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दिल्लीफीचर्ड

दिल्ली में CJP प्रदर्शन पर बवाल: कनॉट प्लेस में हिंसा, पुलिस की बड़ी कार्रवाई; 4 FIR दर्ज, कई गंभीर धाराओं में शुरू हुई जांच

The Hill India News
Last updated: July 21, 2026 6:11 am
The Hill India News
Published: July 21, 2026
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नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में जंतर-मंतर पर चल रहे CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) के छात्र आंदोलन ने सोमवार को उस समय नया मोड़ ले लिया, जब प्रदर्शन के दौरान कनॉट प्लेस इलाके में हिंसा, तोड़फोड़ और पथराव की घटनाएं सामने आईं। हालात बिगड़ने के बाद दिल्ली पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अब तक चार एफआईआर दर्ज कर ली हैं, जबकि दो अन्य मामलों में भी मुकदमा दर्ज करने की प्रक्रिया जारी है। पुलिस का कहना है कि कानून व्यवस्था बिगाड़ने, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, पुलिसकर्मियों पर हमला करने और हिंसा की साजिश रचने जैसे गंभीर आरोपों की गहन जांच की जा रही है। दूसरी ओर प्रदर्शनकारी संगठन CJP ने पुलिस पर बल प्रयोग और प्रदर्शनकारियों के साथ मारपीट करने के आरोप लगाए हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने राजधानी की राजनीति और कानून-व्यवस्था दोनों को केंद्र में ला दिया है।

सोमवार को संसद सत्र के दौरान CJP के नेतृत्व में बड़ी संख्या में छात्र और समर्थक जंतर-मंतर से आगे बढ़े। पुलिस के अनुसार प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने निर्धारित नियमों का उल्लंघन करते हुए कनॉट प्लेस के आउटर सर्कल स्थित रीगल सिनेमा के पास पुलिस वाहनों पर हमला कर दिया। आरोप है कि प्रदर्शनकारियों के एक समूह ने सरकारी वाहनों में तोड़फोड़ की, पुलिसकर्मियों पर पथराव किया और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में बाधा उत्पन्न की। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया और कई स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई।

घटना के बाद कनॉट प्लेस थाने में अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। पुलिस अब सीसीटीवी कैमरों की फुटेज, मोबाइल वीडियो और सोशल मीडिया पर वायरल क्लिप की मदद से उपद्रवियों की पहचान करने में जुटी है। अधिकारियों का कहना है कि हिंसा में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर गिरफ्तारी की जाएगी।

दिल्ली पुलिस ने बताया कि अब तक चार अलग-अलग एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। पहली एफआईआर संसद सत्र के दौरान बिना अनुमति ड्रोन उड़ाने के मामले में दर्ज हुई है। दूसरी एफआईआर हिंसा की कथित साजिश से संबंधित है, जिसमें पुलिस को जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण तकनीकी और डिजिटल साक्ष्य मिलने का दावा किया गया है। तीसरी और चौथी एफआईआर सरकारी कार्य में बाधा डालने, पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट करने और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोपों में दर्ज की गई हैं। इसके अलावा दो अन्य मामलों में भी कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है।

पुलिस के अनुसार संसद मार्ग थाने में दर्ज मुकदमे में भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की कई गंभीर धाराओं को शामिल किया गया है। इनमें लोक सेवक के कार्य में बाधा डालना, सरकारी आदेशों की अवहेलना, गैरकानूनी जमावड़ा, हिंसक भीड़, दंगा, सार्वजनिक व्यवस्था भंग करना, आपराधिक साजिश, मानव जीवन को खतरे में डालने वाले कृत्य तथा सामूहिक अपराध जैसी धाराएं शामिल हैं। इसके अतिरिक्त आर्म्स एक्ट, 1959 तथा सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान से संरक्षण अधिनियम (PDPP Act) के तहत भी मामला दर्ज किया गया है। इन धाराओं के तहत दोष सिद्ध होने पर कठोर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है।

दिल्ली पुलिस का कहना है कि शुरुआती जांच में यह संकेत मिले हैं कि प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने सुनियोजित तरीके से कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश की। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या हिंसा पूर्व नियोजित थी और क्या इसके पीछे किसी संगठित समूह की भूमिका थी। जांच एजेंसियां मोबाइल डेटा, सीसीटीवी रिकॉर्डिंग और डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण कर रही हैं ताकि पूरे घटनाक्रम की वास्तविक तस्वीर सामने लाई जा सके।

उधर मंगलवार सुबह भी जंतर-मंतर पर छात्रों और प्रदर्शनकारियों का जुटना जारी रहा। प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखने की बात कह रहे हैं। सुरक्षा के मद्देनजर पूरे इलाके में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। बैरिकेडिंग बढ़ा दी गई है और संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त पुलिसकर्मियों की नियुक्ति की गई है ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके। दिल्ली पुलिस लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और वरिष्ठ अधिकारी मौके पर मौजूद रहकर स्थिति की समीक्षा कर रहे हैं।

इस बीच CJP ने पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रंका ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण था, लेकिन पुलिस ने बिना आवश्यकता के बल प्रयोग किया। उनका दावा है कि कई छात्रों और युवाओं के साथ मारपीट की गई, जिससे कई लोग घायल हुए। उन्होंने कहा कि आंदोलन लोकतांत्रिक अधिकारों के तहत किया जा रहा है और जब तक उनकी मांगों पर उचित कार्रवाई नहीं होती, तब तक प्रदर्शन जारी रहेगा।

हालांकि दिल्ली पुलिस ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। पुलिस का कहना है कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कई वीडियो और पोस्ट भ्रामक हैं तथा उन्हें संदर्भ से हटाकर प्रस्तुत किया जा रहा है। विशेष रूप से एक युवती के साथ कथित मारपीट और बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों के गंभीर रूप से घायल होने के दावों को पुलिस ने तथ्यों के आधार पर गलत बताया है। पुलिस ने कहा कि उपलब्ध वीडियो, मेडिकल रिकॉर्ड और मौके पर मौजूद अधिकारियों की रिपोर्ट में ऐसे दावों की पुष्टि नहीं हुई है।

दिल्ली पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर किसी भी अपुष्ट या भ्रामक जानकारी को साझा करने से बचें। अधिकारियों का कहना है कि गलत सूचना से न केवल भ्रम की स्थिति पैदा होती है, बल्कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने में भी कठिनाई आती है। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर अफवाह फैलाता पाया गया तो उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

राजधानी में हुए इस घटनाक्रम ने एक बार फिर शांतिपूर्ण प्रदर्शन और कानून-व्यवस्था के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती को सामने ला दिया है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रत्येक नागरिक को अपनी बात रखने और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार है, लेकिन यदि प्रदर्शन हिंसा, तोड़फोड़ या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने में बदल जाता है, तो कानून के अनुसार कार्रवाई होना भी आवश्यक है। इसी प्रकार, यदि पुलिस कार्रवाई को लेकर कोई शिकायत या आरोप हैं, तो उनकी निष्पक्ष जांच भी लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

फिलहाल दिल्ली पुलिस की जांच कई स्तरों पर जारी है। सीसीटीवी फुटेज, ड्रोन रिकॉर्डिंग, डिजिटल साक्ष्य और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान जुटाए जा रहे हैं। आने वाले दिनों में जांच के आधार पर और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। वहीं दूसरी ओर जंतर-मंतर पर आंदोलन जारी रहने के संकेत मिल रहे हैं, जिससे राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस पूरी तरह सतर्क है।

अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं, हिंसा में शामिल लोगों की पहचान कैसे होती है और प्रदर्शन तथा पुलिस कार्रवाई को लेकर लगाए गए आरोपों की वास्तविकता क्या निकलती है। इतना तय है कि राजधानी में हुई इस घटना ने कानून-व्यवस्था, लोकतांत्रिक विरोध और सार्वजनिक सुरक्षा जैसे मुद्दों पर नई बहस छेड़ दी है। आने वाले दिनों में पुलिस जांच, न्यायिक प्रक्रिया और संबंधित पक्षों के बयानों के बाद ही पूरे मामले की स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी।

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