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उत्तराखंड: केंद्र ने ‘आदि लक्ष्य संस्थान’ के लिए स्वीकृत किए ₹1 करोड़, सीएम धामी की कोशिशों को मिली सफलता

देहरादून। उत्तराखंड के सीमांत और जनजातीय क्षेत्रों के विकास की दिशा में राज्य सरकार को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। प्रदेश में जनजातीय युवाओं के शैक्षिक उत्थान, कौशल विकास और शोध कार्यों को समर्पित “उत्तराखंड आदि लक्ष्य संस्थान” (Uttarakhand Adi Lakshya Sansthan) की स्थापना का मार्ग प्रशस्त हो गया है। केंद्र सरकार ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए ₹1 करोड़ की शुरुआती धनराशि स्वीकृत कर दी है।

यह उपलब्धि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के उन सतत प्रयासों का परिणाम है, जो वे राज्य के जनजातीय समुदायों के सामाजिक-आर्थिक सशक्तीकरण के लिए लंबे समय से कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने पूर्व में व्यक्तिगत रूप से केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री से इस संस्थान की आवश्यकता और महत्व को लेकर विस्तृत चर्चा कर अनुरोध किया था।

मुख्यमंत्री के अनुरोध पर केंद्र की मुहर

केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुएल ओराम ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को भेजे आधिकारिक पत्र में इस वित्तीय स्वीकृति की जानकारी साझा की है। केंद्र सरकार ने उत्तराखंड सरकार द्वारा भेजे गए प्रस्ताव का गहन अध्ययन करने के बाद वित्तीय वर्ष 2025-26 के अंतर्गत इस संस्थान की स्थापना हेतु बजट आवंटित किया है।

संस्थान की स्थापना का उद्देश्य केवल एक भवन खड़ा करना नहीं है, बल्कि एक ऐसा इकोसिस्टम तैयार करना है जहाँ जनजातीय युवाओं की प्रतिभा को तराशा जा सके और उन्हें मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था से जोड़ा जा सके।

क्या है ‘उत्तराखंड आदि लक्ष्य संस्थान’ और इसके उद्देश्य?

उत्तराखंड का एक बड़ा हिस्सा जौनसारी, थारू, बोक्सा, भोटिया और राजी जैसे समृद्ध जनजातीय समुदायों से जुड़ा है। उत्तराखंड आदि लक्ष्य संस्थान इन समुदायों के लिए एक ‘एक्सिलेंस सेंटर’ (Excellence Center) के रूप में कार्य करेगा। इसके मुख्य केंद्र बिंदु निम्नलिखित होंगे:

  1. शैक्षिक अवसंरचना में सुधार: जनजातीय क्षेत्रों के छात्रों को उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा और संसाधनों तक पहुँच प्रदान करना।

  2. कौशल विकास (Skill Development): स्थानीय परंपराओं और आधुनिक बाजार की माँग के बीच संतुलन बनाते हुए युवाओं को तकनीकी रूप से दक्ष बनाना।

  3. शोध एवं अनुसंधान: जनजातीय संस्कृतियों, लोक विधाओं और उनकी पारंपरिक औषधीय पद्धतियों पर वैज्ञानिक शोध को बढ़ावा देना।

  4. सशक्तीकरण: सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम छोर तक पहुँचाने के लिए जनजातीय युवाओं को नेतृत्व क्षमता प्रदान करना।

मुख्यमंत्री धामी ने जताया प्रधानमंत्री का आभार

इस महत्वपूर्ण घोषणा के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्री जुएल ओराम का हृदय से आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह संस्थान केवल एक सरकारी संस्थान नहीं, बल्कि प्रदेश के जनजातीय युवाओं के सपनों को उड़ान देने वाला एक लॉन्चपैड साबित होगा।

उन्होंने जोर देकर कहा, “हमारी सरकार जनजातीय क्षेत्रों के समग्र विकास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। ‘आदि लक्ष्य संस्थान’ के माध्यम से हम स्थानीय युवाओं को उनके ही परिवेश में बेहतर अवसर उपलब्ध कराएंगे, जिससे न केवल उनका पलायन रुकेगा, बल्कि वे अपनी समृद्ध संस्कृति को सहेजते हुए आर्थिक रूप से भी सुदृढ़ बनेंगे।”

जनजातीय आर्थिकी और पलायन पर प्रहार

विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तराखंड के दूरस्थ पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाली जनजातियां अक्सर उचित मार्गदर्शन और प्रशिक्षण के अभाव में शहरों की ओर पलायन करती हैं। उत्तराखंड आदि लक्ष्य संस्थान की स्थापना से स्थानीय स्तर पर ही रोजगारोन्मुखी शिक्षा मिलेगी। यह संस्थान जनजातीय उत्पादों की ब्रांडिंग और मार्केटिंग में भी सहायता कर सकता है, जिससे ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान को नई गति मिलेगी।

सामाजिक उत्थान की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम

केंद्र सरकार द्वारा स्वीकृत यह ₹1 करोड़ की धनराशि संस्थान की आधारशिला रखने और शुरुआती ढांचे को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। शासन के सूत्रों के अनुसार, अब राज्य सरकार जल्द ही संस्थान के लिए उपयुक्त भूमि का चयन और विस्तृत कार्ययोजना (DPR) तैयार करने की प्रक्रिया तेज करेगी।

यह पहल उत्तराखंड के सामाजिक नक्शे पर जनजातीय समुदायों की स्थिति को और अधिक सशक्त बनाएगी। केंद्र और राज्य के इस साझा प्रयास से आने वाले वर्षों में जनजातीय क्षेत्रों में साक्षरता दर और रोजगार के आंकड़ों में व्यापक सुधार की उम्मीद की जा रही है।

‘उत्तराखंड आदि लक्ष्य संस्थान’ की स्थापना राज्य के समावेशी विकास के मॉडल का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। मुख्यमंत्री धामी की विकासवादी सोच और केंद्र सरकार के सहयोग ने देवभूमि के जनजातीय युवाओं के उज्ज्वल भविष्य की नींव रख दी है। अब सभी की निगाहें इस संस्थान के धरातल पर उतरने और इससे होने वाले क्रांतिकारी बदलावों पर टिकी हैं।


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