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शूटिंग हब बनता उत्तराखंड: फिल्म नीति-2024 से क्षेत्रीय सिनेमा की उड़ान, 25 फिल्मों को 8.28 करोड़ की ग्रांट जारी

देहरादून: देवभूमि उत्तराखंड अब केवल धार्मिक पर्यटन और प्राकृतिक सुंदरता तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह देश के ‘सिनेमाई मानचित्र’ पर एक प्रमुख केंद्र (Filming Hub) के रूप में तेजी से उभर रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में लागू की गई ‘उत्तराखंड फिल्म नीति-2024’ के सकारात्मक परिणाम दिखने शुरू हो गए हैं। राज्य सरकार ने फिल्म उद्योग को प्रोत्साहित करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए वित्तीय वर्ष 2025-26 में कुल 25 फिल्मों को 8.28 करोड़ रुपये की अनुदान राशि जारी की है।

इस पहल से न केवल बॉलीवुड के बड़े बैनर उत्तराखंड की ओर आकर्षित हो रहे हैं, बल्कि गढ़वाली, कुमाऊंनी और जौनसारी जैसी क्षेत्रीय भाषाओं के सिनेमा को भी संजीवनी मिली है।

सीएम धामी का विजन: सिंगल विंडो और पारदर्शी प्रक्रिया

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड का शांत वातावरण, विविध भौगोलिक परिस्थितियाँ और सांस्कृतिक विरासत फिल्म निर्माण के लिए विश्वस्तरीय मंच प्रदान करती हैं। उन्होंने जोर देकर कहा, “हमारा उद्देश्य केवल शूटिंग की अनुमति देना नहीं है, बल्कि राज्य में फिल्म निर्माण के जरिए स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देना, रोजगार सृजन करना और अपनी संस्कृति को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाना है।”

राज्य में अब सिंगल विंडो सिस्टम के माध्यम से शूटिंग की अनुमति दी जा रही है, जिससे फिल्म निर्माताओं को दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ते। अनुमति प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाकर सरकार ने ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ का उदाहरण पेश किया है।

क्षेत्रीय सिनेमा को मिला ‘कवच’

फिल्म नीति-2024 की सबसे बड़ी सफलता क्षेत्रीय सिनेमा को मिलने वाला प्रोत्साहन है। इस वर्ष जारी अनुदान में 14 फिल्में स्थानीय भाषाओं (गढ़वाली, कुमाऊंनी, जौनसारी) की हैं। सरकार का मानना है कि जब स्थानीय भाषा की फिल्में बनेंगी, तो उत्तराखंड की परंपराएं और लोकगीत दुनिया के सामने आएंगे।

क्रम संख्या फिल्म का नाम भाषा स्वीकृत अनुदान राशि (₹)
1 मेरे गांव की बाट जौनसारी ₹31,04,360
2 संस्कार गढ़वाली ₹26,68,175
3 घपरोल गढ़वाली ₹21,85,819
4 गढ़-कुमौं उत्तराखण्डी ₹20,93,140
5 मीठी माँ कु आशीर्वाद गढ़वाली ₹20,83,050
6 कारा: एक प्रथा गढ़वाली ₹18,86,726
7 द्वि होला जब साथ गढ़वाली ₹18,48,883
8 धरती म्यर कुमाऊँ कुमाऊंनी ₹17,63,528
9 असग़ार गढ़वाली ₹16,96,852
10 रतब्याण गढ़वाली ₹9,96,193
11 अजाण गढ़वाली ₹9,24,286
12 मेरु गौ गढ़वाली ₹7,91,305
13 बथों सुबेरो घाम-2 गढ़वाली ₹6,53,073
14 जोना गढ़वाली ₹5,84,528

बॉलीवुड का भी बढ़ा रुझान: हिन्दी फिल्मों को करोड़ों की मदद

उत्तराखंड की नई फिल्म नीति से प्रभावित होकर बड़े निर्माता अब अपनी फिल्मों की शूटिंग के लिए देहरादून, मसूरी और ऋषिकेश जैसे स्थानों को प्राथमिकता दे रहे हैं। इस वर्ष 11 हिन्दी और अंग्रेजी फिल्मों को अनुदान दिया गया है। इसमें ‘विकी विद्या का वह वाला वीडियो’ को सर्वाधिक 1.95 करोड़ रुपये का अनुदान मिला है। इसके अलावा वेब सीरीज ‘लाइफ हिल गई’ और अनुपम खेर की फिल्म ‘Tanvi the Great’ को भी बड़ी धनराशि जारी की गई है।

फिल्म विकास परिषद की सक्रियता

उत्तराखंड फिल्म विकास परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) बंशीधर तिवारी ने जानकारी दी कि परिषद साल में दो बार (जुलाई और जनवरी) अनुदान चयन के लिए बैठक करती है। जुलाई 2025 में 12 और जनवरी 2026 में 13 फिल्मों के प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। उन्होंने बताया कि शूटिंग के दौरान स्थानीय कलाकारों और तकनीशियनों को काम मिलने से रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं।

पर्यटन और रोजगार को नई संजीवनी

राज्य सरकार का मानना है कि फिल्मों के माध्यम से जब उत्तराखंड की खूबसूरत लोकेशन्स पर्दे पर दिखती हैं, तो ‘फिल्म टूरिज्म’ को बढ़ावा मिलता है। इससे होटल व्यवसाय, परिवहन और स्थानीय गाइडों की आय में वृद्धि होती है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि वेब सीरीज, डॉक्यूमेंट्री और शॉर्ट फिल्मों को भी इसी तरह प्रोत्साहित किया जाता रहेगा ताकि उत्तराखंड फिल्म निर्माण का ‘ग्लोबल डेस्टिनेशन’ बन सके।


फिल्म नीति-2024 के सफल क्रियान्वयन ने यह साबित कर दिया है कि उत्तराखंड सरकार फिल्म उद्योग को लेकर गंभीर है। अनुदान की यह पारदर्शी व्यवस्था आने वाले समय में राज्य को ‘मिनी बॉलीवुड’ के रूप में स्थापित करने में मील का पत्थर साबित होगी।

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