
उत्तराखंड के पर्वतीय अंचल से शिव भक्तों के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। विश्व प्रसिद्ध आदि कैलाश यात्रा के लिए इस वर्ष बुकिंग प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। यह पवित्र यात्रा 8 मई 2026 से प्रारंभ होगी और पहले चरण में 15 जून तक संचालित की जाएगी। हर साल की तरह इस बार भी श्रद्धालुओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है, और अनुमान है कि यात्रियों की संख्या पिछले वर्षों के मुकाबले अधिक हो सकती है।
यह यात्रा उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिला के धारचूला क्षेत्र में स्थित आदि कैलाश और ओम पर्वत के दर्शन के लिए आयोजित की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आदि कैलाश को भगवान शिव का निवास माना जाता है और इसे “छोटा कैलाश” भी कहा जाता है। यही कारण है कि यह यात्रा शिव भक्तों के लिए अत्यंत विशेष महत्व रखती है।
इस वर्ष यात्रा को सुचारु रूप से संचालित करने की जिम्मेदारी कुमाऊं मंडल विकास निगम (केएमवीएन) को सौंपी गई है। निगम के अनुसार, पहले चरण में कुल 15 बैच तैयार किए गए हैं, जिनमें श्रद्धालुओं को समूहों में भेजा जाएगा। पहला बैच 8 मई को हल्द्वानी स्थित पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस से रवाना होगा। यात्रा मार्ग में अल्मोड़ा और पिथौरागढ़ होते हुए श्रद्धालु अपने गंतव्य तक पहुंचेंगे।
प्रशासन इस बार यात्रा को और अधिक सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए अतिरिक्त मार्गों पर भी विचार कर रहा है। विशेष रूप से टनकपुर और धारचूला मार्ग से यात्रियों को ले जाने की योजना बनाई जा रही है, जिससे यात्रा का दबाव कम हो और अधिक श्रद्धालु इस दिव्य अनुभव का हिस्सा बन सकें।
आदि कैलाश यात्रा केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं है, बल्कि यह एक गहन आध्यात्मिक अनुभव भी प्रदान करती है। इस यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को उत्तराखंड के कई प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों के दर्शन करने का अवसर मिलता है। इनमें कैंची धाम, जागेश्वर धाम, चितई गोलू देवता मंदिर और पाताल भुवनेश्वर जैसे प्राचीन और पौराणिक स्थल शामिल हैं। इन स्थानों का धार्मिक महत्व अत्यधिक है और ये यात्रा को और भी विशेष बना देते हैं।
ऑनलाइन बुकिंग शुरू होते ही श्रद्धालुओं की भारी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। श्रद्धालु कुमाऊं मंडल विकास निगम की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन बुकिंग कर सकते हैं. जिससे देश–विदेश के श्रद्धालु आसानी से पंजीकरण कर सकते हैं। बढ़ती मांग को देखते हुए प्रशासन ने व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाने के निर्देश दिए हैं, ताकि यात्रियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस वर्ष आदि कैलाश यात्रा उत्तराखंड में धार्मिक पर्यटन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकती है। स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी इससे बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है, क्योंकि बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आगमन से होटल, परिवहन और अन्य सेवाओं की मांग बढ़ेगी।
कुल मिलाकर, आदि कैलाश यात्रा 2026 शिव भक्तों के लिए एक अद्वितीय अवसर लेकर आई है। यह यात्रा न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत करती है, बल्कि प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिक शांति का अनमोल अनुभव भी प्रदान करती है।



