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Uttarakhand: दबंगों की गुंडागर्दी के आगे बेबस परिवार, रुद्रपुर कलेक्ट्रेट पर बुजुर्ग महिला ने दी आत्मदाह की चेतावनी; प्रशासन में मचा हड़कंप

रुद्रपुर (ऊधमसिंह नगर): उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर जिले से न्याय प्रणाली और कानून व्यवस्था को चुनौती देने वाला एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। बाजपुर क्षेत्र में अपनी ही पुश्तैनी जमीन को दबंगों से बचाने की गुहार लगाते-लगाते जब एक बुजुर्ग महिला थक गई, तो उसने जिलाधिकारी कार्यालय के बाहर आत्मदाह की चेतावनी दे डाली। सोमवार को रुद्रपुर कलेक्ट्रेट में उस वक्त अफरा-तफरी मच गई जब हाथ में तख्ती लिए पीड़ित महिला परिवार संग धरने पर बैठ गई।

महिला की ‘अंतिम चेतावनी’ ने जिला प्रशासन के हाथ-पांव फुला दिए। आनन-फानन में कलेक्ट्रेट परिसर को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया और फायर ब्रिगेड की टीम को भी तैनात किया गया।

क्या है पूरा मामला: रसूख और दबंगई की कहानी

पीड़िता किन्दरजीत कौर, निवासी शेखुपुरा हसनपुर उत्तरी (जिला रामपुर, यूपी) ने अपनी व्यथा सुनाते हुए बताया कि उनका परिवार पिछले लंबे समय से भू-माफियाओं और प्रभावशाली रिश्तेदारों के आतंक के साये में जी रहा है।

पीड़िता के अनुसार, उनकी लगभग 4 एकड़ बेशकीमती भूमि ग्राम कनौरी (काशीपुर बाईपास रोड, तहसील बाजपुर) में स्थित है। यह जमीन उनके और उनके 15 वर्षीय नाबालिग पुत्र गुरदित्त सिंह के नाम पर राजस्व अभिलेखों में दर्ज है। इसके अलावा, रामपुर के शेखुपुरा में भी उनकी 9 एकड़ कृषि भूमि है। आरोप है कि उनके ही सगे संबंधी (तहेरे जेठ) बलकार सिंह और बखसिन्दर सिंह, कुछ बाहरी रसूखदार लोगों के साथ मिलकर इस करोड़ों की जमीन पर गिद्ध दृष्टि जमाए हुए हैं।

2 दिसंबर की वो खौफनाक दोपहर: 40 लोग, ट्रैक्टर और अवैध असलहे

पीड़िता ने जो आपबीती सुनाई वह किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। आरोप है कि 2 दिसंबर 2024 को करीब 30 से 40 हमलावर अवैध असलहों से लैस होकर ट्रैक्टरों के साथ कनौरी स्थित उनकी जमीन पर धमके।

  • खड़ी फसल को रौंदा: दबंगों ने दिनदहाड़े खेत में लगी लहलहाती फसल को जोत दिया।

  • गोली मारने की धमकी: विरोध करने पर परिवार को सरेआम गोली मारने की धमकी दी गई।

  • अवैध कब्जा: शक्ति और रसूख के बल पर उसी दिन जमीन के एक बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया गया।

अस्मत लूटने की धमकी और बेटियों की रुकी पढ़ाई

यह मामला महज जमीन के टुकड़े का नहीं रह गया है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं के चीरहरण का है। पीड़िता ने बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि दबंगों ने उनके घर का मुख्य रास्ता ट्रैक्टर खड़े कर अवरुद्ध कर दिया है।

सबसे विचलित करने वाला पक्ष यह है कि दबंगों द्वारा परिवार की जवान बेटियों को अश्लील गालियां दी जा रही हैं और उनकी अस्मत लूटने तक की धमकियां मिल रही हैं। इस खौफ के कारण बेटियां घर से बाहर निकलने और स्कूल-कॉलेज जाने तक से कतरा रही हैं। पीड़िता का कहना है कि उनके बीमार पति और बुजुर्ग सास के साथ भी मारपीट की गई है, जिसके पुख्ता सीटीवी फुटेज (CCTV Footage) उनके पास मौजूद हैं।

सिस्टम की चुप्पी पर उठे सवाल

पीड़िता किन्दरजीत कौर का आरोप है कि उन्होंने थाना बाजपुर, पुलिस चौकी दोराहा और परगना अधिकारी तक न्याय की गुहार लगाई, लेकिन आरोपियों के राजनीतिक रसूख के आगे पुलिस मौन साधे रही। जब स्थानीय स्तर पर कोई सुनवाई नहीं हुई, तब हारकर परिवार को आत्मदाह जैसा आत्मघाती कदम उठाने का मन बनाना पड़ा।

“जब रखवाले ही चुप्पी साध लें, तो गरीब आदमी कहाँ जाए? हमारी जमीन छीनी जा रही है, हमारी बेटियों की इज्जत खतरे में है, क्या इसी दिन के लिए हमने अपना आशियाना बनाया था?” – पीड़िता के आंसू भरे शब्द

प्रशासनिक कार्रवाई: आश्वासन या समाधान?

कलेक्ट्रेट पर बढ़ते तनाव को देखते हुए एडीएम कोस्तुभ मिश्रा मौके पर पहुंचे और पीड़िता की बात सुनी। भारी पुलिस फोर्स की मौजूदगी में पीड़ित परिवार को सुरक्षा और न्याय का भरोसा दिलाया गया।

एडीएम कोस्तुभ मिश्रा का बयान:

“एक बुजुर्ग महिला जिलाधिकारी कार्यालय में अपनी समस्या लेकर आई थीं। मामला जमीन से संबंधित विवाद का है। जिला प्रशासन ने संबंधित तहसील और पुलिस अधिकारियों को निर्देशित किया है। पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी और जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर विधिसम्मत कठोर कार्रवाई की जाएगी।”

एडीएम के ठोस आश्वासन के बाद बुजुर्ग महिला ने अपना धरना समाप्त किया, लेकिन चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उनकी जमीन दबंगों से मुक्त नहीं कराई गई और परिवार को सुरक्षा नहीं मिली, तो वे फिर से कड़े कदम उठाने को मजबूर होंगी।

कानून के इकबाल की परीक्षा

रुद्रपुर कलेक्ट्रेट धरना और जमीन पर अवैध कब्जा के इस मामले ने एक बार फिर तराई क्षेत्र में भू-माफियाओं के बढ़ते हौसलों को उजागर कर दिया है। सवाल यह है कि क्या प्रशासन इन रसूखदारों पर नकेल कस पाएगा? क्या किन्दरजीत कौर की बेटियों को फिर से निर्भय होकर पढ़ाई करने का माहौल मिल पाएगा? यह देखना अब जिला प्रशासन की सक्रियता पर निर्भर करेगा।

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