नियोजन विभाग के तमाम वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि अच्छा प्रदर्शन करने वाले विभागों को अतिरिक्त फंड उपलब्ध कराया जाएगा ताकि विकास की गति न रुके।

निष्कर्ष

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन द्वारा दिए गए ये निर्देश उत्तराखंड के प्रशासनिक ढांचे में बड़े बदलाव का संकेत हैं। सिंचाई क्षमता को दोगुना करना और पेयजल को पर्यावरण अनुकूल बनाना न केवल एक प्रशासनिक लक्ष्य है, बल्कि यह राज्य के सतत विकास (Sustainable Development) के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है। अब देखना यह होगा कि विभाग इन कठिन लक्ष्यों को समय सीमा के भीतर कैसे हासिल करते हैं।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button