
मुजफ्फरपुर: बिहार के मुजफ्फरपुर जिले से एक अत्यंत हृदयविदारक और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है, जिसने पूरे इलाके को सदमे में डाल दिया है। जिले के सकरा थाना क्षेत्र अंतर्गत मिश्रौलिया गांव के वार्ड संख्या चार में देर रात एक पिता ने अपने ही पांच मासूम बच्चों को फंदे से लटका दिया और इसके बाद स्वयं भी फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। इस दर्दनाक घटना में पिता समेत तीन बेटियों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो बेटे किसी तरह बचा लिए गए।
घटना के बाद गांव में कोहराम मच गया और पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।
मृतक की पहचान और पारिवारिक पृष्ठभूमि
मृतक की पहचान अमरनाथ राम के रूप में हुई है, जो रूपनपट्टी मथुरापुर पंचायत के मिश्रौलिया गांव के निवासी थे। ग्रामीणों और पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार अमरनाथ राम पिछले कुछ समय से गंभीर मानसिक तनाव में थे।
बताया जा रहा है कि करीब एक वर्ष पहले उनकी पत्नी की मृत्यु हो गई थी। पत्नी के निधन के बाद से ही अमरनाथ पर बच्चों की परवरिश और परिवार चलाने की पूरी जिम्मेदारी अकेले आ गई थी। इसी दौरान वे आर्थिक तंगी और पारिवारिक परेशानियों से भी जूझ रहे थे।
रात में अंजाम दी गई खौफनाक वारदात
पुलिस के मुताबिक, यह घटना देर रात की है। अमरनाथ राम ने अपने घर के अंदर पहले अपने पांचों बच्चों को फंदे से लटकाया, उसके बाद खुद भी फांसी लगा ली। तीन बेटियों की घटनास्थल पर ही मौत हो गई, जबकि दो बेटे समय रहते बचा लिए गए।
सुबह जब पड़ोसियों को घर से कोई हलचल नहीं दिखी तो उन्होंने दरवाजा खटखटाया। अंदर से कोई जवाब नहीं मिलने पर ग्रामीणों ने घर में झांककर देखा, जहां का दृश्य देखकर सभी के होश उड़ गए।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची
घटना की जानकारी मिलते ही सकरा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और पूरे घर को सील कर जांच शुरू कर दी। पुलिस ने मृतकों के शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
थाना प्रभारी ने बताया कि फिलहाल आत्महत्या के पीछे की वजह की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है, लेकिन प्रारंभिक जांच में मानसिक तनाव और आर्थिक समस्याओं की बात सामने आ रही है।
ग्रामीणों के बयान: आर्थिक तंगी और अकेलापन बना कारण
ग्रामीणों के अनुसार, अमरनाथ राम एक साधारण जीवन जी रहे थे। पत्नी की मौत के बाद वे अक्सर गुमसुम रहते थे और कई बार अपनी परेशानियों का जिक्र भी करते थे। गांव के लोगों का कहना है कि—
- बच्चों की पढ़ाई और पालन-पोषण को लेकर वे चिंतित रहते थे
- आमदनी का कोई स्थायी साधन नहीं था
- पत्नी के निधन के बाद वे मानसिक रूप से टूट चुके थे
ग्रामीणों ने यह भी बताया कि उन्होंने कभी यह नहीं सोचा था कि अमरनाथ इतना बड़ा कदम उठा लेंगे।
पूरे गांव में शोक और सन्नाटा
इस दर्दनाक घटना के बाद मिश्रौलिया गांव में मातम का माहौल है। घर-घर में सन्नाटा पसरा हुआ है और लोग गहरे सदमे में हैं। मृत बच्चियों की मासूम उम्र ने लोगों के दिल को और ज्यादा झकझोर दिया है।
गांव के बुजुर्गों का कहना है कि यह घटना समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी है कि मानसिक स्वास्थ्य और आर्थिक संकट को समय रहते नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
पुलिस हर एंगल से कर रही जांच
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है।
जांच के मुख्य बिंदु हैं—
- आत्महत्या के पीछे वास्तविक कारण
- किसी प्रकार का बाहरी दबाव या विवाद
- मानसिक बीमारी या इलाज से जुड़ी जानकारी
- आर्थिक स्थिति और कर्ज का विवरण
पुलिस ने दो जीवित बचे बेटों को सुरक्षित स्थान पर रखा है और उनकी देखरेख की व्यवस्था की जा रही है।
प्रशासन की भूमिका और आगे की कार्रवाई
प्रशासन की ओर से भी इस घटना को गंभीरता से लिया गया है। स्थानीय प्रशासन ने पीड़ित परिवार के लिए सरकारी सहायता और मुआवजे की प्रक्रिया पर विचार शुरू कर दिया है। साथ ही बच्चों के भविष्य को लेकर भी आवश्यक कदम उठाए जाने की संभावना जताई जा रही है।
समाज के लिए एक चेतावनी
यह घटना सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं है, बल्कि समाज के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा करती है। मानसिक तनाव, अकेलापन और आर्थिक दबाव किस तरह किसी इंसान को अंदर से तोड़ सकता है, यह मामला उसका भयावह उदाहरण है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों से निपटने के लिए—
- मानसिक स्वास्थ्य पर खुलकर बात करना
- जरूरतमंदों तक सरकारी योजनाओं की पहुंच
- सामाजिक सहयोग और संवाद
बेहद जरूरी है।
निष्कर्ष
मुजफ्फरपुर की यह घटना पूरे समाज को झकझोर देने वाली है। एक पिता द्वारा अपने ही बच्चों के साथ आत्महत्या जैसा कदम उठाना यह दर्शाता है कि समय रहते सहायता और संवाद न मिलने पर हालात कितने भयावह हो सकते हैं।
अब सबकी निगाहें पुलिस जांच पर टिकी हैं कि इस दर्दनाक फैसले के पीछे की असली वजह क्या थी और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाएंगे।
में भी बना दूँ। बस बोल देना।



