लखनऊ: MBBS में दाखिला दिलाने के नाम पर 100 करोड़ की ठगी का भंडाफोड़, दो आरोपी गिरफ्तार

लखनऊ: मेडिकल कॉलेजों में MBBS दाखिले का झांसा देकर 100 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी करने वाले दो शातिर जालसाजों को साइबर क्राइम पुलिस ने मंगलवार देर रात गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने दोनों को चिनहट के कठौता इलाके से दबोचा। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान प्रेम प्रकाश विद्यार्थी और उसके सहयोगी संतोष कुमार के रूप में हुई है।
पुलिस की जांच में सामने आया कि आरोपी ‘स्टडी पाथवे’ नाम से कंसल्टेंसी सेंटर चलाते थे और देशभर के छात्रों एवं अभिभावकों को प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन दिलाने का झांसा देकर करोड़ों रुपये ऐंठते थे। दोनों पिछले कई महीनों से फरार चल रहे थे।
कई छात्रों ने की शिकायत, मामला साइबर पुलिस तक पहुंचा
DCP क्राइम कमलेश दीक्षित ने बताया कि पिछले दिनों विभूतिखंड थाने और साइबर क्राइम थाने में कई पीड़ितों ने शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ताओं का आरोप था कि स्टडी पाथवे कंसल्टेंसी के कर्मचारियों ने MBBS में सीट दिलाने के नाम पर उनसे लाखों रुपये लिए, लेकिन बाद में न तो एडमिशन मिला, न ही पैसा वापस किया।
जांच शुरू होने पर पुलिस विभूतिखंड स्थित कंसल्टेंसी के दफ्तर पहुंची, लेकिन वहां ताला बंद मिला। कई कर्मचारियों के भी गायब होने की जानकारी मिली। लगातार तकनीकी और फील्ड इंटेलिजेंस के आधार पर पता चला कि कंसल्टेंसी का वास्तविक संचालक अभिनव शर्मा नाम से काम कर रहा व्यक्ति असल में प्रेम प्रकाश विद्यार्थी है, जबकि उसका मुख्य साथी संतोष कुमार पूरे नेटवर्क को संचालित करने में उसकी मदद करता था।
‘स्टडी पाथवे’: फर्जी ऑफिस, चमकदार सेटअप और झूठे वादों का जाल
जांच में सामने आया कि यह गैंग एक प्रोफेशनल कंसल्टेंसी की तरह काम करता था। आरोपियों ने:
- एक आकर्षक ऑफिस सेटअप तैयार किया
- सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर प्रचार किया
- मेडिकल कॉलेजों के फर्जी लेटर, ऑफर लेटर और एडमिशन स्लिप तैयार की
- प्रवेश प्रक्रिया से जुड़ी नकली काउंसलिंग कॉल्स और ईमेल भेजे
उनकी यह धोखाधड़ी इतनी बड़े पैमाने पर थी कि पुलिस को अब तक मिले दस्तावेज़ों के आधार पर अनुमान है कि कुल ठगी की रकम 100 करोड़ रुपये से अधिक हो सकती है। पुलिस का कहना है कि यह आंकड़ा आगे की जांच में और बढ़ सकता है।
अंतरराज्यीय नेटवर्क होने की आशंका
जांच अधिकारियों को संदेह है कि आरोपी उत्तर प्रदेश के अलावा दिल्ली, महाराष्ट्र, कर्नाटक और बिहार समेत कई राज्यों के छात्रों को निशाना बना चुके हैं। पुलिस इस रैकेट में शामिल अन्य लोगों की भी तलाश कर रही है, जिसमें काल सेंटर ऑपरेटर, फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले, और कमीशन पर काम करने वाले एजेंट शामिल हो सकते हैं।
पुलिस ने बरामद किए महत्वपूर्ण दस्तावेज
गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने आरोपियों के ठिकानों से कई अहम दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य बरामद किए हैं, जिनमें शामिल हैं:
- फर्जी एडमिशन लेटर
- विभिन्न मेडिकल कॉलेजों के नकली कागजात
- बैंक खातों के विवरण
- करोड़ों रुपये के लेनदेन के डिजिटल रिकॉर्ड
- मोबाइल फोन और लैपटॉप
प्रारंभिक जांच में यह भी पता चला कि आरोपी छात्र और अभिभावक को ‘कन्फर्म सीट’ का भरोसा दिलाने के लिए कॉलेज अधिकारियों के नाम पर फर्जी बातचीत भी करवाते थे।
आगे की कार्रवाई: मुख्य संचालक पर शिकंजा और नेटवर्क की तलाश
पुलिस अब इस मामले में मनी ट्रेल खंगाल रही है कि 100 करोड़ रुपये कहां-कहां ट्रांसफर किए गए। टीम यह भी जानने में जुटी है कि क्या यह पैसा हवाला के जरिए या क्रिप्टो में भी बदला गया।
इसके अलावा:
- स्टडी पाथवे कंसल्टेंसी के बैंक खातों पर रोक लगा दी गई है
- कई संदिग्धों को पूछताछ के लिए नोटिस भेजे गए हैं
- पीड़ित छात्रों की सूची तेजी से बढ़ रही है
DCP क्राइम कमलेश दीक्षित ने कहा कि इस बड़े रैकेट का पर्दाफाश छात्रों को ठगी से बचाने की दिशा में एक अहम कार्रवाई है। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि किसी भी तरह के मैनेजमेंट कोटा या डायरेक्ट एडमिशन के दावों से सतर्क रहें और हमेशा सरकार की आधिकारिक काउंसलिंग प्रक्रिया का पालन करें।



