
देहरादून: उत्तराखंड के प्रशासनिक ढांचे को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने और सरकारी कामकाज में आधुनिकता का समावेश करने की दिशा में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार ने एक बड़ा निर्णय लिया है। राज्य सरकार ने ‘मिशन कर्मयोगी’ के तहत प्रदेश के सभी सरकारी कर्मचारियों के लिए iGOT (इंटीग्रेटेड गवर्नमेंट ऑनलाइन ट्रेनिंग) पोर्टल पर प्रशिक्षण को अनिवार्य कर दिया है। अब सचिवालय से लेकर जिला मुख्यालयों तक कार्यरत हर कार्मिक को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपनी दक्षता साबित करनी होगी।
प्रशासनिक सुधार की दिशा में ‘डिजिटल’ प्रहार
सचिवालय प्रशासन अनुभाग-3 द्वारा जारी हालिया आदेश के अनुसार, उत्तराखंड शासन ने राज्य के सभी कार्मिकों को iGOT कर्मयोगी पोर्टल पर ऑनबोर्ड करने की प्रक्रिया पूरी कर ली है। केंद्र सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना का मुख्य उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों की ‘कैपेसिटी बिल्डिंग’ यानी क्षमता निर्माण को सुदृढ़ करना है। सरकार का मानना है कि इस पहल से न केवल फाइलों के निस्तारण में तेजी आएगी, बल्कि जनता को मिलने वाली सरकारी सेवाओं की गुणवत्ता में भी व्यापक सुधार होगा।
ई-ऑफिस आईडी से होगी लॉगिन, प्रोफाइल अपडेट करना जरूरी
जारी किए गए दिशा-निर्देशों के अनुसार, कर्मचारियों को अपनी आधिकारिक e-Office ईमेल आईडी और पासवर्ड का उपयोग करके iGOT पोर्टल पर लॉगिन करना होगा। लॉगिन के तुरंत बाद प्रत्येक कर्मचारी को अपनी प्रोफाइल अपडेट करनी होगी, जिसमें उनकी व्यक्तिगत जानकारी के साथ-साथ उनके वर्तमान पद और कार्यक्षेत्र का विवरण देना अनिवार्य है। प्रोफाइल अपडेट करने का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कर्मचारी को उसके कार्य की प्रकृति के अनुरूप ही विशेष प्रशिक्षण मॉड्यूल उपलब्ध कराए जाएं।
एक कोर्स और असेसमेंट: सर्टिफिकेट मिलना तय
शासन ने स्पष्ट किया है कि प्रत्येक कर्मचारी के लिए कम से कम एक पाठ्यक्रम (Course) में नामांकन करना अनिवार्य होगा। इसके लिए एक विस्तृत SOP (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर) जारी की गई है। कर्मचारियों को पाठ्यक्रम के सभी मॉड्यूल्स को ध्यानपूर्वक पूरा करना होगा, जिसके बाद उनका ऑनलाइन मूल्यांकन (Assessment) किया जाएगा। इस परीक्षा को पास करने वाले कार्मिकों को ही ऑनलाइन सर्टिफिकेट जारी किया जाएगा, जो उनके सेवा अभिलेखों में कौशल विकास के प्रमाण के रूप में दर्ज होगा।
तकनीकी बाधाओं के लिए तैयार ‘सपोर्ट सिस्टम’
प्रशिक्षण की इस पूरी प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए सचिवालय प्रशासन की ई-ऑफिस टीम को मुस्तैद किया गया है। यदि किसी कर्मचारी को लॉगिन, नामांकन या पोर्टल के संचालन में तकनीकी समस्या आती है, तो वे सीधे अनुभाग-3 या तकनीकी टीम से संपर्क कर सकते हैं। सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश का कोई भी कर्मचारी तकनीकी जानकारी के अभाव में इस महत्वपूर्ण प्रशिक्षण से वंचित न रहे।
साइबर सुरक्षा पर विशेष जोर
डिजिटल इंडिया के इस दौर में सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए SOP में कड़े निर्देश दिए गए हैं। कर्मचारियों को अपने ई-ऑफिस पासवर्ड की गोपनीयता बनाए रखने और समय-समय पर उसे बदलने की हिदायत दी गई है। यह कदम सरकारी डेटा की सुरक्षा और संभावित साइबर खतरों से बचाव के लिए उठाया गया है।
क्या है मिशन कर्मयोगी और इसका विजन?
‘मिशन कर्मयोगी’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी सोच का परिणाम है, जिसका लक्ष्य भारतीय नौकरशाही को ‘रूल-बेस्ड’ (नियम आधारित) से ‘रोल-बेस्ड’ (भूमिका आधारित) में परिवर्तित करना है। उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में, जहाँ भौगोलिक परिस्थितियों के कारण दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुँचना चुनौतीपूर्ण होता है, वहां डिजिटल प्रशिक्षण के माध्यम से प्रशासनिक तंत्र को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और उत्तरदायी बनाने की यह कोशिश मील का पत्थर साबित हो सकती है।



