देहरादून: देवभूमि उत्तराखंड में मौसम की करवट ने अब गर्मी की दस्तक दे दी है। बीते कुछ दिनों से सुबह और शाम की ‘गुलाबी ठंड’ के बीच दिन की गुनगुनी धूप अब चुभने लगी है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा अनुमानों के मुताबिक, होली के बीतते ही समूचे प्रदेश में तापमान के ग्राफ में तेजी से उछाल आने वाला है। शुष्क मौसम और बारिश की कमी ने न केवल आम जनजीवन बल्कि कृषि क्षेत्र के लिए भी खतरे की घंटी बजा दी है।
शुष्क मौसम और बढ़ता तापमान: क्या है मौसम विभाग का अनुमान?
देहरादून मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, वर्तमान में उत्तराखंड के अधिकांश हिस्सों में मौसम पूरी तरह शुष्क बना हुआ है। पिछले 24 घंटों में तापमान में क्रमिक वृद्धि दर्ज की गई है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अगले 48 से 72 घंटों के दौरान राज्य के अधिकतम तापमान में 1–2°C का और इजाफा हो सकता है।
विशेषज्ञों की मानें तो इस बार मैदानी इलाकों के साथ-साथ पर्वतीय अंचलों में भी गर्मी का प्रभाव सामान्य से अधिक रहने वाला है। पहाड़ों में दिन के समय बादलों और धूप की ‘आंखमिचौली’ जारी है, लेकिन यह तपिश को रोकने में नाकाम साबित हो रही है। मौसम विभाग की चेतावनी है कि आने वाले दिनों में शुष्क हवाएं लोगों की मुश्किलें बढ़ा सकती हैं।
राजधानी देहरादून का हाल: 32 डिग्री तक पहुंचेगा पारा
राजधानी देहरादून में मौसम का मिजाज तेजी से बदल रहा है। शहर में आसमान मुख्यतः साफ है, जिसके कारण सौर विकिरण (Solar Radiation) का सीधा प्रभाव देखने को मिल रहा है।
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अधिकतम तापमान: 32°C के आसपास रहने का अनुमान।
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न्यूनतम तापमान: 13°C के करीब बने रहने की संभावना।
दिन और रात के तापमान में आ रहा यह भारी अंतर (Diurnal Temperature Variation) स्वास्थ्य के लिहाज से भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है। जहाँ रातें अभी भी थोड़ी ठंडी हैं, वहीं दोपहर की धूप ने लोगों को पंखे और कूलर चलाने पर मजबूर कर दिया है।
पर्वतीय क्षेत्रों में असामान्य गर्मी: ग्लेशियरों पर भी नजर
आमतौर पर मार्च के महीने में उत्तराखंड के ऊंचे इलाकों में ठंडक बरकरार रहती है, लेकिन इस साल स्थिति कुछ अलग है। पर्वतीय अंचलों में तापमान सामान्य से काफी अधिक दर्ज किया जा रहा है। चमोली, उत्तरकाशी और पिथौरागढ़ जैसे सीमावर्ती जिलों में भी दिन के समय गर्मी का अहसास होने लगा है। यदि तापमान में इसी तरह की बढ़ोतरी जारी रही, तो यह ग्लेशियरों के पिघलने की दर पर भी असर डाल सकता है, जो भविष्य के लिए एक चिंता का विषय है।
किसानों की बढ़ी चिंता: पैदावार पर मंडराया संकट
इस सीजन में उम्मीद के मुताबिक बारिश और बर्फबारी न होने के कारण कृषि क्षेत्र गहरे संकट में नजर आ रहा है। उत्तराखंड के किसानों के लिए यह समय रबी की फसलों की कटाई और नई फसलों की बुआई का होता है, लेकिन पर्याप्त नमी की कमी ने उनकी रातों की नींद उड़ा दी है।
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सिंचाई का अभाव: बारिश न होने से प्राकृतिक जल स्रोत सूखने लगे हैं।
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फसलों की गुणवत्ता: तेज धूप और शुष्क हवाओं के कारण गेहूं और दलहन की फसलों में दाने छोटे रह सकते हैं।
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आर्थिक नुकसान: यदि मौसम का यही रुख रहा, तो पैदावार में 20-30% तक की गिरावट दर्ज की जा सकती है।
किसानों का कहना है कि यदि जल्द ही पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) सक्रिय नहीं हुआ, तो बागवानी और खेती दोनों को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह: हीट स्ट्रोक से बचें
बदलते मौसम और बढ़ते पारे को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने भी सावधानी बरतने की सलाह दी है। दिन और रात के तापमान में 15 से 20 डिग्री का अंतर शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को प्रभावित कर सकता है। डॉक्टरों का सुझाव है कि:
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भरपूर पानी पिएं और शरीर को हाइड्रेटेड रखें।
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दोपहर के समय सीधे धूप में निकलने से बचें।
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मौसमी फलों और ठंडे पदार्थों का सेवन बढ़ाएं।
क्या राहत की है कोई उम्मीद?
फिलहाल मौसम विभाग के पास बारिश को लेकर कोई उत्साहजनक अपडेट नहीं है। उत्तराखंड में आने वाले 5-6 दिन पूरी तरह शुष्क रहने की संभावना है। मैदानी क्षेत्रों (हरिद्वार, उधमसिंह नगर) में लू (Loo) जैसी स्थिति तो अभी नहीं है, लेकिन होली के बाद की तपिश निश्चित रूप से पसीने छुड़ाने वाली होगी।
उत्तराखंड के इस बदलते परिवेश ने एक बार फिर ग्लोबल वार्मिंग और पारिस्थितिक असंतुलन पर बहस छेड़ दी है। आने वाले सप्ताह में राज्य सरकार और आपदा प्रबंधन विभाग भी बढ़ते तापमान के कारण जंगलों में लगने वाली आग (Forest Fires) की घटनाओं को लेकर अलर्ट मोड पर रह सकते हैं।



