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यूपी एसआईआर लिस्ट अपडेट: शहरी क्षेत्रों में ज्यादा वोट कटे, चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज

उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया पूरी होने के बाद जो अंतिम आंकड़े सामने आए हैं, उन्होंने राजनीतिक समीकरणों को नया मोड़ दे दिया है। पहले जहां विपक्षी दल यह आरोप लगा रहे थे कि धर्म विशेष के आधार पर वोट काटे जा रहे हैं, वहीं फाइनल वोटर लिस्ट जारी होने के बाद यह दावा काफी हद तक गलत साबित होता दिख रहा है।

राज्य में अब कुल मतदाताओं की संख्या 13,39,84,792 हो गई है, जबकि ड्राफ्ट सूची में यह संख्या 12,55,56,025 थी। एसआईआर शुरू होने से पहले प्रदेश में करीब 15.44 करोड़ मतदाता थे। यानी पूरी प्रक्रिया के दौरान लगभग 2.05 करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से हटे हैं।

हालांकि, ड्राफ्ट सूची जारी होने के बाद निर्वाचन आयोग ने दावों और आपत्तियों के लिए समय दिया, जिसके दौरान 84 लाख से अधिक नए मतदाता जोड़े गए। इसके बावजूद बड़ी संख्या में नाम कटना राजनीतिक दलों के लिए चिंता का विषय बन गया है।


मुस्लिम बहुल जिलों में कम कटे वोट, दावों पर उठा सवाल

एसआईआर प्रक्रिया के दौरान सबसे बड़ा आरोप यह लगाया गया था कि मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में जानबूझकर मतदाताओं के नाम काटे जा रहे हैं। लेकिन अंतिम सूची के आंकड़े इस धारणा से अलग तस्वीर पेश करते हैं।

सहारनपुर, मुरादाबाद, रामपुर, बिजनौर और मुजफ्फरनगर जैसे जिलों में अपेक्षाकृत कम वोट कटे हैं। उदाहरण के तौर पर सहारनपुर में करीब 4.32 लाख वोट कटे, जबकि 22 लाख से अधिक मतदाता सूची में बने हुए हैं। मुरादाबाद में लगभग 2.48 लाख नाम हटे, जबकि पहले यहां 24.59 लाख वोटर थे जो अब घटकर 22.11 लाख रह गए हैं।

रामपुर में भी करीब 2.16 लाख नाम कटे हैं। इन आंकड़ों से साफ है कि जिन जिलों को मुस्लिम बहुल माना जाता है, वहां अपेक्षाकृत कम असर पड़ा है। इससे विपक्ष के आरोपों की धार कमजोर पड़ती नजर आ रही है।


लखनऊ, मेरठ और कानपुर मंडल में सबसे ज्यादा असर

अगर मंडलवार आंकड़ों पर नजर डालें तो सबसे ज्यादा वोट कटने का असर शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में देखने को मिला है।

लखनऊ मंडल में सबसे अधिक 20.40 लाख मतदाताओं के नाम हटे हैं। इसके बाद मेरठ मंडल में 20.68 लाख और कानपुर मंडल में 15.75 लाख वोटर्स सूची से बाहर हुए हैं। प्रयागराज मंडल में 15.44 लाख और बरेली मंडल में 13.78 लाख नाम कटे हैं।

वहीं, सबसे कम असर चित्रकूट मंडल में देखने को मिला, जहां सिर्फ 3.06 लाख वोटर्स के नाम हटे हैं।

गौरतलब है कि जिन क्षेत्रों में बीजेपी का प्रभाव अधिक रहा है, वहीं पर ज्यादा वोट कटे हैं। इससे पार्टी के लिए आगामी विधानसभा चुनाव से पहले नई रणनीति बनाना जरूरी हो गया है।


बड़े नेताओं के क्षेत्रों में भी असर, बीजेपी-सपा दोनों सतर्क

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह जनपद गोरखपुर में भी एसआईआर का बड़ा असर देखने को मिला है। यहां 9 विधानसभा सीटों में कुल 4.21 लाख मतदाताओं के नाम कट गए हैं। पहले जहां कुल मतदाता 36.66 लाख थे, अब यह संख्या घटकर 32.45 लाख रह गई है।

वहीं समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के संसदीय क्षेत्र कन्नौज में भी करीब 2.75 लाख वोटर्स के नाम कटे हैं। पहले यहां 12.89 लाख मतदाता थे, जो अब घटकर करीब 10.67 लाख रह गए हैं। हालांकि इस दौरान करीब 55 हजार नए मतदाता भी जुड़े हैं।

राजनीतिक रूप से यह स्थिति दोनों प्रमुख दलों के लिए चुनौतीपूर्ण बन गई है। भारतीय जनता पार्टी के लिए चिंता की बात यह है कि उसके मजबूत माने जाने वाले शहरी इलाकों में ही ज्यादा वोट कटे हैं। पार्टी अब फाइनल लिस्ट के आधार पर नया डेटा बैंक तैयार करने में जुट गई है।

दूसरी ओर समाजवादी पार्टी भी पूरी सावधानी बरत रही है। सपा ने अपने कार्यकर्ताओं को “पीडीए प्रहरी” बनाकर बूथ स्तर पर सक्रिय रखा और दावा किया कि उनकी मेहनत से ज्यादा नुकसान नहीं हुआ। फिर भी पार्टी को आशंका है कि कहीं उनके वोटर्स के साथ गड़बड़ी न हुई हो, इसलिए वे सूची की गहन जांच कर रहे हैं।

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