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Uttarakhand: परवादून कांग्रेस कमेटी ने भाजपा नेता शेखर वर्मा और बीजेपी आईटी सेल पर लगाया दुष्प्रचार का आरोप

कांग्रेस जिलाध्यक्ष मोहित उनियाल के नेतृत्व में डोईवाला कोतवाली  में आपराधिक प्राथमिकी दर्ज करने की मांग

देहरादून/डोईवाला: उत्तराखण्ड की सियासत में रविवार को एक नया विवाद खड़ा हो गया, जब परवादून कांग्रेस कमेटी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने भाजपा नेता शेखर वर्मा और भाजपा उत्तराखण्ड आईटी सेल के खिलाफ आपराधिक प्राथमिकी दर्ज करने की औपचारिक मांग की। कांग्रेस का आरोप है कि दोनों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल को लक्षित करते हुए “झूठा, भ्रामक और मानहानिकारक” कंटेंट प्रसारित किया, जिससे न सिर्फ व्यक्तिगत प्रतिष्ठा को आघात पहुँचा है बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों पर भी हमला हुआ है।

यह प्रतिनिधिमंडल परवादून कांग्रेस जिलाध्यक्ष मोहित उनियाल के नेतृत्व में डोईवाला कोतवाली पहुँचा, जहाँ विस्तृत शिकायत पत्र सौंपा गया और भाजपा नेताओं पर कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग रखी गई।


धरना प्रदर्शन को ‘आतंकी गतिविधि’ के रूप में पेश करने का आरोप

कांग्रेस जिलाध्यक्ष मोहित उनियाल के अनुसार, पूरा विवाद 21 नवम्बर 2025 के उस शांतिपूर्ण धरने से जुड़ा है, जो कांग्रेस द्वारा वन्यजीव–मानव संघर्ष के बढ़ते मामलों को लेकर वन विभाग मुख्यालय, राजपुर रोड देहरादून में आयोजित किया गया था।
धरने के दौरान कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने सरकार की “निष्क्रियता और संवेदनहीनता” के विरोध में सांकेतिक प्रतीक के रूप में प्लास्टिक की खिलौना गन का उपयोग किया था।

उनियाल का कहना है कि यह एक लोकतांत्रिक विरोध का साधारण प्रतीक था। लेकिन भाजपा आईटी सेल और भाजपा नेता शेखर वर्मा ने “पूर्वाग्रह और राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित होकर” इस सांकेतिक प्रदर्शन को सोशल मीडिया पर “तोड़-मरोड़कर” प्रसारित किया और इसे “आतंकी संगठनों की गतिविधि” से जोड़ने का प्रयास किया।

कांग्रेस का आरोप है कि इस मनगढ़ंत सामग्री के माध्यम से गोदियाल को “विभिन्न आतंकवादी संगठनों के प्रमुख” के रूप में पेश किया गया, जो आईटी एक्ट, मानहानि, फेक न्यूज और दुष्प्रचार से संबंधित कानूनों का सीधा उल्लंघन है।


“लोकतांत्रिक मूल्यों पर प्रहार” — कांग्रेस का आरोप

डोईवाला ब्लॉक प्रमुख गौरव चौधरी ने कहा कि यह प्रकरण महज राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता नहीं, बल्कि लोकतंत्र की बुनियादी मर्यादाओं पर हमला है।
उनके अनुसार:

“प्रतीकात्मक विरोध को आतंकवाद से जोड़ने की कोशिश न सिर्फ आपराधिक कृत्य है, बल्कि यह समाज में भय और भ्रम फैलाने का प्रयास भी है। इस प्रकार की गतिविधियाँ लोकतंत्र, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और राजनीतिक शुचिता पर सीधा प्रहार हैं।”

चौधरी ने इस पूरे मामले को गंभीर बताते हुए जांच और दंडात्मक कार्रवाई की मांग की।


डोईवाला कांग्रेस नगर अध्यक्ष ने कड़ी कार्रवाई की मांग रखी

डोईवाला कांग्रेस नगर अध्यक्ष कर्तार नेगी ने कहा कि सोशल मीडिया का गलत उपयोग और “जानबूझकर फैलाई गई अफवाहें” आज लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन चुकी हैं।
नेगी ने कहा:

“इस प्रकार की भ्रामक सामग्री किसी भी राजनीतिक नेता की छवि को अपूरणीय क्षति पहुंचा सकती है। पुलिस को चाहिए कि तत्काल एफआईआर दर्ज करे और आरोपियों पर विधिसम्मत कार्रवाई करे।”

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि राजनीतिक मतभेद और विरोध अपनी जगह हैं, लेकिन गलत सूचना और चरित्र हनन को किसी भी रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता।


कांग्रेस नेतृत्व की एकजुटता, कई पदाधिकारी रहे मौजूद

शिकायत दर्ज कराने पहुंचे कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल में जिले और ब्लॉक के कई महत्वपूर्ण पदाधिकारी मौजूद रहे, जो इस मुद्दे पर पार्टी की एकजुटता को दर्शाता है।
प्रतिनिधिमंडल में शामिल थे:

  • परवादून कांग्रेस अध्यक्ष मोहित उनियाल
  • ब्लॉक प्रमुख गौरव चौधरी
  • कांग्रेस प्रदेश सचिव सागर मनवाल
  • पूर्व जिला पंचायत सदस्य ताजेन्द्र सिंह ताज
  • डोईवाला कांग्रेस नगर अध्यक्ष कर्तार नेगी
  • कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष महेन्द्र भट्ट
  • कांग्रेस आईटी सेल अध्यक्ष मधुसूदन सुंदरियाल
  • पूर्व प्रधान उमेद बोरा
  • एससी प्रकोष्ठ जिलाध्यक्ष जितेंद्र कुमार
  • सभासद गौरव मल्होत्रा
  • अमित सैनी, सावन राठौर, रेखा कांडपाल सती, राहुल आर्य, विवेक सैनी, मुकेश प्रसाद, प्रवीन सैनी, शाहरुख अली, हर्षित उनियाल, आशिक अली, विमल गोला, शाकिर अली, प्रदीप कुमार आदि बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

राजनीतिक माहौल में डिजिटल दुष्प्रचार बनी बड़ी चुनौती

विशेषज्ञों के अनुसार, यह मामला उन बढ़ती घटनाओं का ताजा उदाहरण है, जहां सोशल मीडिया को राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। भ्रामक ग्राफिक्स, गलत संदर्भ और एडिटेड कंटेंट न सिर्फ राजनीतिक संवाद को दूषित करते हैं, बल्कि कानून-व्यवस्था और सामाजिक विश्वास के लिए भी खतरा बनते हैं।

राजनीतिक दलों के बीच डिजिटल युद्ध तेज होने के साथ इस प्रकार की शिकायतें और आरोप आने वाले दिनों में और बढ़ सकते हैं। कांग्रेस का कहना है कि यह सिर्फ उनके नेता की छवि का सवाल नहीं, बल्कि लोकतंत्र की मर्यादाओं की रक्षा का मुद्दा है।


पुलिस की कार्रवाई पर टिकी निगाहें

कांग्रेस द्वारा औपचारिक शिकायत दर्ज किए जाने के बाद अब निगाहें पुलिस की कार्रवाई पर टिकी हैं। क्या डोईवाला पुलिस प्राथमिक जांच के आधार पर एफआईआर दर्ज करती है? क्या भाजपा आईटी सेल इसके जवाब में कोई सफाई या स्पष्टीकरण जारी करेगा? राजनीतिक हलकों में इन सवालों को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

कांग्रेस का कहना है कि जब तक आरोपियों पर कार्रवाई नहीं होती, पार्टी इस मुद्दे को बड़े स्तर पर उठाने के लिए तैयार है।

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