
गौचर (चमोली), 14 नवंबर। उत्तराखंड के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों में शुमार 73वां राजकीय औद्योगिक विकास एवं सांस्कृतिक मेला शुक्रवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा औपचारिक रूप से उद्घाटित किया गया। हिमालयी परंपरा और स्थानीय शिल्प के जीवंत मेल के रूप में पहचाने जाने वाला यह मेला न केवल राज्य की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करता है, बल्कि क्षेत्र की आर्थिकी को भी नई दिशा और ऊर्जा प्रदान करता है।
विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि गौचर मेला उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत का अमूल्य संरक्षण करता है और स्थानीय उत्पादों एवं कुटीर उद्योगों को राज्य से लेकर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
परंपरा और अर्थव्यवस्था का संगम: “गौचर मेला हमारी सांस्कृतिक धरोहर का उत्सव”
मुख्यमंत्री धामी ने अपने संबोधन में कहा कि भारत सरकार विशेषकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में सांस्कृतिक पुनरुत्थान और ‘लोकल फॉर वोकल’ की भावना को नई गति मिली है। उन्होंने कहा:
“आज हमारी मातृशक्ति द्वारा निर्मित स्थानीय उत्पाद बड़ी-बड़ी मल्टीनेशनल कंपनियों को चुनौती दे रहे हैं। यह उत्तराखंड की स्वाभिमान और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है।”
मुख्यमंत्री ने लोगों से स्वदेशी उत्पादों को अपनाने की अपील की और कहा कि यह न केवल स्थानीय व्यवसायों को मजबूती देगा बल्कि आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को भी सशक्त करेगा।
गौचर में 18-सीटर हेलीसेवा शुरू होगी: पर्वतीय कनेक्टिविटी को मिलेगी गति
मेले के उद्घाटन समारोह में मुख्यमंत्री धामी ने एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए बताया कि पिथौरागढ़ की तर्ज पर गौचर में 18-सीटर हेलीसेवा शुरू की जाएगी। यह निर्णय क्षेत्र में पर्यटन, व्यापार और आपातकालीन सेवाओं को नई दिशा देगा।
यह हेलीसेवा:
- पर्वतीय क्षेत्रों की यात्रा को आसान करेगी
- पर्यटकों व व्यापारियों के लिए सुगम आवागमन सुनिश्चित करेगी
- आपदा और स्वास्थ्य आपातकाल में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार हवाई संपर्क बढ़ाकर पर्वतीय अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने की दिशा में लगातार काम कर रही है।
नगर क्षेत्र में पार्किंग और सड़क निर्माण की बड़ी घोषणाएँ
मुख्यमंत्री धामी ने गौचर नगर क्षेत्र के चार प्रमुख स्थानों पर आधुनिक पार्किंग सुविधाओं के निर्माण की भी घोषणा की, जिससे धार्मिक एवं पर्यटन सीजन के दौरान ट्रैफिक दबाव को कम किया जा सकेगा।
इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री ने साकेत नगर – रघुनाथ मंदिर – चटवापीपल मोटर मार्ग के निर्माण की घोषणा करते हुए कहा कि यह मार्ग स्थानीय आवाजाही और व्यापार दोनों को सुगम बनाएगा।
उन्होंने यह भी बताया कि:
“गौचर में स्टेडियम निर्माण के लिए धनराशि स्वीकृत कर दी गई है और इसका कार्य बहुत जल्द आरंभ किया जाएगा।”
राज्य की सांस्कृतिक और फिल्म शूटिंग पहचान को मिलेगी मजबूती
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि उत्तराखंड आज तेजी से फिल्म शूटिंग का पसंदीदा डेस्टिनेशन बन रहा है। सुंदर लोकेशंस और सुरक्षित माहौल के कारण राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय फिल्म निर्माता राज्य की ओर आकर्षित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब उत्तराखंड वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में भी अपनी पहचान स्थापित कर रहा है, जिससे पर्यटन और स्थानीय रोजगार को बड़ा लाभ मिलेगा।
मेले में परंपराओं की उमंग: सांस्कृतिक कार्यक्रमों से गूंज उठा गौचर
73वें गौचर मेले के पहले दिन की शुरुआत ईष्ट रावल देवता की पूजा और प्रभात फेरी से हुई। स्कूली बच्चों ने रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधानों में भव्य प्रभात फेरी निकाली।
इसके बाद मेलाध्यक्ष ने झंडारोहण कर परेड की सलामी ली।
दिनभर चले कार्यक्रमों में शामिल रहे:
- क्रॉस कंट्री दौड़ (मुख्य द्वार से चटवापीपल पुल तक)
- बालक एवं बालिका दौड़ प्रतियोगिता
- नेहरू चित्रकला प्रतियोगिता
- शिशु प्रदर्शनी
- स्कूलों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम
शाम को पहली सांस्कृतिक संध्या में लोक गायिका डॉ. पम्मी नवल की जागर संध्या दर्शकों के लिए मुख्य आकर्षण रहेगी। मेले में लगाए गए पारंपरिक पहाड़ी संस्कृति से सजा भव्य पांडाल लोगों के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
पत्रकारिता व शिक्षा के क्षेत्र में सम्मान
कार्यक्रम के दौरान दो प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों को सम्मानित किया गया:
- वरिष्ठ पत्रकार हरीश मैखुरी को – गोविन्द प्रसाद नौटियाल पत्रकार सम्मान
- वरिष्ठ साहित्यकार एवं शिक्षाविद डॉ. नन्द किशोर हटवाल को – पंडित महेशानंद नौटियाल शिक्षा एवं साहित्य प्रसार सम्मान
मुख्यमंत्री ने कहा कि पत्रकारिता और शिक्षा समाज की रीढ़ हैं और इन्हें सम्मानित करना समाज के प्रति उनके योगदान का सम्मान है।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री का स्वागत किया, क्षेत्रीय मांगें रखीं
कार्यक्रम के दौरान क्षेत्रीय विधायक अनिल नौटियाल और मेला उपाध्यक्ष संदीप नेगी ने मुख्यमंत्री धामी का हार्दिक स्वागत करते हुए क्षेत्र की समस्याएं और विकास संबंधी मांगें रखीं। मुख्यमंत्री ने सभी मांगों को गंभीरतापूर्वक सुना और आवश्यक कार्रवाई का भरोसा दिलाया।
पहाड़ी संस्कृति और सामूहिक सहभागिता की मिसाल
पहले दिन मेले में हजारों की संख्या में लोग पहुंचे। मेले की पारंपरिक झलकियों—स्थानीय खाद्य स्टालों, हस्तशिल्प निर्माण, पहाड़ी परिधानों, लोकगीतों, नृत्यों और सांस्कृतिक प्रदर्शनों—ने वातावरण को उत्सवी बना दिया। गौचर मेला दशकों से सामुदायिक एकता और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक रहा है, और इस वर्ष भी इसकी चमक बरकरार है।
कार्यक्रम में कई जनप्रतिनिधियों की सहभागिता
इस अवसर पर उपस्थित रहे:
- थराली विधायक भूपाल राम टम्टा
- रुद्रप्रयाग विधायक भरत चौधरी
- राज्य मंत्री हरक सिंह नेगी
- जिला पंचायत अध्यक्ष दौलत सिंह बिष्ट
- जिला पंचायत उपाध्यक्ष लक्ष्मण खत्री
- भाजपा जिलाध्यक्ष गजपाल बर्तवाल
- महामंत्री अरुण मैठाणी
- अन्य स्थानीय प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी
73वें गौचर राजकीय औद्योगिक एवं सांस्कृतिक मेले का उद्घाटन न केवल परंपराओं के संरक्षण का उत्सव है, बल्कि यह उत्तराखंड की बदलती आर्थिकी, विकसित पर्यटन मॉडल और आधुनिक बुनियादी ढांचे की दिशा में एक बड़ा कदम भी है। मुख्यमंत्री द्वारा की गई घोषणाएं क्षेत्र में कनेक्टिविटी, व्यापार, खेल सुविधाओं और स्थानीय उद्योगों के लिए नए अवसर पैदा करेंगी।
गौचर का यह वार्षिक मेला उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की जीवंत छवि पेश करता है और आने वाले दिनों में इसके और भी भव्य होने की उम्मीद है।



