सीतापुर (उत्तर प्रदेश)। उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में सोमवार सुबह जिला प्रशासन द्वारा समाजवादी पार्टी (सपा) के जिला कार्यालय पर की गई बुलडोजर कार्रवाई ने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। प्रशासन ने चार बुलडोजरों की मदद से लगभग 2500 वर्ग फीट क्षेत्र में बने सपा कार्यालय को ध्वस्त कर दिया। इस भवन में एक बड़ा हॉल और दो कमरे बने हुए थे, जिन्हें महज दो घंटे के भीतर मलबे में तब्दील कर दिया गया।
इस कार्रवाई की सबसे खास बात यह रही कि प्रशासन द्वारा पहले सुबह 10 बजे ध्वस्तीकरण की कार्रवाई का समय तय किया गया था, लेकिन अधिकारी और नगर पालिका की टीम तड़के करीब 5 बजे ही मौके पर पहुंच गई। इसके बाद बिना किसी विरोध-प्रदर्शन के कार्रवाई शुरू हुई और सुबह होते-होते पूरा भवन जमींदोज कर दिया गया।
सरकारी नजूल भूमि पर कब्जे का आरोप
प्रशासन का दावा है कि समाजवादी पार्टी का यह जिला कार्यालय सरकारी नजूल भूमि पर अवैध रूप से संचालित किया जा रहा था। अधिकारियों के अनुसार वर्ष 2005 में तत्कालीन नगर पालिका अध्यक्ष राधेश्याम जायसवाल द्वारा समाजवादी पार्टी के जिला कार्यालय के संचालन के लिए यह भूमि आवंटित की गई थी। उस समय इस जमीन का वार्षिक किराया मात्र 100 रुपये निर्धारित किया गया था।
हालांकि बाद में हुई जांच में आवंटन प्रक्रिया में कई अनियमितताएं सामने आईं। जांच रिपोर्ट के आधार पर 14 अप्रैल 2005 को उक्त भूमि का पट्टा निरस्त कर दिया गया था। प्रशासन का कहना है कि पट्टा निरस्त होने के बावजूद समाजवादी पार्टी का जिला कार्यालय लगातार संचालित होता रहा और सरकारी भूमि पर कब्जा बना रहा।
21 वर्षों से संचालित हो रहा था कार्यालय
प्रशासन के मुताबिक, पट्टा रद्द होने के बाद भी पिछले लगभग 21 वर्षों से यह भवन सपा के जिला कार्यालय के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था। इस मामले में जिला प्रशासन ने करीब 15 दिन पहले समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष को नोटिस जारी कर भवन खाली करने का निर्देश दिया था। नोटिस में स्पष्ट रूप से चेतावनी दी गई थी कि निर्धारित समय सीमा के भीतर भवन खाली नहीं किए जाने पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन ने भवन खाली करने के लिए रविवार तक का समय दिया था, लेकिन निर्धारित अवधि समाप्त होने के बाद भी भवन नहीं हटाया गया। इसके बाद जिला प्रशासन ने बुलडोजर कार्रवाई का फैसला लिया।
नोटिस और वीडियोग्राफी के बाद हुई कार्रवाई
प्रभारी नगर पालिका अधिकारी सीमा सिंह ने बताया कि भवन को हटाने से पहले सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया गया। उन्होंने कहा कि संबंधित पक्ष को विधिवत नोटिस दिया गया था। नोटिस जारी होने के 15 दिन बाद भी भवन खाली नहीं किया गया, जिसके बाद पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराई गई और नियमानुसार भवन को ध्वस्त कर दिया गया।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासन की कार्रवाई किसी राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं, बल्कि सरकारी भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने के उद्देश्य से की गई है।
कार्रवाई के दौरान नहीं दिखे सपा नेता
सोमवार सुबह जब प्रशासनिक टीम बुलडोजर लेकर मौके पर पहुंची, तब वहां समाजवादी पार्टी का कोई प्रमुख नेता या पदाधिकारी मौजूद नहीं था। न ही किसी प्रकार का विरोध-प्रदर्शन देखने को मिला। इसी वजह से प्रशासन को कार्रवाई पूरी करने में किसी तरह की बाधा का सामना नहीं करना पड़ा।
अधिकारियों की मौजूदगी में चार बुलडोजरों ने भवन को गिराना शुरू किया और लगभग दो घंटे के भीतर पूरा ढांचा ढहा दिया गया। इसके बाद प्रशासन ने मलबा हटाने का कार्य भी शुरू कर दिया।
राजनीतिक हलकों में बढ़ी हलचल
सपा कार्यालय पर हुई इस कार्रवाई के बाद जिले की राजनीति गरमा गई है। विपक्षी दलों और राजनीतिक विश्लेषकों की नजर अब इस मामले पर टिकी हुई है। समाजवादी पार्टी की ओर से अभी तक कोई बड़ा आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो सकती है।
वहीं प्रशासन अपने फैसले को पूरी तरह कानूनी और नियमसम्मत बता रहा है। अधिकारियों का कहना है कि सरकारी जमीन पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, चाहे वह किसी व्यक्ति, संस्था या राजनीतिक दल का ही क्यों न हो।
फिलहाल सीतापुर में हुई इस बुलडोजर कार्रवाई ने राजनीतिक माहौल को गर्मा दिया है। आने वाले दिनों में इस मामले पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और कानूनी बहस तेज होने की संभावना जताई जा रही है।
