
देहरादून/काशीपुर: उत्तराखंड के बहुचर्चित सुखवंत सिंह आत्महत्या मामले में विशेष जांच दल (SIT) ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। न्याय की गुहार लगाते हुए अपनी जान गंवाने वाले काशीपुर के किसान सुखवंत सिंह के मामले में अब पुलिस विभाग के आला अधिकारियों पर शिकंजा कसता नजर आ रहा है। SIT ने उधम सिंह नगर के तत्कालीन वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) समेत तीन उप निरीक्षकों और एक अपर उपनिरीक्षक को पूछताछ के लिए नोटिस जारी किया है। यह कदम मृतक द्वारा सुसाइड नोट और वीडियो में लगाए गए गंभीर आरोपों के बाद उठाया गया है।
SSP और पुलिसकर्मियों से होगी पूछताछ
SIT के सदस्य और पुलिस अधीक्षक (चंपावत) अजय गणपति ने स्पष्ट किया है कि सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो और परिजनों के प्राथमिक बयानों को आधार बनाकर पुलिस अधिकारियों की भूमिका की जांच की जा रही है। सुखवंत सिंह आत्महत्या मामला केवल एक व्यक्ति की मृत्यु तक सीमित नहीं है, बल्कि यह खाकी पर लगे उस दाग की भी कहानी है, जिसमें रक्षक पर ही भक्षक का साथ देने के आरोप लगे हैं। नोटिस जारी होने के बाद अब इन अधिकारियों को SIT के समक्ष उपस्थित होकर अपना पक्ष रखना होगा और उन आरोपों का जवाब देना होगा, जिनमें उन पर आरोपियों को संरक्षण देने की बात कही गई है।
बैंकिंग और राजस्व रिकॉर्ड की सूक्ष्म जांच
मामले की जड़ में भूमि धोखाधड़ी का एक बड़ा नेक्सस नजर आ रहा है। SIT ने केवल पुलिसिया लापरवाही ही नहीं, बल्कि उस आर्थिक अपराध की भी परते खोलनी शुरू कर दी है जिसने किसान को मौत के गले लगाने पर मजबूर किया।
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रजिस्ट्रार कार्यालय: तहसील और रजिस्ट्रार कार्यालय से जमीन के सौदे से जुड़े दस्तावेजों की मांग की गई है।
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बैंकिंग ट्रांजेक्शन: विभिन्न बैंकों को नोटिस भेजकर संबंधित खातों के लेन-देन का विवरण मांगा गया है।
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सत्यता की जांच: दस्तावेजों के मिलान के जरिए यह पता लगाया जाएगा कि 4 करोड़ की धोखाधड़ी को किस तरह अंजाम दिया गया और इसमें किन सफेदपोशों का हाथ था।
तकनीकी साक्ष्यों का सहारा ले रही SIT
SIT की विशेषज्ञ टीम इस समय ‘डिजिटल फुटप्रिंट्स’ पर ध्यान केंद्रित कर रही है। अजय गणपति के अनुसार, टेक्निकल सर्विलांस के जरिए कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), सीसीटीवी फुटेज और अन्य डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण किया जा रहा है। SIT यह सुनिश्चित करना चाहती है कि कोई भी दोषी तकनीकी खामी का फायदा उठाकर बच न सके। प्रेस नोट के माध्यम से दी गई जानकारी के अनुसार, सूक्ष्म परीक्षण की प्रक्रिया जारी है और जल्द ही कुछ बड़े खुलासे होने की उम्मीद है।
क्या था पूरा घटनाक्रम?
घटना 10 जनवरी की है, जब काशीपुर निवासी सुखवंत सिंह अपने परिवार के साथ काठगोदाम घूमने गए थे। वहां एक होटल में उन्होंने आत्मघाती कदम उठाया। आत्महत्या से पहले बनाए गए भावुक वीडियो में सुखवंत ने अपनी पीड़ा साझा की थी। उन्होंने बताया था कि जमीन के नाम पर उनके साथ 4 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी हुई है। जब वे इसकी शिकायत लेकर काशीपुर के आईटीआई थाने पहुंचे, तो वहां मदद मिलने के बजाय उन्हें ही डराया-धमकाया गया। वीडियो में उन्होंने सीधे तौर पर पुलिस कर्मियों पर आरोपियों के साथ सांठगांठ करने का आरोप लगाया था।
विभाग में मची खलबली: निलंबन और तबादले
वीडियो के वायरल होते ही उत्तराखंड पुलिस मुख्यालय में हड़कंप मच गया था। प्रारंभिक कार्रवाई के तौर पर:
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आईटीआई थाना प्रभारी और एक उपनिरीक्षक को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया।
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पैगा पुलिस चौकी के प्रभारी समेत 10 पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर किया गया।
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प्रशासनिक दबाव के बाद इन सभी का तबादला कुमाऊं मंडल से हटाकर गढ़वाल मंडल कर दिया गया।
दोहरी जांच की रडार पर मामला
मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार इस मामले में दोतरफा जांच चल रही है। एक ओर जहां कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत इस मामले की मजिस्ट्रेट जांच कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर आईजी एसटीएफ आनंद नीलेश भरणे की अध्यक्षता वाली SIT आपराधिक पहलुओं को खंगाल रही है।
हालांकि, इस मामले में एक कानूनी पेच भी फंसा है। सुखवंत सिंह के भाई की तहरीर पर 26 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था, लेकिन हाईकोर्ट ने फिलहाल आरोपियों की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। कानून व्यवस्था को पारदर्शिता के साथ बनाए रखने के लिए अब इस मुकदमे को भी आईटीआई थाने से हटाकर काठगोदाम थाने में स्थानांतरित कर दिया गया है।
सुखवंत सिंह आत्महत्या मामला उत्तराखंड में भ्रष्टाचार और पुलिसिया कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। क्या एक किसान को न्याय दिलाने के लिए उसकी जान की कीमत चुकानी अनिवार्य है? SIT की वर्तमान सक्रियता ने पीड़ित परिवार में उम्मीद तो जगाई है, लेकिन असली परीक्षा तब होगी जब बड़े नामों के खिलाफ ठोस सबूत पेश कर उन्हें कानून के कठघरे में खड़ा किया जाएगा।



